अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- नज्जैना: हमने नजात दी (मुक्त किया)
- अल-कर्ब: संकट, कठिनाई, दुःख और ग़म
- अल-अज़ीम: महान, बहुत बड़ा
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) पर अपनी महान कृपा और एहसान का ज़िक्र किया है। अल्लाह ने उन दोनों भाइयों को और उनकी क़ौम (बनी इसराईल) को उस महान संकट से नजात दी, जो फ़िरऔन के ज़ुल्म और अत्याचार की वजह से उन पर आया हुआ था।
यह संकट कितना भयानक था! बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा था, उनके बेटों को ज़िब्ह कर दिया जाता था, उनकी बेटियों को ज़िंदा रखकर उनसे मुश्किल काम लिया जाता था। वे लोग फ़िरऔन की पूरी तरह ग़ुलामी में जकड़े हुए थे, न उन्हें अपने धर्म की आज़ादी थी, न अपनी इज़्ज़त से जीने का हक़ था। और फिर आख़िर में अल्लाह ने उन्हें समुद्र के उस पार पहुँचाकर फ़िरऔन और उसकी फ़ौजों को डुबो दिया।
यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि जब बंदे अल्लाह पर भरोसा करते हैं और अपने नबी के साथ सब्र करते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसे संकटों से निकालता है जिनका कोई हल नज़र नहीं आता। यही वह सबक़ है जो हमें इस आयत से मिलता है — कि अल्लाह की मदद हमेशा साथ है, बशर्ते हम उस पर पूरा यक़ीन रखें और उसके रास्ते में सब्र करें।
यह क़िस्सा हमारे लिए सिर्फ़ एक तारीख़ी वाक़िया नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो किसी मुश्किल में फँसा हो। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को हर मुसीबत से रास्ता निकालता है। जिस तरह उसने मूसा और हारून को और उनकी क़ौम को उस महान संकट से बचाया, उसी तरह वह हमें भी हमारी मुश्किलों से नजात दे सकता है — बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने की और उसके दीन पर साबित क़दम रहने की।
📜 आयत 113-117 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 115
सूरा अस-साफ्फात आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त)…सूरा आयत 115/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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