अस-साफ्फात · 115/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ ۝١١٥
Wa najjainaahumaa wa qawmahumaa minal karbil `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नज्जैना: हमने नजात दी (मुक्त किया)
  • अल-कर्ब: संकट, कठिनाई, दुःख और ग़म
  • अल-अज़ीम: महान, बहुत बड़ा

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) पर अपनी महान कृपा और एहसान का ज़िक्र किया है। अल्लाह ने उन दोनों भाइयों को और उनकी क़ौम (बनी इसराईल) को उस महान संकट से नजात दी, जो फ़िरऔन के ज़ुल्म और अत्याचार की वजह से उन पर आया हुआ था।

यह संकट कितना भयानक था! बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा था, उनके बेटों को ज़िब्ह कर दिया जाता था, उनकी बेटियों को ज़िंदा रखकर उनसे मुश्किल काम लिया जाता था। वे लोग फ़िरऔन की पूरी तरह ग़ुलामी में जकड़े हुए थे, न उन्हें अपने धर्म की आज़ादी थी, न अपनी इज़्ज़त से जीने का हक़ था। और फिर आख़िर में अल्लाह ने उन्हें समुद्र के उस पार पहुँचाकर फ़िरऔन और उसकी फ़ौजों को डुबो दिया।

यह अल्लाह की रहमत और क़ुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि जब बंदे अल्लाह पर भरोसा करते हैं और अपने नबी के साथ सब्र करते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसे संकटों से निकालता है जिनका कोई हल नज़र नहीं आता। यही वह सबक़ है जो हमें इस आयत से मिलता है — कि अल्लाह की मदद हमेशा साथ है, बशर्ते हम उस पर पूरा यक़ीन रखें और उसके रास्ते में सब्र करें।

यह क़िस्सा हमारे लिए सिर्फ़ एक तारीख़ी वाक़िया नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो किसी मुश्किल में फँसा हो। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को हर मुसीबत से रास्ता निकालता है। जिस तरह उसने मूसा और हारून को और उनकी क़ौम को उस महान संकट से बचाया, उसी तरह वह हमें भी हमारी मुश्किलों से नजात दे सकता है — बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने की और उसके दीन पर साबित क़दम रहने की।



📜 आयत 113-117 — अस-साफ्फात

113وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ مُبِينٌ
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला
114وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं
115وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
116وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे
117وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
115आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 115

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Tuesday, August 18, 2026

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