अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَأَرْسَلْنَاهُ: और हमने उसे भेजा
- إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ: एक लाख लोगों की ओर
- أَوْ يَزِيدُونَ: या वे इससे भी अधिक थे
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी यूनुस (अलैहिस्सलाम) को एक बड़ी क़ौम की ओर भेजा, जिनकी संख्या एक लाख तक पहुँचती थी, बल्कि कुछ विद्वानों के अनुसार वे इससे भी अधिक थे। ये लोग नीनवा (मोसुल, इराक) के बाशिंदे थे। यह एक बहुत बड़ी जमात थी, जो अपने नबी की दावत से पहले गुमराही और कुफ्र में डूबी हुई थी।
जब यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह की तरफ़ बुलाया और उन्हें आने वाले अज़ाब से डराया, तो अल्लाह की रहमत से उनके दिल नरम हुए और उन्होंने ईमान ले आए। यह ईमान उनके लिए बचाव का ज़रिया बना, और अल्लाह ने उन पर से अज़ाब टाल दिया। उन्हें उनकी ज़िंदगी में खूब आराम और बरकत दी गई, और वे अपनी नियत अवधि तक जीवित रहे।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से पहले आती है। जब कोई क़ौम अपने नबी की दावत पर ईमान ले आती है, तो अल्लाह उनसे रहमत का सुलूक करता है। यह हमारे लिए भी एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने दिलों को ईमान और तौबा के लिए हमेशा तैयार रखें, क्योंकि अल्लाह की रहमत के दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। जो भी सच्चे दिल से उसकी तरफ़ लौटता है, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता।
यह क़िस्सा हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह के नबियों की दावत कितनी असरदार होती है जब लोग सच्चे दिल से उसे क़बूल करते हैं। एक लाख से ज़्यादा लोगों का ईमान लाना इस बात का सबूत है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है, और जब वह चाहता है, तो बड़ी से बड़ी क़ौम भी हिदायत पा सकती है। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के दरवाज़े पर दस्तक देते रहें, क्योंकि वह बहुत बड़ा क़बूल करने वाला और माफ़ करने वाला है।
📜 आयत 145-149 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 147
सूरा अस-साफ्फात आयत 147 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से)…सूरा आयत 147/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 145–149. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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