अस-साफ्फात · 162/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ ۝١٦٢
Maaa antum `alaihi befaaatineen
📖 हिंदी अर्थ
उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ: तुम उस (अल्लाह) के बारे में किसी को गुमराह करने वाले नहीं हो।

विस्तृत तफसीर:

ऐ मुशरिको! तुम और तुम्हारे ये झूठे देवता, जिन्हें तुम अल्लाह का साझी बनाते हो, अल्लाह के सच्चे और खरे बंदों को उनके दीन से नहीं भटका सकते। तुम्हारी सारी कोशिशें, चालें और जादू-टोने उन लोगों पर असर नहीं कर सकते जिन्होंने अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन कर लिया है। अल्लाह तआला ने अपने बंदों की हिफाजत का जिम्मा खुद ले रखा है, और वह उन्हें तुम्हारे वसवसों और फरेबों से महफूज़ रखता है।

हाँ, अल्लाह की मशिय्यत (इच्छा) और उसके फैसले के मुताबिक, जिस पर अल्लाह ने अपना अज़ाब लिख दिया है—यानी वह लोग जो अपनी सरकशी, ज़ुल्म और कुफ्र पर अड़े रहते हैं—वह तुम्हारे बहकावे में आ सकते हैं, लेकिन यह तुम्हारी ताकत से नहीं, बल्कि अल्लाह के इल्म और अदल के मुताबिक होता है। असल में तुम्हारा वसवसा सिर्फ उन्हीं के लिए है जिनके दिल पहले से बीमार हैं और जिन्होंने हक को नकारने का फैसला कर लिया है।

यह आयत मोमिनीन के लिए बड़ी खुशखबरी और इत्मिनान का पैगाम है। यह बताती है कि अल्लाह के सच्चे बंदे किसी भी गुमराह करने वाले के नुकसान से महफूज़ हैं। जब तक तुम अल्लाह से जुड़े रहोगे, उसकी रस्सी को थामे रहोगे, तो कोई ताकत तुम्हें राहे-हक से नहीं भटका सकती। यही वह वादा है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों से किया है—कि वह उन्हें शैतान और उसके साथियों के मकर से बचाएगा।

इसलिए ऐ ईमान वालों! अपने दीन पर मजबूती से कायम रहो, अल्लाह पर भरोसा रखो, और यह यकीन रखो कि सच्चाई की मदद अल्लाह करता है। तुम्हारी कामयाबी इसी में है कि तुम अपने रब की इबादत में मशगूल रहो और उसके रास्ते पर चलते रहो। अल्लाह तुम्हें हर बुराई से बचाएगा और तुम्हें वह इज्जत देगा जो उसके वली (प्यारे बंदों) को दी जाती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 160-164 — अस-साफ्फात

160إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)
161فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ
ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद
162مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ
उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते
163إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ الْجَحِيمِ
मगर उसको जो जहन्नुम में झोंका जाने वाला है
164وَمَا مِنَّا إِلَّا لَهُ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ
और फरिश्ते या आइम्मा तो ये कहते हैं कि मैं हर एक का एक दरजा मुक़र्रर है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 162

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Tuesday, August 18, 2026

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