Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَقُولُ (वह कहता है): यानी वह साथी कहता है।
- أَإِنَّكَ (क्या तुम सचमुच): यहाँ "أ" प्रश्नवाचक है, जो आश्चर्य और इनकार के लिए आया है।
- لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ (उन लोगों में से हो जो सत्य मानते हैं): यानी क़ियामत के दिन पुनर्जीवित होने और हिसाब-किताब को सच मानने वालों में से।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत उस सच्चे मोमिन के बारे में बताती है जो अपने एक पुराने साथी से मिलता है, और वह साथी उससे पूछता है: "क्या तुम सचमुच उन लोगों में से हो जो मृत्यु के बाद पुनर्जीवित होने को सच मानते हैं?" यह प्रश्न उपहास और मज़ाक़ के अंदाज़ में किया गया था, क्योंकि वह साथी आख़िरत के दिन को नहीं मानता था। वह इस बात पर हैरान था कि एक समझदार इंसान यह कैसे मान सकता है कि जब हम मर जाएँगे, हमारी हड्डियाँ चूर-चूर हो जाएँगी और हम मिट्टी में मिल जाएँगे, तो हमें दोबारा जीवित किया जाएगा और हमसे हमारे कर्मों का हिसाब लिया जाएगा।
यह दृश्य उस मोमिन की दृढ़ता और सच्चाई को दर्शाता है, जो अपने इनकार करने वाले साथी के सामने बिना किसी डर के अपने ईमान का इज़हार करता है। वह उसके मज़ाक़ से विचलित नहीं होता, बल्कि उसे यक़ीन है कि अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है। यही वह यक़ीन है जो मोमिन को दुनिया की मुश्किलों में सब्र और इस्तिक़ामत देता है।
प्रिय पाठक! यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान वालों को दुनिया में मज़ाक़ और तंज़ का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्हें अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहना चाहिए। क़ियामत का दिन सच है, और जो लोग आज इस पर हँसते हैं, वे कल अपने किए पर पछताएँगे। अल्लाह तआला की रहमत और इंसाफ़ का यह वादा है कि हर अच्छे और बुरे कर्म का बदला दिया जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अच्छे कर्म करें, और उन लोगों के मज़ाक़ की परवाह न करें जो आख़िरत को नहीं मानते। याद रखें, सच्चाई की जीत हमेशा होती है, और अल्लाह का वादा बिल्कुल सच्चा है।
📜 आयत 50-54 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 52
सूरा अस-साफ्फात आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत…सूरा आयत 52/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


