अस-साफ्फात · 53/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ ۝٥٣
A-izaa mitnaa wa kunnaa turaabanw wa `izaaman `ainnaa lamadeenoon
📖 हिंदी अर्थ
(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمَدِينُونَ: हिसाब के लिए पेश किए जाने वाले, बदला पाने वाले, यानी हमें (मरने के बाद) उठाकर हमारे कर्मों का हिसाब दिया जाएगा।

तफसीर:

यह आयत उस संदेह और इनकार को बयान करती है जो क़ियामत के दिन और पुनर्जीवन (आख़िरत) के बारे में कुफ़्फ़ार और मुनकिरीन ज़ाहिर करते थे। वे कहते थे: "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या सचमुच हमें दोबारा उठाया जाएगा और हमारे कर्मों का हिसाब लिया जाएगा?" यह सवाल उनके दिलों में आख़िरत की सच्चाई को नकारने और उसे असंभव समझने की वजह से पैदा हुआ था। वे इस बात को बड़ी हैरानी और तअज्जुब के साथ कहते थे कि मरने और सड़ने के बाद इंसान दोबारा कैसे ज़िंदा हो सकता है?

इस आयत में अल्लाह तआला उनके इस इनकार का जवाब देते हुए बताते हैं कि जिस अल्लाह ने पहली बार इंसान को पैदा किया, वह उसे दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। मिट्टी और हड्डियाँ बन जाने के बाद भी उसकी क़ुदरत से इंसान दोबारा उठाया जाएगा, और उसे अपने अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा हिसाब देना होगा। यह हिसाब अल्लाह की रहमत और अद्ल का तक़ाज़ा है, ताकि नेक लोगों को उनकी नेकी का बदला मिले और बुरे लोगों को उनकी बुराई का अंजाम भुगतना पड़े।

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई ज़िंदगी की शुरुआत है। जो लोग इस पर ईमान रखते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भर देते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि उनके हर अमल का हिसाब होगा। और जो लोग इस पर ईमान नहीं रखते, वे दुनिया की चंद रोज़ की ख़्वाहिशों में डूबे रहते हैं और आख़िरत के अज़ाब से बेख़बर रहते हैं। अल्लाह तआला की रहमत से हमें यह समझ मिले कि मौत के बाद की ज़िंदगी ही असली और हमेशा रहने वाली ज़िंदगी है, और उस दिन की तैयारी करना ही सबसे बड़ी भलाई है।



📜 आयत 51-55 — अस-साफ्फात

51قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ
फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था
52يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ
और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो
53أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ
(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा
54قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ
(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)
55فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ
तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 53

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Tuesday, August 18, 2026

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