अस-साफ्फात · 51/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ ۝٥١
Qaala qaaa`ilum minhum innee kaana lee qareen
📖 हिंदी अर्थ
फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ: उनमें से एक कहने वाला कहेगा।
  • قَرِينٌ: साथी, दोस्त, वह व्यक्ति जो दुनिया में साथ रहता था।

व्याख्या:

यह आयत उस दृश्य का वर्णन कर रही है जो जन्नत (स्वर्ग) में होगा, जब अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों को जन्नत की नेमतों से नवाज़ा होगा। उस समय जन्नत के लोग आपस में बातचीत करेंगे और अपने दुनिया के हालात याद करेंगे। उनमें से एक मोमिन (ईमानवाला) कहेगा: "मेरा दुनिया में एक साथी था, जो मेरे साथ रहता था और मेरी हर बात में शामिल होता था।" यह साथी उसके जीवन का करीबी दोस्त था, लेकिन वह आख़िरत (पुनरुत्थान) का इनकार करता था। वह मोमिन अपने उस साथी के बारे में बताएगा कि कैसे वह उसे गुमराह करने की कोशिश करता था, कैसे वह उससे कहता था कि मरने के बाद दोबारा उठना और हिसाब-किताब होना कोई सच्ची बात नहीं है। यह वही दोस्त है जिसका ज़िक्र आगे की आयात में आएगा कि वह उससे कहता था: "क्या तू भी उन लोगों में से है जो मरने के बाद दोबारा उठने की तस्दीक़ करते हैं? क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएंगे, तो क्या हमें सच में सज़ा दी जाएगी?" (सूरह अस-साफ्फात: 52-53)

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में हमारे साथी और दोस्त हमारी आख़िरत पर गहरा असर डालते हैं। एक अच्छा साथी हमें अल्लाह की याद दिलाता है और सीधे रास्ते पर चलाता है, जबकि एक बुरा साथी हमें गुमराह कर सकता है। इसलिए हमें अपने दोस्तों के चुनाव में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। हमें ऐसे लोगों की संगत से बचना चाहिए जो आख़िरत का इनकार करते हैं या हमें अल्लाह की इबादत से दूर करते हैं।

यह दृश्य हमें यह भी बताता है कि जन्नत में मोमिनीन एक-दूसरे से मुहब्बत और भाईचारे के साथ बात करेंगे, और वे अपने दुनिया के अनुभवों से सबक लेकर अल्लाह की रहमत का शुक्र अदा करेंगे। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में ऐसे काम करें जो हमें जन्नत की तरफ ले जाएं, और ऐसे लोगों से दोस्ती करें जो हमें अल्लाह की राह पर चलने में मदद करें। अल्लाह तआला हम सबको सच्चे दोस्तों की संगत नसीब करे और हमें जन्नत की नेमतों से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 49-53 — अस-साफ्फात

49كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَّكْنُونٌ
(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी
50فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ
गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो
51قَالَ قَائِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّي كَانَ لِي قَرِينٌ
फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था
52يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ
और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो
53أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ
(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 51

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Tuesday, August 18, 2026

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