Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ: उनमें से एक कहने वाला कहेगा।
- قَرِينٌ: साथी, दोस्त, वह व्यक्ति जो दुनिया में साथ रहता था।
व्याख्या:
यह आयत उस दृश्य का वर्णन कर रही है जो जन्नत (स्वर्ग) में होगा, जब अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों को जन्नत की नेमतों से नवाज़ा होगा। उस समय जन्नत के लोग आपस में बातचीत करेंगे और अपने दुनिया के हालात याद करेंगे। उनमें से एक मोमिन (ईमानवाला) कहेगा: "मेरा दुनिया में एक साथी था, जो मेरे साथ रहता था और मेरी हर बात में शामिल होता था।" यह साथी उसके जीवन का करीबी दोस्त था, लेकिन वह आख़िरत (पुनरुत्थान) का इनकार करता था। वह मोमिन अपने उस साथी के बारे में बताएगा कि कैसे वह उसे गुमराह करने की कोशिश करता था, कैसे वह उससे कहता था कि मरने के बाद दोबारा उठना और हिसाब-किताब होना कोई सच्ची बात नहीं है। यह वही दोस्त है जिसका ज़िक्र आगे की आयात में आएगा कि वह उससे कहता था: "क्या तू भी उन लोगों में से है जो मरने के बाद दोबारा उठने की तस्दीक़ करते हैं? क्या जब हम मर जाएंगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएंगे, तो क्या हमें सच में सज़ा दी जाएगी?" (सूरह अस-साफ्फात: 52-53)
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में हमारे साथी और दोस्त हमारी आख़िरत पर गहरा असर डालते हैं। एक अच्छा साथी हमें अल्लाह की याद दिलाता है और सीधे रास्ते पर चलाता है, जबकि एक बुरा साथी हमें गुमराह कर सकता है। इसलिए हमें अपने दोस्तों के चुनाव में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। हमें ऐसे लोगों की संगत से बचना चाहिए जो आख़िरत का इनकार करते हैं या हमें अल्लाह की इबादत से दूर करते हैं।
यह दृश्य हमें यह भी बताता है कि जन्नत में मोमिनीन एक-दूसरे से मुहब्बत और भाईचारे के साथ बात करेंगे, और वे अपने दुनिया के अनुभवों से सबक लेकर अल्लाह की रहमत का शुक्र अदा करेंगे। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में ऐसे काम करें जो हमें जन्नत की तरफ ले जाएं, और ऐसे लोगों से दोस्ती करें जो हमें अल्लाह की राह पर चलने में मदद करें। अल्लाह तआला हम सबको सच्चे दोस्तों की संगत नसीब करे और हमें जन्नत की नेमतों से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 49-53 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 51
सूरा अस-साफ्फात आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते…सूरा आयत 51/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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