अस-साफ्फात · 70/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَهُمْ عَلَىٰ آثَارِهِمْ يُهْرَعُونَ ۝٧٠
Fahum `alaa aasaarihim yuhra`oon
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آثارِهِمْ: उनके नक्शे-क़दम, उनके रास्ते
  • يُهْرَعُونَ: दौड़ते हुए, जल्दी-जल्दी चलते हुए, बिना रुके पीछा करते हुए

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन कर रही है जो अपने बाप-दादा की राह पर अंधाधुंध चलते हैं। जब उनसे कहा जाता है कि "तुम लोगों ने अपने बाप-दादा को जिस राह पर पाया, क्या तुम उसी पर चलते रहोगे?" तो वे बिना किसी दलील और बिना किसी सोच-विचार के कहते हैं कि "हाँ, हम तो अपने बाप-दादा के नक्शे-क़दम पर चलेंगे।"

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि "फ़हुम अला आसारिहिम युहरिऊन" यानी वे अपने बाप-दादा के नक्शे-क़दम पर दौड़ते हुए चलते हैं। यानी वे इतनी जल्दी और बेसब्र होकर उनके पीछे चलते हैं जैसे कोई किसी को पुकार रहा हो और वह दौड़ा चला जा रहा हो। वे रुककर यह नहीं सोचते कि जिस रास्ते पर हम चल रहे हैं, वह सही है या ग़लत। वे अपने बाप-दादा को गुमराह पाते हैं, फिर भी उनकी पैरवी में जल्दी करते हैं।

यह उनकी सबसे बड़ी भूल है कि उन्होंने हक़ और बातिल की परख नहीं की। अगर वे ज़रा सा भी दिमाग़ इस्तेमाल करते, तो समझ जाते कि उनके बाप-दादा जिस रास्ते पर थे, वह रास्ता गुमराही का रास्ता था। लेकिन उन्होंने अंधी पैरवी को अपना शिआर बना लिया और हक़ की राह छोड़कर बातिल की तरफ दौड़ पड़े।

नसीहत और दावत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बड़ी अहम सीख देती है। हमें चाहिए कि हम किसी की भी बात या राह को बिना सोचे-समझे क़बूल न करें, चाहे वह हमारे बाप-दादा ही क्यों न हों। हमें हक़ की तलाश करनी चाहिए। अगर हमारे बाप-दादा सही रास्ते पर थे, तो उनकी पैरवी करना अच्छी बात है, लेकिन अगर वे ग़लत रास्ते पर थे, तो हमें हक़ को क़बूल करना चाहिए, चाहे वह हमारे बाप-दादा की राह के खिलाफ ही क्यों न हो।

इस्लाम हमें तहक़ीक़ और दलील की तरफ बुलाता है। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है कि "अच्छे बंदे वो हैं जो सुनते हैं और अच्छी बात की पैरवी करते हैं।" हमें चाहिए कि हम अपने दीन को समझकर अपनाएँ, न कि सिर्फ इसलिए कि हमारे बुज़ुर्ग उसी पर थे। अल्लाह हमें हक़ की समझ अता फ़रमाए और हमें उस राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे जो उसे पसंद है। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 68-72 — अस-साफ्फात

68ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ
फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा
69إِنَّهُمْ أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ ضَالِّينَ
उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था
70فَهُمْ عَلَىٰ آثَارِهِمْ يُهْرَعُونَ
ये लोग भी उनके पीछे दौड़े चले जा रहे हैं
71وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ الْأَوَّلِينَ
और उनके क़ब्ल अगलों में से बहुतेरे गुमराह हो चुके
72وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ
उन लोगों के डराने वाले (पैग़म्बरों) को भेजा था
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अनुवाद — अस-साफ्फात 70

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Tuesday, August 18, 2026

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