अस-साफ्फात · 84/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ ۝٨٤
Iz jaaa`a Rabbahoo bi qalbin saleem
📖 हिंदी अर्थ
जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • "जब वे अपने रब के पास आए" — अर्थात जब उन्होंने अपने पूरे अस्तित्व के साथ अल्लाह की ओर रुख किया।
  • "सलीम (स्वच्छ) हृदय" — वह हृदय जो हर प्रकार के शिर्क (बहुदेववाद), संदेह, कुटिलता और बुरे आचरण से पवित्र हो।

व्याख्या:

यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के उस महान दृश्य को प्रस्तुत करती है जब वे अपने रब की ओर एक ऐसे हृदय के साथ आए जो हर झूठी मान्यता, हर बुरी आदत और हर प्रकार के शिर्क से पूर्णतः मुक्त था। यह "आना" केवल शारीरिक नहीं था, बल्कि यह उनकी आत्मा की गहराई से अल्लाह की ओर पूर्ण समर्पण और इख़्लास (निष्ठा) का प्रतीक था। उनका हृदय अल्लाह की एकता और उसकी आज्ञाकारिता पर इतना दृढ़ था कि उन्होंने अपने पिता और अपनी क़ौम के सामने खड़े होकर स्पष्ट शब्दों में कहा: "तुम किस चीज़ की पूजा करते हो? क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसे मनगढ़ंत देवताओं की पूजा करते हो जिनका कोई अस्तित्व नहीं? तुमने अपने रब के बारे में क्या सोच रखा है?" — यह प्रश्न उनके हृदय की गहराई से निकला था, जो सत्य के प्रति उनके प्रेम और असत्य के प्रति उनकी घृणा को दर्शाता है।

यह "सलीम हृदय" वह हृदय है जो अल्लाह के सिवा किसी और से नहीं डरता, किसी और से आशा नहीं रखता, और किसी और पर भरोसा नहीं करता। यह वह हृदय है जो सृष्टि के प्रति निष्ठावान और ख़ालिक़ (सृष्टिकर्ता) के प्रति समर्पित होता है। हज़रत इब्राहीम का यह हृदय उनके पूरे जीवन का आधार बना — उन्होंने मूर्तियों को तोड़ा, आग में कूदने का साहस किया, और अपने बेटे को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने के लिए तैयार हो गए — यह सब उसी सलीम हृदय की देन थी।

दृष्टिकोण और उपदेश:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर सच्चा रुख़ करने का अर्थ है अपने हृदय को हर उस चीज़ से पवित्र करना जो अल्लाह की एकता और उसकी आज्ञाकारिता के विपरीत हो। आज के युग में भी, जब लोग धन, पद, और सांसारिक इच्छाओं को अपना देवता बना लेते हैं, हमें हज़रत इब्राहीम के इस सलीम हृदय को अपनाने की आवश्यकता है। यह हृदय ही वह कुंजी है जो हमें इस दुनिया में सुकून और आख़िरत में मुक्ति दिलाएगी। अल्लाह हम सभी को वह हृदय प्रदान करे जो शिर्क, पाखंड और बुराई से पाक हो — आमीन।



📜 आयत 82-86 — अस-साफ्फात

82ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर हमने बाक़ी लोगों को डुबो दिया
83۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِ لَإِبْرَاهِيمَ
और यक़ीनन उन्हीं के तरीक़ो पर चलने वालों में इबराहीम (भी) ज़रूर थे
84إِذْ جَاءَ رَبَّهُ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ
जब वह अपने परवरदिगार (कि इबादत) की तरफ (पहलू में) ऐसा दिल लिए हुए बढ़े जो (हर ऐब से पाक था
85إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो
86أَئِفْكًا آلِهَةً دُونَ اللَّهِ تُرِيدُونَ
क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो
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अनुवाद — अस-साफ्फात 84

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Tuesday, August 18, 2026

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