अस-साफ्फात · 89/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٌ ۝٨٩
Faqaala inee saqeem
📖 हिंदी अर्थ
और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَقِيمٌ (सक़ीम): बीमार, रोगी। इसका प्रयोग शारीरिक बीमारी के लिए होता है, लेकिन यहाँ इसका आशय लाक्षणिक रूप से भी हो सकता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की क़ौम बुत-परस्ती में डूबी हुई थी। वे लोग किसी त्योहार (ईद) के दिन निकलने की तैयारी कर रहे थे और चाहते थे कि इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) भी उनके साथ चलें। लेकिन इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के दिल में उनके बुतों को तोड़ने का इरादा था, ताकि वे लोग अपनी ग़लत राह पर विचार करें और सच्चाई की ओर लौटें।

इसलिए, उन्होंने पहले आसमान की तरफ देखा और सोच-समझकर एक ऐसा बहाना बनाया जो उन्हें उन लोगों से अलग कर दे। उन्होंने कहा: "मैं बीमार हूँ।" यह कोई झूठ नहीं था, बल्कि एक तौरिया (अप्रत्यक्ष इशारा) था, क्योंकि वे आत्मिक रूप से उनके शिर्क (बुत-परस्ती) से बीमार थे और उनका दिल उनके कुकर्मों से दुखी था। कुछ मुफ़स्सिरीन ने यह भी कहा है कि उन्होंने यह इसलिए कहा कि उनकी क़ौम में यह आम बात थी कि वे किसी बीमार (विशेषकर महामारी से पीड़ित) व्यक्ति के पास नहीं जाते थे, इसलिए वे उन्हें अकेला छोड़कर चले गए।

यह घटना हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए कभी-कभी समझदारी और हिकमत (बुद्धिमत्ता) से काम लेना पड़ता है। इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने न तो झूठ बोला और न ही किसी को नुकसान पहुँचाया, बल्कि एक सूक्ष्म तरीके से अपने मिशन को अंजाम देने की तैयारी की। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि दीन की खिदमत में हमें हिम्मत, हिकमत और सब्र का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है, जैसे उसने इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उनके मिशन में कामयाबी दी।



📜 आयत 87-91 — सूरा अस-साफ्फात

87فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है
88فَنَظَرَ نَظْرَةً فِي النُّجُومِ
फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा
89فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٌ
और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ
90فَتَوَلَّوْا عَنْهُ مُدْبِرِينَ
तो वह लोग इबराहीम के पास से पीठ फेर फेर कर हट गए
91فَرَاغَ إِلَىٰ آلِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ
(बस) फिर तो इबराहीम चुपके से उनके बुतों की तरफ मुतावज्जे हुए और (तान से) कहा तुम्हारे सामने इतने चढ़ाव रखते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
89आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 89

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Thursday, October 1, 2026

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