Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ख़ासीमन (خَصِيمًا): अर्थात किसी की ओर से झगड़ने वाला, बहस करने वाला, या उसका पक्ष लेने वाला।
- ख़ाइनिन (خَائِنِينَ): धोखा देने वाले, विश्वासघात करने वाले, या अपनी अमानत में ख़ियानत करने वाले।
तफ़सीर:
ऐ नबी! हमने आप पर यह क़ुरआन हक़ (सत्य) के साथ उतारा है, ताकि आप लोगों के बीच उसी के अनुसार फ़ैसला करें जो अल्लाह ने आपको दिखाया और सिखाया है। यह किताब हर उस चीज़ में हक़ पर आधारित है जो इसमें आई है—चाहे वह अक़ीदे हों, इबादतें हों, या अदालती फ़ैसले। अल्लाह ने आपको यह किताब इसलिए दी है ताकि आप अपनी राय या ख़्वाहिश से नहीं, बल्कि अल्लाह की वही और उसकी शिक्षा के अनुसार लोगों के बीच इंसाफ़ करें।
फिर अल्लाह तआला आपको एक बहुत बड़ी ग़लती से बचाता है और फ़रमाता है: "और तुम उन लोगों की तरफ़ से झगड़ने वाले मत बनो जो ख़ियानत करते हैं।" यानी जो लोग अपनी अमानत में ख़ियानत करते हैं, अपनी ज़बान से झूठ बोलते हैं, और हक़ को छिपाते हैं, उनकी तरफ़ से कभी बहस या पैरवी मत करो—चाहे वे अपनी बात को कितना ही सच्चा क्यों न पेश करें।
इस आयत के नुज़ूल का एक वाक़िया भी है: बनी अन-नज्जार के एक आदमी तुमा इब्न उबैरिक ने क़तादा इब्न नु'मान की एक ज़िरह (लोहे की कवच) चुरा ली थी। उसने वह ज़िरह एक यहूदी ज़ैद इब्न सामीन के पास रख दी। जब ज़िरह की तलाश हुई, तो वह यहूदी के पास मिली। तुमा ने क़सम खाकर कहा कि उसने चोरी नहीं की, और यहूदी ने कहा कि तुमा ने ही उसे यह ज़िरह दी है। नबी ﷺ ने यहूदी के ख़िलाफ़ फ़ैसला करना चाहा, लेकिन अल्लाह ने यह आयत उतारी कि तुम उन ख़ाइनों की तरफ़ से झगड़ा मत करो, क्योंकि असली चोर तुमा है।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है: इंसाफ़ और सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे मामला किसी भी इंसान का हो। किसी की ज़ाहिरी बातों से धोखा नहीं खाना चाहिए, बल्कि हक़ को देखना चाहिए। अल्लाह तआला अपने नबी को भी इस बात की ताकीद कर रहा है कि वह किसी ख़ाइन की तरफ़ से पैरवी न करें—तो फिर हम मुसलमानों को कितनी बड़ी सीख मिलती है कि हमें हमेशा सच्चाई और इंसाफ़ के साथ रहना चाहिए, और किसी भी धोखेबाज़ की मदद नहीं करनी चाहिए।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का क़ुरआन हर मामले में हक़ और इंसाफ़ का रास्ता दिखाता है। जो कोई इस पर चलेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह तआला हमें सच्चाई पर चलने और ख़ियानत से बचने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 103-107 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 105
सूरा अन-निसा आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) हमने तुमपर बरहक़ किताब इसलिए नाज़िल की है…सूरा आयत 105/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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