अन-निसा · 133/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ أَيُّهَا النَّاسُ وَيَأْتِ بِآخَرِينَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ قَدِيرًا ۝١٣٣
Iny-yashaa yuzhibkum aiyuhan naasu wa yaati bi aakhareen; wa kaanal laahu `alaa zaalika Qadeeraa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ लोगों अगर ख़ुदा चाहे तो तुमको (दुनिया के परदे से) बिल्कुल उठा ले और (तुम्हारे बदले) दूसरों को ला (बसाए) और ख़ुदा तो इसपर क़ादिर व तवाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُذْهِبْكُمْ: वह तुम्हें मिटा दे, नष्ट कर दे या तुम्हें ले जाए।
  • وَيَأْتِ بِآخَرِينَ: और दूसरे लोगों को ले आए (पैदा करे)।
  • قَدِيرًا: हर चीज़ पर पूर्ण सामर्थ्य रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में सभी लोगों को संबोधित करते हुए एक गंभीर चेतावनी दे रहा है। वह कहता है: "ऐ लोगों! यदि अल्लाह चाहे तो वह तुम सबको नष्ट कर सकता है और तुम्हारे स्थान पर दूसरे लोगों को ला सकता है, जो उसकी आज्ञा का पालन करने वाले हों और उसकी अवज्ञा न करते हों।" यह एक ओर काफ़िरों और नाफ़रमानों के लिए सख़्त तहदीद (धमकी) है कि अल्लाह की शक्ति को कमज़ोर न समझो, वह जब चाहे तुम्हें मिटाकर तुमसे बेहतर लोगों को पैदा कर सकता है। दूसरी ओर यह मोमिनों के लिए तसल्ली है कि अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ है, और वह किसी का मोहताज नहीं। अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) हर चीज़ पर हावी है, न तो उसे किसी की ज़रूरत है और न ही कोई चीज़ उसे विवश कर सकती है। वह जब चाहता है, किसी को मिटाकर दूसरों को पैदा कर देता है, और यह उसके लिए बिल्कुल आसान है।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. इस आयत से हमें अल्लाह की अज़ीमुश्शान क़ुदरत का एहसास होता है, जो किसी पर निर्भर नहीं। यह हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के सामने अपनी नाफ़रमानी और घमंड से बचना चाहिए, क्योंकि हमारा अस्तित्व उसकी मर्ज़ी पर टिका है।
  2. यह आयत हमें यह सबक देती है कि अल्लाह की राह में आज्ञाकारिता और ईमान ही हमारी असली पहचान है। अगर हम नाफ़रमानी करें, तो अल्लाह हमें बदलकर दूसरे लोगों को ला सकता है, जो उसके दीन को मज़बूत करेंगे।
  3. यह मोमिनों के दिलों को तसल्ली देती है कि अल्लाह अपने दीन की मदद के लिए हमेशा रास्ता निकालता है, चाहे हम कमज़ोर ही क्यों न हों। उसकी मदद का भरोसा हमें साहस और स्थिरता प्रदान करता है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपनी ताकत और संख्या पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, क्योंकि असली इज़्ज़त और बरकत उसकी आज्ञाकारिता में है।


📜 आयत 131-135 — अन-निसा

131وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ وَلَقَدْ وَصَّيْنَا الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلِكُمْ وَإِيَّاكُمْ أَنِ اتَّقُوا اللَّهَ ۚ وَإِن تَكْفُرُوا فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ غَنِيًّا حَمِيدًا
और जिन लोगों को तुमसे पहले किताबे ख़ुदा अता की गयी है उनको और तुमको भी उसकी हमने वसीयत की थी कि (ख़ुदा) (की नाफ़रमानी) से डरते रहो और अगर (कहीं) तुमने कुफ़्र इख्तेयार किया तो (याद रहे कि) जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ुदा ही का है (जो चाहे कर सकता है) और ख़ुदा तो सबसे बेपरवा और (हमा सिफ़त) मौसूफ़ हर हम्द वाला है
132وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ وَكِيلًا
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज सब कुछ) ख़ास ख़ुदा ही का है और ख़ुदा तो कारसाज़ी के लिये काफ़ी है
133إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ أَيُّهَا النَّاسُ وَيَأْتِ بِآخَرِينَ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ ذَٰلِكَ قَدِيرًا
ऐ लोगों अगर ख़ुदा चाहे तो तुमको (दुनिया के परदे से) बिल्कुल उठा ले और (तुम्हारे बदले) दूसरों को ला (बसाए) और ख़ुदा तो इसपर क़ादिर व तवाना है
134مَّن كَانَ يُرِيدُ ثَوَابَ الدُّنْيَا فَعِندَ اللَّهِ ثَوَابُ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ سَمِيعًا بَصِيرًا
और जो शख्स (अपने आमाल का) बदला दुनिया ही में चाहता है तो ख़ुदा के पास दुनिया व आख़िरत दोनों का अज्र मौजूद है और ख़ुदा तो हर शख्स की सुनता और सबको देखता है
135۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُونُوا قَوَّامِينَ بِالْقِسْطِ شُهَدَاءَ لِلَّهِ وَلَوْ عَلَىٰ أَنفُسِكُمْ أَوِ الْوَالِدَيْنِ وَالْأَقْرَبِينَ ۚ إِن يَكُنْ غَنِيًّا أَوْ فَقِيرًا فَاللَّهُ أَوْلَىٰ بِهِمَا ۖ فَلَا تَتَّبِعُوا الْهَوَىٰ أَن تَعْدِلُوا ۚ وَإِن تَلْوُوا أَوْ تُعْرِضُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और ख़ुदा के लये गवाही दो अगरचे (ये गवाही) ख़ुद तुम्हारे या तुम्हारे मॉ बाप या क़राबतदारों के लिए खिलाफ़ (ही क्यो) न हो ख्वाह मालदार हो या मोहताज (क्योंकि) ख़ुदा तो (तुम्हारी बनिस्बत) उनपर ज्यादा मेहरबान है तो तुम (हक़ से) कतराने में ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और अगर घुमा फिरा के गवाही दोगे या बिल्कुल इन्कार करोगे तो (याद रहे जैसी करनी वैसी भरनी क्योंकि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुद उससे ख़ूब वाक़िफ़ है
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अनुवाद — अन-निसा 133

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Tuesday, August 18, 2026

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