Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَكِيلًا: वह संरक्षक और कार्य-साधक जो बंदे के मामलों को संभालने की ज़िम्मेदारी उठाए, उसकी रक्षा करे और उसके कामों को पूरा करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत बताती है कि आसमानों और ज़मीन में जो कुछ भी है—चाहे वह जीवित प्राणी हों, पदार्थ हों, या कोई भी चीज़—सब कुछ अकेले अल्लाह ही का है। उसी का सार्वभौमिक राज्य है, और वही इन सबका स्वामी और मालिक है। यह स्वामित्व उसे अकेले ही प्राप्त है, कोई उसमें साझीदार नहीं। यही वह सच्चाई है जो बंदे को अल्लाह के सामने झुकने, उसकी आज्ञा मानने और उसी पर भरोसा करने का आधार देती है।
फिर अल्लाह तआला कहता है कि वह अपने बंदों के लिए काफ़ी है—यानी उसकी संरक्षा और कार्य-साधना में कोई कमी नहीं। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा कर ले, उसे किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। अल्लाह अपने बंदे के सभी मामलों को संभालने वाला, उसकी रक्षा करने वाला और उसके कामों को पूरा करने वाला है। इसलिए बंदे को चाहिए कि वह अपने सारे मामले अल्लाह को सौंप दे और उसी पर निर्भर रहे। यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि वे किसी इंसान, किसी ताक़त या किसी सांसारिक साधन पर भरोसा न करें, बल्कि अपना पूरा भरोसा अल्लाह पर रखें, क्योंकि वही सब कुछ का मालिक है और वही अपने बंदों के लिए सबसे अच्छा संरक्षक है।
फ़ायदे (उपदेश):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की संप्रभुता और स्वामित्व पूरे ब्रह्मांड पर है, इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में उसी की आज्ञा को सर्वोपरि मानना चाहिए।
- यह आयत हमें तौक़्कुल (अल्लाह पर भरोसा) की शिक्षा देती है—जब हमें कोई मुश्किल आए, कोई डर हो, या कोई काम अटक जाए, तो हमें अल्लाह की ओर रुजू करना चाहिए, क्योंकि वही हमारा काफ़ी संरक्षक है।
- यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की महानता और उसकी ताक़त का एहसास पैदा करती है, जिससे हमारा ईमान मज़बूत होता है और हमें यह यक़ीन होता है कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें किसी इंसान या सांसारिक ताक़तों के आगे झुकना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी पूरी उम्मीद और भरोसा अल्लाह पर रखना चाहिए, जो हर चीज़ पर क़ादिर है।
📜 आयत 130-134 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 132
सूरा अन-निसा आयत 132 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में…सूरा आयत 132/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 130–134. हिंदी अर्थ: اردو.
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Friday, October 2, 2026
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