अन-निसा · 158/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
بَل رَّفَعَهُ اللَّهُ إِلَيْهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا ۝١٥٨
Bar rafa`ahul laahu ilayh; wa kaanal laahu `Azeezan Hakeemaa
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि ख़ुदा ने उन्हें अपनी तरफ़ उठा लिया और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त तदबीर वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बल रफ़अहुल्लाहु इलैहि: बल्कि अल्लाह ने उसे (ईसा अलैहिस्सलाम को) अपनी ओर उठा लिया।
  • अज़ीज़: सर्वशक्तिमान, जो अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी को कुछ करने की शक्ति न दे।
  • हकीम: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर काम हिकमत (बुद्धिमत्ता) और उचित प्रयोजन के साथ करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने यहूदियों के उस दावे का खंडन किया है जिसमें वे कहते थे कि उन्होंने ईसा अलैहिस्सलाम को सूली पर चढ़ा दिया और उन्हें मार डाला। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसा नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने न तो ईसा को मारा और न ही सूली पर चढ़ाया, बल्कि अल्लाह ने अपनी कुदरत से उन्हें उनके शरीर और रूह के साथ जीवित हालत में अपनी ओर उठा लिया। यह उठाना अल्लाह की विशेष रहमत और सम्मान था, जिससे उसने अपने नबी को काफिरों की साजिश से बचाया और उन्हें पवित्र किया।

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि वह अज़ीज़ है, यानी सर्वशक्तिमान है, कोई उस पर ग़ालिब नहीं आ सकता, और वह हकीम है, यानी हर काम में उसकी गहरी हिकमत होती है। उसने ईसा अलैहिस्सलाम के साथ जो कुछ किया, वह उसकी हिकमत और इलाही तदबीर के अनुसार था। यह घटना हमारे लिए इस बात का सबूत है कि अल्लाह की कुदरत हर चीज़ पर हावी है, और वह अपने नेक बंदों को हमेशा हिफ़ाज़त फ़रमाता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा रक्षक है। ईसा अलैहिस्सलाम की तरह हमें भी अपने जीवन में अल्लाह की राह पर साबित क़दम रहना चाहिए, और यह यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह अपने मोमिन बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। यह घटना हमारे लिए सबक़ है कि सच्चाई और ईमान ही अंततः फ़तह (विजय) पाता है, चाहे दुश्मन कितनी भी साजिशें क्यों न करें। अल्लाह हर मुश्किल से निकलने का रास्ता निकालता है और अपने बंदों को इज़्ज़त देता है। इसलिए हमें अपने जीवन में भी अल्लाह की रहमत और कुदरत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और उसकी इबादत में मशगूल रहना चाहिए।



📜 आयत 156-160 — सूरा अन-निसा

156وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَىٰ مَرْيَمَ بُهْتَانًا عَظِيمًا
और उनके काफ़िर होने और मरियम पर बहुत बड़ा बोहतान बॉधने कि वजह से
157وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا الْمَسِيحَ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَٰكِن شُبِّهَ لَهُمْ ۚ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِيهِ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ ۚ مَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا اتِّبَاعَ الظَّنِّ ۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَقِينًا
और उनके यह कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा (स.) ख़ुदा के रसूल को क़त्ल कर डाला हालॉकि न तो उन लोगों ने उसे क़त्ल ही किया न सूली ही दी उनके लिए (एक दूसरा शख्स ईसा) से मुशाबेह कर दिया गया और जो लोग इस बारे में इख्तेलाफ़ करते हैं यक़ीनन वह लोग (उसके हालत) की तरफ़ से धोखे में (आ पड़े) हैं उनको उस (वाक़िये) की ख़बर ही नहीं मगर फ़क्त अटकल के पीछे (पड़े) हैं और ईसा को उन लोगों ने यक़ीनन क़त्ल नहीं किया
158بَل رَّفَعَهُ اللَّهُ إِلَيْهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
बल्कि ख़ुदा ने उन्हें अपनी तरफ़ उठा लिया और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त तदबीर वाला है
159وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا
और (जब ईसा मेहदी मौऊद के ज़हूर के वक्त आसमान से उतरेंगे तो) अहले किताब में से कोई शख्स ऐसा न होगा जो उनपर उनके मरने के क़ब्ल ईमान न लाए और ख़ुद ईसा क़यामत के दिन उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे
160فَبِظُلْمٍ مِّنَ الَّذِينَ هَادُوا حَرَّمْنَا عَلَيْهِمْ طَيِّبَاتٍ أُحِلَّتْ لَهُمْ وَبِصَدِّهِمْ عَن سَبِيلِ اللَّهِ كَثِيرًا
ग़रज़ यहूदियों की (उन सब) शरारतों और गुनाह की वजह से हमने उनपर वह साफ़ सुथरी चीजें ज़ो उनके लिए हलाल की गयी थीं हराम कर दी और उनके ख़ुदा की राह से बहुत से लोगों को रोकने कि वजह से भी
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
158आयत

अनुवाद — अन-निसा 158

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Saturday, October 3, 2026

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