Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अह्ले किताब: यहूदी और ईसाई (जिन्हें आसमानी किताबें दी गईं)।
- लयु'मिनन्न: अवश्य ईमान लाएगा।
- क़ब्ला मौतिही: उसकी मृत्यु से पहले।
- शहीदन: गवाह बनेगा।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने एक महत्वपूर्ण भेद खोला है कि अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) में से कोई भी ऐसा नहीं बचेगा जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) पर ईमान न लाए। यह ईमान उनके जीवन के अंतिम समय में होगा, जब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आख़िरी ज़माने में अल्लाह के हुक्म से उतरेंगे। उस वक़्त तमाम अह्ले किताब — चाहे वे यहूदी हों या ईसाई — उन पर ईमान लाए बिना नहीं रह सकेंगे। यहूदी जिन्होंने उन्हें झुठलाया और उन पर तोहमत लगाई, वे उन्हें सच्चा नबी मानेंगे, और ईसाई जिन्होंने उन्हें अल्लाह का बेटा कहा, वे भी यह स्वीकार करेंगे कि वे अल्लाह के बंदे और रसूल हैं, न कि अल्लाह या अल्लाह के बेटे। यह ईमान उनके लिए उस वक़्त नुक़्सान नहीं देगा, क्योंकि यह मौत के वक़्त का ईमान होगा जो क़बूल नहीं होता — जैसे फ़िरऔन का ईमान क़बूल नहीं हुआ था।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि क़यामत के दिन हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) इन लोगों के ख़िलाफ़ गवाही देंगे। वे यहूदियों के ख़िलाफ़ गवाही देंगे कि उन्होंने उन्हें झुठलाया, उन पर जादूगर होने का इल्ज़ाम लगाया और उनकी माँ हज़रत मरयम पर बड़ी तोहमत लगाई। और ईसाइयों के ख़िलाफ़ गवाही देंगे कि उन्होंने उन्हें अल्लाह का बेटा बना दिया और उनकी इबादत करने लगे, जबकि वे ख़ुद अल्लाह के बंदे और रसूल थे। यह गवाही उनके ख़िलाफ़ क़ायम होगी और अल्लाह की अदालत में वे बिल्कुल बेबस होंगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई कितनी भी देर से आए, आकर रहेगी। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की सच्चाई को हर अह्ले किताब मानने पर मजबूर होगा, लेकिन उस वक़्त का ईमान किसी काम का नहीं होगा। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चाई को आज ही क़बूल कर लें, कल पर न टालें। हम मुसलमानों को चाहिए कि हम हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह का नबी और रसूल मानें, उनकी तौहीन से बचें, और उनके बारे में वही अक़ीदा रखें जो क़ुरआन ने सिखाया — कि वे अल्लाह के बंदे, रसूल और उनके कलाम (बशर) थे, न कि अल्लाह या अल्लाह के बेटे। यही सच्चा ईमान है जो हमें नजात दिलाएगा। अल्लाह हमें सच्चाई पर साबित-क़दम रखे और हमारे दिलों को ईमान की मिठास से भर दे। आमीन।
📜 आयत 157-161 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 159
सूरा अन-निसा आयत 159 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (जब ईसा मेहदी मौऊद के ज़हूर के वक्त आसमान…सूरा आयत 159/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 157–161. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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