अश-शूरा · 36/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
فَمَا أُوتِيتُم مِّن شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ لِلَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ ۝٣٦
Famaa ooteetum min shai`in famataa`ul hayaatid dunyaa wa maa `indal laahi khairunw wa abqaa lillazeena aamanoo wa `alaa Rabbihim yatawakkaloon
📖 हिंदी अर्थ
(लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया की ज़िन्दगी का (चन्द रोज़) साज़ोसामान है और जो कुछ ख़ुदा के यहाँ है वह कहीं बेहतर और पायदार है (मगर ये) ख़ास उन ही लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا: दुनिया की ज़िंदगी का अस्थायी सामान और फायदा।
  • خَيْرٌ وَأَبْقَى: बेहतर और अधिक स्थायी।
  • يَتَوَكَّلُونَ: भरोसा करते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! जो कुछ भी तुम्हें दिया गया है—चाहे वह माल हो, औलाद हो, ओहदा हो या कोई और दुनियावी चीज़—वह सब इस दुनिया की ज़िंदगी का केवल अस्थायी सामान है। यह चंद रोज़ का साज़ो-सामान है, जो जल्द ही खत्म हो जाने वाला है। यह न तो हमेशा रहता है और न ही इसका कोई स्थायी मूल्य है। इसके विपरीत, जो कुछ अल्लाह के पास है—यानी जन्नत की नेमतें और उसकी रज़ा—वह इन सब चीज़ों से कहीं बेहतर है और हमेशा रहने वाला है। वह कभी खत्म नहीं होता और न ही घटता है।

यह स्थायी और बेहतर इनाम उन लोगों के लिए है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए, और जिन्होंने अपने रब पर पूरा भरोसा किया। वे अपने सारे मामलों में सिर्फ अल्लाह पर ही तवक्कुल करते हैं, उसी से मदद मांगते हैं और उसी के सामने अपने दिलों को झुकाते हैं। यही वे लोग हैं जिनके लिए अल्लाह के पास वह कुछ है जो दुनिया की हर चीज़ से बेहतर और हमेशा रहने वाला है।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चीज़ें भले ही कितनी खूबसूरत और आकर्षक दिखें, लेकिन वे अस्थायी हैं। जो व्यक्ति अपनी नज़रें सिर्फ दुनिया पर रखता है, वह उस मिट्टी के घर में रहता है जो कभी भी ढह सकता है। लेकिन जो व्यक्ति अपनी नज़रें अल्लाह पर रखता है और उस पर भरोसा करता है, वह एक ऐसे महल में रहता है जो कभी नहीं ढहता। तो ऐ बंदे! अपनी ज़िंदगी को सिर्फ दुनिया के अस्थायी सुखों तक सीमित मत रखो। अल्लाह पर भरोसा करो, उसकी राह में चलो, और उससे उस चीज़ की उम्मीद रखो जो हमेशा रहने वाली है। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें सुकून और खुशी की असली मंज़िल तक पहुँचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — अश-शूरा

34أَوْ يُوبِقْهُنَّ بِمَا كَسَبُوا وَيَعْفُ عَن كَثِيرٍ
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे
35وَيَعْلَمَ الَّذِينَ يُجَادِلُونَ فِي آيَاتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٍ
और वह बहुत कुछ माफ़ करता है और जो लोग हमारी निशानियों में (ख्वाहमाख्वाह) झगड़ा करते हैं वह अच्छी तरह समझ लें कि उनको किसी तरह (अज़ाब से) छुटकारा नहीं
36فَمَا أُوتِيتُم مِّن شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا ۖ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ لِلَّذِينَ آمَنُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
(लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया की ज़िन्दगी का (चन्द रोज़) साज़ोसामान है और जो कुछ ख़ुदा के यहाँ है वह कहीं बेहतर और पायदार है (मगर ये) ख़ास उन ही लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
37وَالَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ وَإِذَا مَا غَضِبُوا هُمْ يَغْفِرُونَ
और जो लोग बड़े बड़े गुनाहों और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं और ग़ुस्सा आ जाता है तो माफ कर देते हैं
38وَالَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِرَبِّهِمْ وَأَقَامُوا الصَّلَاةَ وَأَمْرُهُمْ شُورَىٰ بَيْنَهُمْ وَمِمَّا رَزَقْنَاهُمْ يُنفِقُونَ
और जो अपने परवरदिगार का हुक्म मानते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं और उनके कुल काम आपस के मशवरे से होते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं
अश-शूराकुरान सूची
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36आयत

अनुवाद — अश-शूरा 36

सूरा अश-शूरा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया…

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Tuesday, August 18, 2026

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