अल-माइदा · 99/120
अनुवाद उच्चारण — अल-माइदा
مَّا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ ۝٩٩
Maa `alar Rasooli illal balaagh; wallaahu ya`lamu maa tubdoona wa maa taktumoon
📖 हिंदी अर्थ
(हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ (फर्ज़) नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो ख़ुदा सब जानता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا عَلَى الرَّسُولِ: रसूल (ﷺ) पर कोई (ज़िम्मेदारी) नहीं है।
  • إِلَّا الْبَلَاغُ: सिवाय (संदेश) पहुँचाने के।
  • تُبْدُونَ: तुम ज़ाहिर करते हो (प्रकट करते हो)।
  • تَكْتُمُونَ: तुम छिपाते हो (गुप्त रखते हो)।

व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने रसूल (ﷺ) की ज़िम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए फ़रमाता है कि रसूल (ﷺ) पर केवल संदेश पहुँचाना (तब्लीग़) है। उनका काम लोगों को सीधा रास्ता दिखाना और अल्लाह का हुक्म पहुँचाना है। यह उनकी ज़िम्मेदारी है, और उन्होंने इसे पूरा किया। लेकिन लोगों को हिदायत देना (तौफ़ीक़) और उनके दिलों को सीधा करना अल्लाह के हाथ में है। रसूल (ﷺ) किसी को ज़बरदस्ती मुसलमान नहीं बना सकते, न ही किसी के दिल में ईमान डाल सकते हैं। यह काम सिर्फ़ अल्लाह ही करता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह जानता है जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो (चाहे अच्छे काम हों या बुरे) और जो कुछ तुम छिपाते हो (चाहे वह कुफ़्र हो, निफ़ाक़ हो या कोई और बात)। तुम्हारे दिलों में जो इरादे और नियतें हैं, उन सब से अल्लाह पूरी तरह वाक़िफ़ है। वह तुम्हारे ज़ाहिरी और बातिनी (छिपे हुए) सारे अमाल को जानता है और उसी के अनुसार तुम्हें बदला देगा। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे अपने अंदर और बाहर दोनों को ठीक रखें, क्योंकि अल्लाह से कुछ भी छिपा नहीं है।


फ़ायदे (सबक़):

  1. रसूल (ﷺ) की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ तब्लीग़ है — इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमारा काम भी सच्चाई और दीन का पैग़ाम दूसरों तक पहुँचाना है, लेकिन नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। किसी को हिदायत देने की ज़िद नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमारा फ़र्ज़ सिर्फ़ बताना है।
  2. हिदायत अल्लाह के हाथ में है — यह बात हमें नम्रता सिखाती है कि हम किसी को ज़बरदस्ती या अपनी कोशिशों से मुसलमान नहीं बना सकते। हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह लोगों को हिदायत दे।
  3. अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे ज़ाहिर और बातिन (छिपे और खुले) सब कुछ जानता है, तो हमारे अंदर अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और हम गुनाहों से बचते हैं। यह हमें ईमानदारी और सच्चाई की तरफ़ ले जाता है।
  4. अच्छे और बुरे दोनों का बदला मिलेगा — यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे हर अमल का हिसाब होगा, चाहे वह छिपा हो या खुला। इससे इंसान में ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा होता है और वह अच्छे कामों में जल्दी करता है।
  5. इस्लाम में आज़ादी और इख़्तियार — इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में ज़बरदस्ती नहीं है। रसूल (ﷺ) का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना था, और लोगों को अपनी मर्ज़ी से ईमान लाना था। यह इस्लाम की नरमी और इंसाफ़ को दर्शाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 97-101 — अल-माइदा

97۞ جَعَلَ اللَّهُ الْكَعْبَةَ الْبَيْتَ الْحَرَامَ قِيَامًا لِّلنَّاسِ وَالشَّهْرَ الْحَرَامَ وَالْهَدْيَ وَالْقَلَائِدَ ۚ ذَٰلِكَ لِتَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
ख़ुदा ने काबा को जो (उसका) मोहतरम घर है और हुरमत दार महीनों को और कुरबानी को और उस जानवर को जिसके गले में (क़ुरबानी के वास्ते) पट्टे डाल दिए गए हों लोगों के अमन क़ायम रखने का सबब क़रार दिया यह इसलिए कि तुम जान लो कि ख़ुदा जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है यक़ीनन (सब) जानता है और ये भी (समझ लो) कि बेशक ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ है
98اعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ شَدِيدُ الْعِقَابِ وَأَنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
जान लो कि यक़ीनन ख़ुदा बड़ा अज़ाब वाला है और ये (भी) कि बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
99مَّا عَلَى الرَّسُولِ إِلَّا الْبَلَاغُ ۗ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
(हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ (फर्ज़) नहीं और जो कुछ तुम ज़ाहिर बा ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छुपा कर करते हो ख़ुदा सब जानता है
100قُل لَّا يَسْتَوِي الْخَبِيثُ وَالطَّيِّبُ وَلَوْ أَعْجَبَكَ كَثْرَةُ الْخَبِيثِ ۚ فَاتَّقُوا اللَّهَ يَا أُولِي الْأَلْبَابِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
(ऐ रसूल) कह दो कि नापाक (हराम) और पाक (हलाल) बराबर नहीं हो सकता अगरचे नापाक की कसरत तुम्हें भला क्यों न मालूम हो तो ऐसे अक्लमन्दों अल्लाह से डरते रहो ताकि तुम कामयाब रहो
101يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَسْأَلُوا عَنْ أَشْيَاءَ إِن تُبْدَ لَكُمْ تَسُؤْكُمْ وَإِن تَسْأَلُوا عَنْهَا حِينَ يُنَزَّلُ الْقُرْآنُ تُبْدَ لَكُمْ عَفَا اللَّهُ عَنْهَا ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌ
ऐ ईमान वालों ऐसी चीज़ों के बारे में (रसूल से) न पूछा करो कि अगर तुमको मालूम हो जाए तो तुम्हें बुरी मालूम हो और अगर उनके बारे में कुरान नाज़िल होने के वक्त पूछ बैठोगे तो तुम पर ज़ाहिर कर दी जाएगी (मगर तुमको बुरा लगेगा जो सवालात तुम कर चुके) ख़ुदा ने उनसे दरगुज़र की और ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला बुर्दबार है
अल-माइदाकुरान सूची
120आयत
मदनीRevelation
99आयत

अनुवाद — अल-माइदा 99

सूरा अल-माइदा आयत 99 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ…

सूरा आयत 99/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 97–101. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए