अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا عَلَى الرَّسُولِ: रसूल (ﷺ) पर कोई (ज़िम्मेदारी) नहीं है।
- إِلَّا الْبَلَاغُ: सिवाय (संदेश) पहुँचाने के।
- تُبْدُونَ: तुम ज़ाहिर करते हो (प्रकट करते हो)।
- تَكْتُمُونَ: तुम छिपाते हो (गुप्त रखते हो)।
व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने रसूल (ﷺ) की ज़िम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए फ़रमाता है कि रसूल (ﷺ) पर केवल संदेश पहुँचाना (तब्लीग़) है। उनका काम लोगों को सीधा रास्ता दिखाना और अल्लाह का हुक्म पहुँचाना है। यह उनकी ज़िम्मेदारी है, और उन्होंने इसे पूरा किया। लेकिन लोगों को हिदायत देना (तौफ़ीक़) और उनके दिलों को सीधा करना अल्लाह के हाथ में है। रसूल (ﷺ) किसी को ज़बरदस्ती मुसलमान नहीं बना सकते, न ही किसी के दिल में ईमान डाल सकते हैं। यह काम सिर्फ़ अल्लाह ही करता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह जानता है जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो (चाहे अच्छे काम हों या बुरे) और जो कुछ तुम छिपाते हो (चाहे वह कुफ़्र हो, निफ़ाक़ हो या कोई और बात)। तुम्हारे दिलों में जो इरादे और नियतें हैं, उन सब से अल्लाह पूरी तरह वाक़िफ़ है। वह तुम्हारे ज़ाहिरी और बातिनी (छिपे हुए) सारे अमाल को जानता है और उसी के अनुसार तुम्हें बदला देगा। इसलिए लोगों को चाहिए कि वे अपने अंदर और बाहर दोनों को ठीक रखें, क्योंकि अल्लाह से कुछ भी छिपा नहीं है।
फ़ायदे (सबक़):
- रसूल (ﷺ) की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ तब्लीग़ है — इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमारा काम भी सच्चाई और दीन का पैग़ाम दूसरों तक पहुँचाना है, लेकिन नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। किसी को हिदायत देने की ज़िद नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमारा फ़र्ज़ सिर्फ़ बताना है।
- हिदायत अल्लाह के हाथ में है — यह बात हमें नम्रता सिखाती है कि हम किसी को ज़बरदस्ती या अपनी कोशिशों से मुसलमान नहीं बना सकते। हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह लोगों को हिदायत दे।
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे ज़ाहिर और बातिन (छिपे और खुले) सब कुछ जानता है, तो हमारे अंदर अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा होता है और हम गुनाहों से बचते हैं। यह हमें ईमानदारी और सच्चाई की तरफ़ ले जाता है।
- अच्छे और बुरे दोनों का बदला मिलेगा — यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमारे हर अमल का हिसाब होगा, चाहे वह छिपा हो या खुला। इससे इंसान में ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा होता है और वह अच्छे कामों में जल्दी करता है।
- इस्लाम में आज़ादी और इख़्तियार — इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में ज़बरदस्ती नहीं है। रसूल (ﷺ) का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना था, और लोगों को अपनी मर्ज़ी से ईमान लाना था। यह इस्लाम की नरमी और इंसाफ़ को दर्शाता है।
📜 आयत 97-101 — अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 99
सूरा अल-माइदा आयत 99 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हमारे) रसूल पर पैग़ाम पहुँचा देने के सिवा (और) कुछ…सूरा आयत 99/120 — अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-माइदा सुनें, अल-माइदा अनुवाद, अल-माइदा mp3, अल-माइदा pdf. आयत 97–101. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








