अल-क़मर · 9/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ ۝٩
Kazzabat qablahum qawmu Noohin fakazzaboo `abdanaa wa qaaloo majnoo nunw wazdujir
📖 हिंदी अर्थ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبَتْ: झुठलाया
  • قَوْمُ نُوحٍ: नूह की क़ौम
  • عَبْدَنَا: हमारे बंदे (नूह अलैहिस्सलाम)
  • مَجْنُونٌ: पागल, दीवाना
  • وَازْدُجِرَ: उसे डाँटा-डपटा और धमकाया गया

तफ़सीर:

ऐ नबी! आपसे पहले भी नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम ने अपने नबी को झुठलाया था। उन्होंने हमारे उस नेक बंदे नूह को झुठलाया, जिसे हमने उनकी हिदायत के लिए भेजा था। उन्होंने न सिर्फ़ उनकी दावत को नकारा, बल्कि उन्हें पागल कहा और उन पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाए। जब नूह अलैहिस्सलाम ने उन्हें सच्चाई की तरफ़ बुलाया, तो उन्होंने उन्हें डाँटा, धमकाया और उन्हें रोकने की कोशिश की, ताकि वे अपनी दावत छोड़ दें। उन्होंने नूह अलैहिस्सलाम को हर तरह से तंग किया, लेकिन नूह अलैहिस्सलाम ने सब्र और इस्तिक़लाल (स्थिरता) से काम लिया और अल्लाह की राह में डटे रहे।

ये क़िस्सा हमें सिखाता है कि नबियों को झुठलाने और उन्हें तकलीफ़ देने का अंजाम हमेशा बुरा होता है। नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम को आख़िरकार तूफ़ान में डुबो दिया गया, जबकि नूह अलैहिस्सलाम और उनके साथी ईमान वाले बचा लिए गए। ये अल्लाह का क़ानून है कि वह अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को रुसवा करता है।

इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि सच्चाई की राह पर चलने वालों को दुनिया में तकलीफ़ें और मुश्किलें आती हैं, लेकिन अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने सब्र किया और अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी, उसी तरह आज अगर हम सच्चाई पर डटे रहें और अल्लाह पर भरोसा रखें, तो अल्लाह हमारी भी मदद करेगा। ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह के दीन की ख़िदमत करने वालों को दुनिया की परवाह नहीं करनी चाहिए, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का ख़्याल रखना चाहिए।



📜 आयत 7-11 — अल-क़मर

7خُشَّعًا أَبْصَارُهُمْ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ كَأَنَّهُمْ جَرَادٌ مُّنتَشِرٌ
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
8مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
9۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
10فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
11فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُّنْهَمِرٍ
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
9आयत

अनुवाद — अल-क़मर 9

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Tuesday, August 18, 2026

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