अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَذَّبَتْ: झुठलाया
- قَوْمُ نُوحٍ: नूह की क़ौम
- عَبْدَنَا: हमारे बंदे (नूह अलैहिस्सलाम)
- مَجْنُونٌ: पागल, दीवाना
- وَازْدُجِرَ: उसे डाँटा-डपटा और धमकाया गया
तफ़सीर:
ऐ नबी! आपसे पहले भी नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम ने अपने नबी को झुठलाया था। उन्होंने हमारे उस नेक बंदे नूह को झुठलाया, जिसे हमने उनकी हिदायत के लिए भेजा था। उन्होंने न सिर्फ़ उनकी दावत को नकारा, बल्कि उन्हें पागल कहा और उन पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाए। जब नूह अलैहिस्सलाम ने उन्हें सच्चाई की तरफ़ बुलाया, तो उन्होंने उन्हें डाँटा, धमकाया और उन्हें रोकने की कोशिश की, ताकि वे अपनी दावत छोड़ दें। उन्होंने नूह अलैहिस्सलाम को हर तरह से तंग किया, लेकिन नूह अलैहिस्सलाम ने सब्र और इस्तिक़लाल (स्थिरता) से काम लिया और अल्लाह की राह में डटे रहे।
ये क़िस्सा हमें सिखाता है कि नबियों को झुठलाने और उन्हें तकलीफ़ देने का अंजाम हमेशा बुरा होता है। नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम को आख़िरकार तूफ़ान में डुबो दिया गया, जबकि नूह अलैहिस्सलाम और उनके साथी ईमान वाले बचा लिए गए। ये अल्लाह का क़ानून है कि वह अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को रुसवा करता है।
इस आयत से हमें ये सबक़ मिलता है कि सच्चाई की राह पर चलने वालों को दुनिया में तकलीफ़ें और मुश्किलें आती हैं, लेकिन अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह नूह अलैहिस्सलाम ने सब्र किया और अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी, उसी तरह आज अगर हम सच्चाई पर डटे रहें और अल्लाह पर भरोसा रखें, तो अल्लाह हमारी भी मदद करेगा। ये आयत हमें बताती है कि अल्लाह के दीन की ख़िदमत करने वालों को दुनिया की परवाह नहीं करनी चाहिए, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का ख़्याल रखना चाहिए।
📜 आयत 7-11 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 9
सूरा अल-क़मर आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो…सूरा आयत 9/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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