अल-क़मर · 10/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ ۝١٠
Fada`aa Rabbahooo annee maghloobun fantasir
📖 हिंदी अर्थ
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَغْلُوبٌ (मग़्लूब): पराजित, कमज़ोर, जिसे क़ौम ने दबा दिया हो।
  • فَانتَصِر (फ़ान्तसिर): मेरी मदद कर, मेरे लिए बदला ले, उन पर विजय दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सैकड़ों वर्षों तक ईमान की दावत दी, लेकिन उनकी क़ौम ने हठ और अहंकार से काम लिया। उन्होंने न केवल दावत को ठुकराया, बल्कि नूह (अलैहिस्सलाम) का मज़ाक उड़ाया और उन्हें सताया। जब हालात बेहद कठिन हो गए और क़ौम का ज़ुल्म अपनी इंतिहा पर पहुँच गया, तो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब की तरफ रुजू किया और यह दुआ की: "ऐ मेरे रब! मैं कमज़ोर पड़ गया हूँ, मेरी क़ौम ने मुझ पर ग़लबा पा लिया है, वे मेरी बात नहीं मानते। अब तू ही मेरी मदद कर और उन पर अपनी तरफ से अज़ाब भेजकर मेरा बदला ले।"

यह दुआ नूह (अलैहिस्सलाम) की मजबूरी और अल्लाह पर पूरे भरोसे का इज़हार है। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं अपनी ताक़त से बदला लूँगा, बल्कि पूरी तरह अल्लाह की तरफ रुजू किया और उसी से मदद माँगी। यह सिखाता है कि जब इंसान अपनी हर तरह की कमज़ोरी का एहसास करके अल्लाह की तरफ मुड़ता है, तो अल्लाह उसकी सुनता है और उसे ज़रूर मदद देता है।

अल्लाह ने इस दुआ को क़बूल किया और नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर तूफ़ान भेजा, जिसने सारे काफ़िरों को डुबो दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि वह अपने नेक बंदों की दुआ कभी बेकार नहीं करता। इस आयत से हमें सबक मिलता है कि हमें भी मुश्किलों में अल्लाह ही से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार है। जब इंसान अपनी बेबसी का इज़हार अल्लाह के सामने करता है, तो अल्लाह उसकी सुनता है और उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता दिखाता है। यही ईमान की ताक़त है कि इंसान हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे और उसी से उम्मीद लगाए।



📜 आयत 8-12 — सूरा अल-क़मर

8مُّهْطِعِينَ إِلَى الدَّاعِ ۖ يَقُولُ الْكَافِرُونَ هَٰذَا يَوْمٌ عَسِرٌ
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
9۞ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
10فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
11فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُّنْهَمِرٍ
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
12وَفَجَّرْنَا الْأَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَاءُ عَلَىٰ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
10आयत

अनुवाद — अल-क़मर 10

सूरा अल-क़मर आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार…

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Friday, October 2, 2026

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