अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَغْلُوبٌ (मग़्लूब): पराजित, कमज़ोर, जिसे क़ौम ने दबा दिया हो।
- فَانتَصِر (फ़ान्तसिर): मेरी मदद कर, मेरे लिए बदला ले, उन पर विजय दे।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को सैकड़ों वर्षों तक ईमान की दावत दी, लेकिन उनकी क़ौम ने हठ और अहंकार से काम लिया। उन्होंने न केवल दावत को ठुकराया, बल्कि नूह (अलैहिस्सलाम) का मज़ाक उड़ाया और उन्हें सताया। जब हालात बेहद कठिन हो गए और क़ौम का ज़ुल्म अपनी इंतिहा पर पहुँच गया, तो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब की तरफ रुजू किया और यह दुआ की: "ऐ मेरे रब! मैं कमज़ोर पड़ गया हूँ, मेरी क़ौम ने मुझ पर ग़लबा पा लिया है, वे मेरी बात नहीं मानते। अब तू ही मेरी मदद कर और उन पर अपनी तरफ से अज़ाब भेजकर मेरा बदला ले।"
यह दुआ नूह (अलैहिस्सलाम) की मजबूरी और अल्लाह पर पूरे भरोसे का इज़हार है। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं अपनी ताक़त से बदला लूँगा, बल्कि पूरी तरह अल्लाह की तरफ रुजू किया और उसी से मदद माँगी। यह सिखाता है कि जब इंसान अपनी हर तरह की कमज़ोरी का एहसास करके अल्लाह की तरफ मुड़ता है, तो अल्लाह उसकी सुनता है और उसे ज़रूर मदद देता है।
अल्लाह ने इस दुआ को क़बूल किया और नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम पर तूफ़ान भेजा, जिसने सारे काफ़िरों को डुबो दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है कि वह अपने नेक बंदों की दुआ कभी बेकार नहीं करता। इस आयत से हमें सबक मिलता है कि हमें भी मुश्किलों में अल्लाह ही से मदद माँगनी चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार है। जब इंसान अपनी बेबसी का इज़हार अल्लाह के सामने करता है, तो अल्लाह उसकी सुनता है और उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता दिखाता है। यही ईमान की ताक़त है कि इंसान हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे और उसी से उम्मीद लगाए।
📜 आयत 8-12 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 10
सूरा अल-क़मर आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार…सूरा आयत 10/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








