अल-अनआम · 163/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
لَا شَرِيكَ لَهُ ۖ وَبِذَٰلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ ۝١٦٣
Laa shareeka lahoo wa bizaalika umirtu wa ana awwalul muslimeen
📖 हिंदी अर्थ
और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا شَرِيكَ لَهُ: उसका कोई साझीदार नहीं।
  • أُمِرْتُ: मुझे आदेश दिया गया।
  • أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ: सबसे पहले आज्ञाकारी (इस उम्मत में)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला हर प्रकार की कमी से पाक है, उसका कोई साझीदार नहीं—न उसकी रुबूबियत (पालनहार होने) में, न उसकी उलूहियत (पूज्य होने) में, और न उसके नामों और सिफात (गुणों) में। वह अकेला ही सच्चा माबूद (पूज्य) है, उसके अलावा कोई भी इबादत (पूजा) के योग्य नहीं। यही खालिस (शुद्ध) तौहीद है—जो शिर्क से पाक हो। इसी तौहीद और इखलास (एकाग्रता) का आदेश मुझे (नबी ﷺ को) मेरे रब ने दिया है, और मैं इस उम्मत में सबसे पहला हूँ जो अल्लाह के आगे सर झुकाने वाला और उसके हुक्म का पूर्ण रूप से पालन करने वाला है। हर नबी की आज्ञाकारिता (इस्लाम) अपनी उम्मत की आज्ञाकारिता से पहले होती है, इसलिए नबी ﷺ इस उम्मत के सबसे अग्रणी मुस्लिम हैं।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (एकेश्वरवाद) ही इस्लाम की जड़ और आधार है—जिसमें अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाना (शिर्क) सबसे बड़ा पाप है।
  2. नबी ﷺ का यह कथन कि "मैं सबसे पहला मुस्लिम हूँ" हमें सिखाता है कि सच्चा मुसलमान वही है जो अल्लाह के आदेशों के सामने पूर्ण समर्पण करे, बिना किसी हिचकिचाहट के।
  3. यह आयत हमें इखलास (निष्ठा) की ओर बुलाती है—कि हमारी इबादत, हमारा जीवन और हमारी मृत्यु सब कुछ अकेले अल्लाह के लिए हो।
  4. यहाँ से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने जीवन में नबी ﷺ के इस आदर्श का अनुसरण करें—पहले स्वयं अल्लाह के आगे झुकें, फिर दूसरों को इसी ओर बुलाएँ।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह विश्वास दिलाती है कि इस्लाम ही वह सच्चा दीन है जो अल्लाह की ओर से भेजा गया है, और इस पर चलने वालों को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलेगी।


📜 आयत 161-165 — सूरा अल-अनआम

161قُلْ إِنَّنِي هَدَانِي رَبِّي إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ دِينًا قِيَمًا مِّلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۚ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मुझे तो मेरे परवरदिगार ने सीधी राह यानि एक मज़बूत दीन इबराहीम के मज़हब की हिदायत फरमाई है बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से न थे
162قُلْ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों से कह दो कि मेरी नमाज़ मेरी इबादत मेरा जीना मेरा मरना सब ख़ुदा ही के वास्ते है जो सारे जहाँ का परवरदिगार है
163لَا شَرِيكَ لَهُ ۖ وَبِذَٰلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُسْلِمِينَ
और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है और मैं सबसे पहले इस्लाम लाने वाला हूँ
164قُلْ أَغَيْرَ اللَّهِ أَبْغِي رَبًّا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيْءٍ ۚ وَلَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ إِلَّا عَلَيْهَا ۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرْجِعُكُمْ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) तुम पूछो तो कि क्या मैं ख़ुदा के सिवा किसी और को परवरदिगार तलाश करुँ हालॉकि वह तमाम चीज़ो का मालिक है और जो शख्स कोई बुरा काम करता है उसका (वबाल) उसी पर है और कोई शख्स किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठाने का फिर तुम सबको अपने परवरदिगार के हुज़ूर में लौट कर जाना है तब तुम लोग जिन बातों में बाहम झगड़ते थे वह सब तुम्हें बता देगा
165وَهُوَ الَّذِي جَعَلَكُمْ خَلَائِفَ الْأَرْضِ وَرَفَعَ بَعْضَكُمْ فَوْقَ بَعْضٍ دَرَجَاتٍ لِّيَبْلُوَكُمْ فِي مَا آتَاكُمْ ۗ إِنَّ رَبَّكَ سَرِيعُ الْعِقَابِ وَإِنَّهُ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने तुम्हें ज़मीन में (अपना) नायब बनाया और तुममें से बाज़ के बाज़ पर दर्जे बुलन्द किये ताकि वो (नेअमत) तुम्हें दी है उसी पर तुम्हारा इमतेहान करे उसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बहुत जल्द अज़ाब करने वाला है और इसमें भी शक नहीं कि वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
163आयत

अनुवाद — अल-अनआम 163

सूरा अल-अनआम आयत 163 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसका कोई शरीक़ नहीं और मुझे इसी का हुक्म…

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Sunday, October 4, 2026

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