Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَمْعَكُمْ (तुम्हारी सुनने की शक्ति) — इससे अभिप्राय कानों से सुनने की शक्ति है।
- أَبْصَارَكُمْ (तुम्हारी आँखें) — देखने की शक्ति।
- خَتَمَ (मोहर लगा दी) — अर्थात् बंद कर दिया, इस प्रकार कि कोई बात उसमें प्रवेश न कर सके।
- يَصْدِفُونَ (वे मुँह मोड़ते हैं) — वे टालते हैं और उससे विमुख हो जाते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "बताओ, यदि अल्लाह तुम्हारे कानों की सुनने की शक्ति छीन ले और वह तुम्हें बहरा कर दे, तुम्हारी आँखों की रोशनी चली जाए और वह तुम्हें अंधा कर दे, और तुम्हारे दिलों पर मोहर लगा दे, जिससे तुम्हें कुछ भी समझ में न आए — तो अल्लाह के सिवा कोई और पूज्य (माबूद) है जो ये सब चीज़ें तुम्हें लौटा सके?" निश्चय ही कोई नहीं है। यह प्रश्न उन्हें इस सत्य का अहसास कराने के लिए है कि ये सब नेमतें अल्लाह ही की देन हैं, और वही उन्हें छीनने और लौटाने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी से कहता है: "देखिए, हम किस प्रकार अपनी आयतों और प्रमाणों को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत करते हैं — कभी उन्हें सृष्टि के नज़ारों से, कभी उनके भीतर की बातों से, कभी पिछली उम्मतों के हालात से — ताकि वे समझें और सीधे रास्ते पर आएँ।" इसके बावजूद वे इन आयतों से मुँह मोड़ लेते हैं और उन पर विचार करने से इनकार करते हैं। यह उनकी हठधर्मिता और अहंकार की पराकाष्ठा है कि इतने स्पष्ट प्रमाणों के बाद भी वे सत्य से विमुख रहते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की नेमतों की क़द्र करनी चाहिए — कान, आँख और दिल ये सब अल्लाह की बड़ी नेमतें हैं; इनके खोने पर ही इनकी अहमियत समझ आती है। इसलिए इनका सही उपयोग करें और इन नेमतों के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार और बचाने वाला नहीं है — जब अल्लाह ही सब कुछ देने और छीनने वाला है, तो उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से डरना चाहिए।
- अल्लाह अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है कि वह बार-बार अपनी आयतें और प्रमाण पेश करता है, ताकि लोग समझ जाएँ और सीधे रास्ते पर आ जाएँ। यह उसकी रहमत और दया का प्रमाण है।
- इंसान को चाहिए कि जब उसे सत्य समझ में आ जाए, तो उस पर अमल करे और उससे मुँह न मोड़े — क्योंकि सत्य से विमुख होना ही इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर करता है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपनी इंद्रियों और दिल का इस्तेमाल अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करने में करें, न कि उन्हें नकारने और टालने में।
📜 आयत 44-48 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 46
सूरा अल-अनआम आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि…सूरा आयत 46/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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