Qul ara`aitum in akhazal laahu sam`akum wa absaarakum wa khatama `alaa quloobikum man ilaahun ghairul laahi yaateekum bih; unzur kaifa nusarriful Aayaati summa hum yasdifoon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं
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(ان کافروں سے) کہو کہ بھلا دیکھو تو اگر خدا تمہارے کان اور آنکھیں چھین لے اور تمہارے دلوں پر مہر لگادے تو خداکے سوا کون سا معبود ہے جو تمہیں یہ نعمتیں پھر بخشے؟ دیکھو ہم کس کس طرح اپنی آیتیں بیان کرتے ہیں۔ پھر بھی یہ لوگ ردگردانی کرتے ہیں
(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
سَمْعَكُمْ (तुम्हारी सुनने की शक्ति) — इससे अभिप्राय कानों से सुनने की शक्ति है।
أَبْصَارَكُمْ (तुम्हारी आँखें) — देखने की शक्ति।
خَتَمَ (मोहर लगा दी) — अर्थात् बंद कर दिया, इस प्रकार कि कोई बात उसमें प्रवेश न कर सके।
يَصْدِفُونَ (वे मुँह मोड़ते हैं) — वे टालते हैं और उससे विमुख हो जाते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "बताओ, यदि अल्लाह तुम्हारे कानों की सुनने की शक्ति छीन ले और वह तुम्हें बहरा कर दे, तुम्हारी आँखों की रोशनी चली जाए और वह तुम्हें अंधा कर दे, और तुम्हारे दिलों पर मोहर लगा दे, जिससे तुम्हें कुछ भी समझ में न आए — तो अल्लाह के सिवा कोई और पूज्य (माबूद) है जो ये सब चीज़ें तुम्हें लौटा सके?" निश्चय ही कोई नहीं है। यह प्रश्न उन्हें इस सत्य का अहसास कराने के लिए है कि ये सब नेमतें अल्लाह ही की देन हैं, और वही उन्हें छीनने और लौटाने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी से कहता है: "देखिए, हम किस प्रकार अपनी आयतों और प्रमाणों को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत करते हैं — कभी उन्हें सृष्टि के नज़ारों से, कभी उनके भीतर की बातों से, कभी पिछली उम्मतों के हालात से — ताकि वे समझें और सीधे रास्ते पर आएँ।" इसके बावजूद वे इन आयतों से मुँह मोड़ लेते हैं और उन पर विचार करने से इनकार करते हैं। यह उनकी हठधर्मिता और अहंकार की पराकाष्ठा है कि इतने स्पष्ट प्रमाणों के बाद भी वे सत्य से विमुख रहते हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह की नेमतों की क़द्र करनी चाहिए — कान, आँख और दिल ये सब अल्लाह की बड़ी नेमतें हैं; इनके खोने पर ही इनकी अहमियत समझ आती है। इसलिए इनका सही उपयोग करें और इन नेमतों के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करें।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार और बचाने वाला नहीं है — जब अल्लाह ही सब कुछ देने और छीनने वाला है, तो उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से डरना चाहिए।
अल्लाह अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है कि वह बार-बार अपनी आयतें और प्रमाण पेश करता है, ताकि लोग समझ जाएँ और सीधे रास्ते पर आ जाएँ। यह उसकी रहमत और दया का प्रमाण है।
इंसान को चाहिए कि जब उसे सत्य समझ में आ जाए, तो उस पर अमल करे और उससे मुँह न मोड़े — क्योंकि सत्य से विमुख होना ही इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर करता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपनी इंद्रियों और दिल का इस्तेमाल अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करने में करें, न कि उन्हें नकारने और टालने में।
फिर जिसकी उन्हें नसीहत की गयी थी जब उसको भूल गए तो हमने उन पर (ढील देने के लिए) हर तरह की (दुनियावी) नेअमतों के दरवाज़े खोल दिए यहाँ तक कि जो नेअमतें उनको दी गयी थी जब उनको पाकर ख़ुश हुए तो हमने उन्हें नागाहाँ (एक दम) ले डाला तो उस वक्त वह नाउम्मीद होकर रह गए
(कि क़िस्सा पाक हुआ) (ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर ख़ुदा तुम्हारे कान और तुम्हारी ऑंखे लें ले और तुम्हारे दिलों पर मोहर कर दे तो ख़ुदा के सिवा और कौन मौजूद है जो (फिर) तुम्हें ये नेअमतें (वापस) दे (ऐ रसूल) देखो तो हम किस किस तरह अपनी दलीले बयान करते हैं इस पर भी वह लोग मुँह मोडे ज़ाते हैं
(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि क्या तुम ये समझते हो कि अगर तुम्हारे सर पर ख़ुदा का अज़ाब बेख़बरी में या जानकारी में आ जाए तो क्या गुनाहगारों के सिवा और लोग भी हलाक़ किए जाएंगें (हरगिज़ नहीं)
और हम तो रसूलों को सिर्फ इस ग़रज़ से भेजते हैं कि (नेको को जन्नत की) खुशख़बरी दें और (बदो को अज़ाब जहन्नुम से) डराएं फिर जिसने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए तो ऐसे लोगों पर (क़यामत में) न कोई ख़ौफ होगा और न वह ग़मग़ीन होगें
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