अल-अनआम · 75/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَكَذَٰلِكَ نُرِي إِبْرَاهِيمَ مَلَكُوتَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلِيَكُونَ مِنَ الْمُوقِنِينَ ۝٧٥
Wa kazaalika nureee Ibraaheema malakootas samaawaati wal ardi wa liyakoona minal mooqineen
📖 हिंदी अर्थ
और (जिस तरह हमने इबराहीम को दिखाया था कि बुत क़ाबिले परसतिश (पूजने के क़ाबिल) नहीं) उसी तरह हम इबराहीम को सारे आसमान और ज़मीन की सल्तनत का (इन्तज़ाम) दिखाते रहे ताकि वह (हमारी वहदानियत का) यक़ीन करने वालों से हो जाएं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَلَكُوتَ: राज्य, सत्ता और प्रभुत्व। यहाँ इसका अर्थ है आकाशों और धरती का विशाल राज्य और उनमें मौजूद सारी चीज़ें जो अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) और रबूबियत (पालनहार होने) की दलील हैं।
  • الْمُوقِنِينَ: यक़ीन रखने वाले, वे लोग जिनके दिलों में किसी चीज़ के बारे में कोई शक न हो, बल्कि पूरा विश्वास और पक्का ज्ञान हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस तरह हमने इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उनके पिता और उनकी क़ौम की गुमराही से सत्य का रास्ता दिखाया और उन्हें सच्ची समझ अता की, उसी तरह हम उन्हें आकाशों और धरती का विशाल राज्य और उनमें मौजूद अजीबो-ग़रीब मख़लूक़ात (प्राणियों) और निशानियाँ दिखाते हैं। यह सब कुछ उन्हें इसलिए दिखाया गया ताकि वे इन चीज़ों को देखकर अल्लाह की वहदानियत (एकता) और उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करें, और यह समझें कि यह सारा निज़ाम एक ही क़ादिर (सक्षम) और हकीम (बुद्धिमान) का बनाया हुआ है। इस नज़ारे ने उनके दिल में यक़ीन की वह मंज़िल पैदा कर दी जिसमें किसी तरह का शक या संदेह नहीं रहा। वे उन लोगों में से हो गए जो अल्लाह की एकता और उसकी हर चीज़ पर क़ुदरत पर पूरा यक़ीन रखते हैं, और यह यक़ीन सिर्फ़ दिमाग़ी दलीलों से नहीं, बल्कि आँखों से देखकर और दिल से महसूस करके हासिल हुआ।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ात पर ग़ौर और फ़िक्र करना ईमान को मज़बूत करता है। जब इंसान आसमान, ज़मीन, सितारों और जानवरों को देखता है, तो उसका दिल अल्लाह की अज़मत (महानता) के सामने झुक जाता है।
  2. यक़ीन (पक्का विश्वास) सिर्फ़ सुनने से नहीं, बल्कि देखने, समझने और ग़ौर करने से पैदा होता है। इसलिए हमें भी अल्लाह की निशानियों पर ध्यान देना चाहिए।
  3. अल्लाह अपने नेक बंदों को विशेष समझ और मार्फ़त (पहचान) अता करता है, जिससे वे दुनिया की हक़ीक़त को समझ पाते हैं और गुमराही से बचे रहते हैं।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो दिल की गहराई तक पहुँचे और इंसान के अंदर अल्लाह की महानता का एहसास पैदा करे, न कि सिर्फ़ ज़ुबानी इक़रार (मौखिक स्वीकारोक्ति) हो।


📜 आयत 73-77 — सूरा अल-अनआम

73وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ وَيَوْمَ يَقُولُ كُن فَيَكُونُ ۚ قَوْلُهُ الْحَقُّ ۚ وَلَهُ الْمُلْكُ يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
उसका क़ौल सच्चा है और जिस दिन सूर फूंका जाएगा (उस दिन) ख़ास उसी की बादशाहत होगी (वही) ग़ायब हाज़िर (सब) का जानने वाला है और वही दाना वाक़िफकार है
74۞ وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ آزَرَ أَتَتَّخِذُ أَصْنَامًا آلِهَةً ۖ إِنِّي أَرَاكَ وَقَوْمَكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल) उस वक्त क़ा याद करो) जब इबराहीम ने अपने (मुंह बोले) बाप आज़र से कहा क्या तुम बुतों को ख़ुदा मानते हो-मै तो तुमको और तुम्हारी क़ौम को खुली गुमराही में देखता हूँ
75وَكَذَٰلِكَ نُرِي إِبْرَاهِيمَ مَلَكُوتَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلِيَكُونَ مِنَ الْمُوقِنِينَ
और (जिस तरह हमने इबराहीम को दिखाया था कि बुत क़ाबिले परसतिश (पूजने के क़ाबिल) नहीं) उसी तरह हम इबराहीम को सारे आसमान और ज़मीन की सल्तनत का (इन्तज़ाम) दिखाते रहे ताकि वह (हमारी वहदानियत का) यक़ीन करने वालों से हो जाएं
76فَلَمَّا جَنَّ عَلَيْهِ اللَّيْلُ رَأَىٰ كَوْكَبًا ۖ قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَا أُحِبُّ الْآفِلِينَ
तो जब उन पर रात की तारीक़ी (अंधेरा) छा गयी तो एक सितारे को देखा तो दफअतन बोल उठे (हाए क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह डूब गया तो कहने लगे ग़ुरुब (डूब) हो जाने वाली चीज़ को तो मै (ख़ुदा बनाना) पसन्द नहीं करता
77فَلَمَّا رَأَى الْقَمَرَ بَازِغًا قَالَ هَٰذَا رَبِّي ۖ فَلَمَّا أَفَلَ قَالَ لَئِن لَّمْ يَهْدِنِي رَبِّي لَأَكُونَنَّ مِنَ الْقَوْمِ الضَّالِّينَ
फिर जब चाँद को जगमगाता हुआ देखा तो बोल उठे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है फिर जब वह भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे कि अगर (कहीं) मेरा (असली) परवरदिगार मेरी हिदायत न करता तो मैं ज़रुर गुमराह लोगों में हो जाता
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
75आयत

अनुवाद — अल-अनआम 75

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Monday, September 28, 2026

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