अल-अनआम · 88/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
ذَٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهْدِي بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَلَوْ أَشْرَكُوا لَحَبِطَ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٨٨
Zaalika hudal laahi yahdee bihee mai yashaaa`u min `ibaadih; wa law ashrakoo lahabita `anhum maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(देखो) ये ख़ुदा की हिदायत है अपने बन्दों से जिसको चाहे उसीकी वजह से राह पर लाए और अगर उन लोगों ने शिर्क किया होता तो उनका किया (धरा) सब अकारत हो जाता
📜

अनुवाद — Tafsir

यह ईश्वर का मार्गदर्शन है, जिससे वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, मार्गदर्शित करता है। और यदि उन्होंने (पैगंबरों ने) शिर्क किया होता, तो उनके सारे अमल (कर्म) व्यर्थ हो जाते।

शब्दों के अर्थ:

  • हुदा: मार्गदर्शन, सीधा रास्ता दिखाना
  • यहदी: मार्गदर्शन करता है, रास्ता दिखाता है
  • अशरकू: शिर्क किया, ईश्वर के साथ किसी और को साझीदार बनाया
  • हबिता: व्यर्थ हो जाना, नष्ट हो जाना, बेकार हो जाना

व्याख्या:

यह आयत बताती है कि जो मार्गदर्शन पैगंबरों को प्राप्त हुआ, वह अल्लाह की ओर से है। अल्लाह अपनी इच्छा से अपने चुने हुए बंदों को सीधा रास्ता दिखाता है। यह उसकी कृपा और दया है कि वह किसी को सत्य की समझ देता है और उसे सही मार्ग पर चलाता है।

इसके बाद अल्लाह एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताता है कि यदि वे पैगंबर भी (मान लिया जाए) शिर्क करते, तो उनके सभी अच्छे कर्म व्यर्थ हो जाते। यह शिर्क की गंभीरता को दर्शाता है। शिर्क सबसे बड़ा पाप है, जिसे अल्लाह कभी क्षमा नहीं करता जब तक कि व्यक्ति उससे तौबा न करे। शिर्क के साथ किया गया कोई भी अच्छा काम अल्लाह के यहाँ स्वीकार नहीं होता।

यह बात हमें सिखाती है कि हमारे कर्मों की स्वीकार्यता का आधार तौहीद (एकेश्वरवाद) है। जब तक हम अल्लाह को एक मानकर उसी की इबादत करेंगे, हमारे कर्म स्वीकार होंगे। लेकिन अगर हमने किसी को भी अल्लाह का साझीदार बनाया, तो हमारे सभी अच्छे काम बेकार हो जाएंगे।

यह आयत हमें चेतावनी देती है कि शिर्क से बचें, चाहे वह बड़ा हो या छोटा। शिर्क केवल मूर्तियों की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी चीज़ को अल्लाह के बराबर या उससे बढ़कर महत्व देना शिर्क है। हमें अपने जीवन के हर पहलू में अल्लाह को सर्वोच्च मानना चाहिए और उसी की राह पर चलना चाहिए।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का मार्गदर्शन कितनी बड़ी नेमत है। जिसे यह नेमत मिल जाए, वह सफल है। हमें अल्लाह से यह दुआ करनी चाहिए कि वह हमें सीधा रास्ता दिखाए और हमें शिर्क से बचाए। अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दयालु है और वह चाहता है कि हम सही रास्ते पर चलें।

🎧 सुनें

📜 आयत 86-90 — अल-अनआम

86وَإِسْمَاعِيلَ وَالْيَسَعَ وَيُونُسَ وَلُوطًا ۚ وَكُلًّا فَضَّلْنَا عَلَى الْعَالَمِينَ
और इसमाइल व इलियास व युनूस व लूत (की भी हिदायत की) और सब को सारे जहाँन पर फज़ीलत अता की
87وَمِنْ آبَائِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ وَإِخْوَانِهِمْ ۖ وَاجْتَبَيْنَاهُمْ وَهَدَيْنَاهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और (सिर्फ उन्हीं को नहीं बल्कि) उनके बाप दादाओं और उनकी औलाद और उनके भाई बन्दों में से (बहुतेरों को) और उनके मुन्तख़िब किया और उन्हें सीधी राह की हिदायत की
88ذَٰلِكَ هُدَى اللَّهِ يَهْدِي بِهِ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۚ وَلَوْ أَشْرَكُوا لَحَبِطَ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(देखो) ये ख़ुदा की हिदायत है अपने बन्दों से जिसको चाहे उसीकी वजह से राह पर लाए और अगर उन लोगों ने शिर्क किया होता तो उनका किया (धरा) सब अकारत हो जाता
89أُولَٰئِكَ الَّذِينَ آتَيْنَاهُمُ الْكِتَابَ وَالْحُكْمَ وَالنُّبُوَّةَ ۚ فَإِن يَكْفُرْ بِهَا هَٰؤُلَاءِ فَقَدْ وَكَّلْنَا بِهَا قَوْمًا لَّيْسُوا بِهَا بِكَافِرِينَ
(पैग़म्बर) वह लोग थे जिनको हमने (आसमानी) किताब और हुकूमत और नुबूवत अता फरमाई पस अगर ये लोग उसे भी न माने तो (कुछ परवाह नहीं) हमने तो उस पर ऐसे लोगों को मुक़र्रर कर दिया हे जो (उनकी तरह) इन्कार करने वाले नहीं
90أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَى اللَّهُ ۖ فَبِهُدَاهُمُ اقْتَدِهْ ۗ قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْعَالَمِينَ
(ये अगले पैग़म्बर) वह लोग थे जिनकी ख़ुदा ने हिदायत की पस तुम भी उनकी हिदायत की पैरवी करो (ऐ रसूल उन से) कहो कि मै तुम से इस (रिसालत) की मज़दूरी कुछ नहीं चाहता सारे जहाँन के लिए सिर्फ नसीहत है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
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88आयत

अनुवाद — अल-अनआम 88

सूरा अल-अनआम आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (देखो) ये ख़ुदा की हिदायत है अपने बन्दों से जिसको…

सूरा आयत 88/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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