Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَقَوَّلَ: झूठी बात गढ़ना, अपनी ओर से कोई बात कह देना जो अल्लाह ने नहीं कही।
- بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ: कुछ बातें (यानी कोई भी ऐसी बात जो अल्लाह की ओर से न हो)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ की सच्चाई और उनके पैग़ाम की सच्चाई को साबित कर रहा है। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर हमारे नबी ﷺ ने हमारी तरफ़ कोई ऐसी बात मन से गढ़कर कही होती जो हमने नहीं कही, तो हम उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देते। यानी अल्लाह का दीन और क़ुरआन पूरी तरह से अल्लाह की तरफ़ से है, इसमें नबी ﷺ की अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं मिली हुई है।
यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है जो यह सोचते हैं कि क़ुरआन या हदीस में नबी ﷺ ने अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ दिया होगा। अल्लाह साफ़ फ़रमा रहा है कि अगर ऐसा होता तो हम उन्हें पकड़ लेते और उनकी जान ले लेते। यह बात दर्शाती है कि नबी ﷺ का हर शब्द, हर अमल अल्लाह की तरफ़ से था और उन्होंने अपनी तरफ़ से कुछ भी नहीं कहा।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने दीन में कोई नई बात नहीं जोड़नी चाहिए, क्योंकि दीन अल्लाह की तरफ़ से मुकम्मल है। अल्लाह का दीन हमारे लिए रहमत है, और हमें उसी पर चलना चाहिए जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने सिखाया है। यह क़ुरआन उन लोगों के लिए नसीहत है जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी राह पर चलना चाहते हैं।
📜 आयत 42-46 — सूरा अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 44
सूरा अल-हाक़्का आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर रसूल हमारी निस्बत कोई झूठ बात बना लातेसूरा आयत 44/52 — सूरा अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हाक़्का सुनें, सूरा अल-हाक़्का अनुवाद, सूरा अल-हाक़्का mp3, सूरा अल-हाक़्का pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हाक़्का
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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