अल-हाक़्का · 44/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ ۝٤٤
Wa law taqawwala `alainaa ba`dal aqaaweel
📖 हिंदी अर्थ
अगर रसूल हमारी निस्बत कोई झूठ बात बना लाते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَقَوَّلَ: झूठी बात गढ़ना, अपनी ओर से कोई बात कह देना जो अल्लाह ने नहीं कही।
  • بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ: कुछ बातें (यानी कोई भी ऐसी बात जो अल्लाह की ओर से न हो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ की सच्चाई और उनके पैग़ाम की सच्चाई को साबित कर रहा है। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर हमारे नबी ﷺ ने हमारी तरफ़ कोई ऐसी बात मन से गढ़कर कही होती जो हमने नहीं कही, तो हम उन्हें सख़्त से सख़्त सज़ा देते। यानी अल्लाह का दीन और क़ुरआन पूरी तरह से अल्लाह की तरफ़ से है, इसमें नबी ﷺ की अपनी तरफ़ से कोई बात नहीं मिली हुई है।

यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है जो यह सोचते हैं कि क़ुरआन या हदीस में नबी ﷺ ने अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ दिया होगा। अल्लाह साफ़ फ़रमा रहा है कि अगर ऐसा होता तो हम उन्हें पकड़ लेते और उनकी जान ले लेते। यह बात दर्शाती है कि नबी ﷺ का हर शब्द, हर अमल अल्लाह की तरफ़ से था और उन्होंने अपनी तरफ़ से कुछ भी नहीं कहा।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने दीन में कोई नई बात नहीं जोड़नी चाहिए, क्योंकि दीन अल्लाह की तरफ़ से मुकम्मल है। अल्लाह का दीन हमारे लिए रहमत है, और हमें उसी पर चलना चाहिए जो अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने सिखाया है। यह क़ुरआन उन लोगों के लिए नसीहत है जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी राह पर चलना चाहते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — अल-हाक़्का

42وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
और न किसी काहिन की (ख्याली) बात है तुम लोग तो बहुत कम ग़ौर करते हो
43تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
सारे जहाँन के परवरदिगार का नाज़िल किया हुआ (क़लाम) है
44وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ
अगर रसूल हमारी निस्बत कोई झूठ बात बना लाते
45لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ
तो हम उनका दाहिना हाथ पकड़ लेते
46ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ
फिर हम ज़रूर उनकी गर्दन उड़ा देते
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अनुवाद — अल-हाक़्का 44

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Tuesday, August 18, 2026

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