अल-आराफ · 107/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ ۝١٠٧
Qa alqaa `asaahu fa izaa hiya su`baanum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَلْقَىٰ: फेंक दिया
  • عَصَاهُ: अपनी लाठी (असा)
  • ثُعْبَانٌ: बहुत बड़ा साँप (नर साँप, जो आकार में विशाल होता है)
  • مُبِينٌ: स्पष्ट, प्रत्यक्ष, जो देखने वालों पर ज़ाहिर हो

तफ़सीर:

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के सामने अपनी पैग़म्बरी का दावा पेश किया और उससे कहा कि मैं तुम्हारे पास अपने रब का स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ, तो अल्लाह के हुक्म से उन्होंने अपनी लाठी ज़मीन पर फेंक दी। वह लाठी तुरंत एक विशालकाय साँप में बदल गई — ऐसा साँप जो देखने में भयानक और हैरतअंगेज़ था। यह कोई साधारण साँप नहीं था, बल्कि एक बड़ा और स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला साँप था, जिसे देखकर हर शख्स समझ जाता था कि यह कोई जादू या धोखा नहीं, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत का ज़ाहिर नमूना है। यह वाक़िया उस वक़्त हुआ जब फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा था: "अगर तू सच्चा है तो कोई निशानी ला।" चुनाँचे यह निशानी उसके सामने पेश की गई, जो साफ़ और दो टूक थी — कोई पर्दा या अस्पष्टता उसमें नहीं थी। यह सिर्फ़ एक इशारा था कि अल्लाह की ताक़त के आगे हर चीज़ मुतहर्रिक (गतिशील) हो सकती है, और वह चाहे तो बेजान लाठी को भी जानदार साँप बना दे।

फ़ायदे:

  • इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की क़ुदरत असीम है — वह चाहे तो मुर्दा चीज़ों में भी जान डाल सकता है, और उसके हुक्म के आगे कोई चीज़ रुकावट नहीं बन सकती।
  • यह हमें सिखाती है कि सच्चाई के साथ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए; मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जब लाठी फेंकी तो उन्हें पूरा यक़ीन था कि अल्लाह उनकी मदद करेगा, इसलिए वे निडर थे।
  • यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह अपने नबियों को ऐसे मोजिज़े (चमत्कार) देता है जो लोगों के लिए स्पष्ट और सबूत के तौर पर काफ़ी हों, ताकि हक़ बातिल से ज़ाहिर हो जाए।
  • इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि जब हम सच्चाई पर हों और अल्लाह पर भरोसा करें, तो हमें किसी ताक़तवर दुश्मन का डर नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की मदद सबसे बड़ी है।
  • यह हमें इस्लाम की रूह से जोड़ती है — कि दुनिया की हर चीज़ अल्लाह के इशारे पर चलती है, और उसकी इबादत और आज्ञा का पालन ही सच्ची कामयाबी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 105-109 — अल-आराफ

105حَقِيقٌ عَلَىٰ أَن لَّا أَقُولَ عَلَى اللَّهِ إِلَّا الْحَقَّ ۚ قَدْ جِئْتُكُم بِبَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَرْسِلْ مَعِيَ بَنِي إِسْرَائِيلَ
मुझ पर वाजिब है कि ख़ुदा पर सच के सिवा (एक हुरमत भी झूठ) न कहूँ मै यक़ीनन तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से वाजेए व रोशन मौजिज़े लेकर आया हूँ
106قَالَ إِن كُنتَ جِئْتَ بِآيَةٍ فَأْتِ بِهَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो तू बनी ईसराइल को मेरे हमराह करे दे फिरऔन कहने लगा अगर तुम सच्चे हो और वाक़ई कोई मौजिज़ा लेकर आए हो तो उसे दिखाओ
107فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
(ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी पस वह यकायक (अच्छा खासा) ज़ाहिर बज़ाहिर अजदहा बन गई
108وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और अपना हाथ बाहर निकाला तो क्या देखते है कि वह हर शख़्श की नज़र मे जगमगा रहा है
109قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ
तब फिरऔन के क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा ये तो अलबत्ता बड़ा माहिर जादूगर है
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
107आयत

अनुवाद — अल-आराफ 107

सूरा अल-आराफ आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल…

सूरा आयत 107/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए