अल-आराफ · 112/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ ۝١١٢
Yaatooka bikulli saahirin `aleem
📖 हिंदी अर्थ
कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाज़िर करें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَأْتُوكَ: वे तुम्हारे पास लाएँगे
  • بِكُلِّ سَاحِرٍ: हर उस जादूगर को
  • عَلِيمٍ: जो जादू में गहरी जानकारी और महारत रखता हो

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत उस घटना का हिस्सा है जब फ़िरऔन (फ़िरऔन) ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के मुक़ाबले के लिए अपने दरबारियों को आदेश दिया। फ़िरऔन के सलाहकारों ने उसे सुझाव दिया कि वह मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई हारून (अलैहिस्सलाम) को थोड़ी देर के लिए रोके रखे और अपने आदमियों को शहरों में भेज दे, ताकि वे हर उस जादूगर को इकट्ठा करके लाएँ जो जादू के क्षेत्र में अत्यधिक निपुण और पूर्ण जानकारी रखता हो। ये जादूगर अपनी कला में इतने माहिर थे कि वे बड़े से बड़े जादू के करतब दिखा सकते थे। फ़िरऔन का उद्देश्य यह था कि वह मूसा (अलैहिस्सलाम) के चमत्कार को जादू से हरा दे, ताकि लोग उनकी बात न मानें। उसने सोचा कि जितने अधिक और जितने कुशल जादूगर होंगे, उतनी ही आसानी से वह मूसा (अलैहिस्सलाम) के मुक़ाबले में जीत हासिल कर लेगा। इस आयत में "साहिर" (जादूगर) और "अलीम" (जानकार) शब्दों का प्रयोग बताता है कि फ़िरऔन सिर्फ़ साधारण जादूगरों पर निर्भर नहीं था, बल्कि वह उन लोगों को बुलाना चाहता था जो अपनी कला में पूर्णता और गहराई रखते हों। यहाँ "अलीम" से मुराद वह जादूगर है जो जादू के सभी रहस्यों को जानता हो और उसे बख़ूबी इस्तेमाल कर सकता हो।

निष्कर्षित लाभ:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य और असत्य का टकराव हमेशा से होता आया है, और असत्य के पक्षधर अपनी ताकत और साधनों को इकट्ठा करने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन अंतिम विजय हमेशा सत्य की ही होती है।
  2. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की शक्ति के आगे कोई भी इंसानी कला या हुनर टिक नहीं सकता। फ़िरऔन ने जितने भी माहिर जादूगर इकट्ठे किए, वे सब मूसा (अलैहिस्सलाम) के चमत्कार के सामने झुक गए और ईमान ले आए।
  3. हमें यह भी सबक मिलता है कि इंसान को अपनी ताकत, हुनर या साधनों पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की कुदरत (शक्ति) सबसे बड़ी है और वही सब कुछ कर सकता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि जब हम सत्य के पक्ष में हों, तो हमें किसी भी विरोधी की ताकत से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने सच्चे बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है।


📜 आयत 110-114 — अल-आराफ

110يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُمْ ۖ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ
ये चाहता है कि तुम्हें तुम्हारें मुल्क से निकाल बाहर कर दे तो अब तुम लोग उसके बारे में क्या सलाह देते हो
111قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَأَرْسِلْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
(आख़िर) सबने मुत्तफिक़ अलफाज़ (एक ज़बान होकर) कहा कि (ऐ फिरऔन) उनको और उनके भाई (हारून) को चन्द दिन कैद में रखिए और (एतराफ़ के) शहरों में हरकारों को भेजिए
112يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ
कि तमाम बड़े बड़े जादूगरों का जमा करके अपके पास दरबार में हाज़िर करें
113وَجَاءَ السَّحَرَةُ فِرْعَوْنَ قَالُوا إِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِن كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ
ग़रज़ जादूगर सब फिरऔन के पास हाज़िर होकर कहने लगे कि अगर हम (मूसा से) जीत जाएं तो हमको बड़ा भारी इनाम ज़रुर मिलना चाहिए
114قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ لَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ
फिरऔन ने कहा (हॉ इनाम ही नहीं) बल्कि फिर तो तुम हमारे दरबार के मुक़र्रेबीन में से होगें
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अनुवाद — अल-आराफ 112

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Tuesday, August 18, 2026

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