अल-आराफ · 62/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنصَحُ لَكُمْ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ ۝٦٢
Uballighukum Risaalaati Rabbee wa ansahu lakum wa a`lamu minal laahi maa laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तुम तक अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुचाएं देता हूँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी ख़ैर ख्वाही करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُبَلِّغُكُمْ – मैं तुम्हें पहुँचाता हूँ।
  • رِسَالَاتِ رَبِّي – मेरे पालनहार के संदेश (जो उसने मुझ पर प्रकट किए हैं)।
  • وَأَنصَحُ لَكُمْ – और मैं तुम्हारा हितैषी हूँ, तुम्हारी भलाई चाहता हूँ।
  • وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ – और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत नूह अलैहिस्सलाम के उस कथन का हिस्सा है जो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा था जब उन्होंने उन्हें झुठलाया और उन पर आरोप लगाए। नूह अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि मेरा काम केवल यह है कि मैं अल्लाह की ओर से भेजे गए संदेशों को तुम तक पूरी ईमानदारी और अमानत के साथ पहुँचाऊँ। मैं कोई ऐसी चीज़ नहीं लेकर आया जो मेरी अपनी ओर से हो; बल्कि यह मेरे रब का पैग़ाम है, जो मुझ पर वह्य (प्रकाशना) के माध्यम से उतरा है। मैं तुम्हें सचेत करता हूँ कि अल्लाह की अवज्ञा का परिणाम भयानक है, और मैं तुम्हें शुभ सूचना देता हूँ कि उसकी आज्ञा का पालन करने पर उसकी ओर से बड़ा प्रतिफल और क्षमा मिलेगी।

मैं तुम्हारा सच्चा हितैषी हूँ – मैं तुम्हारे लिए वही चाहता हूँ जो अपने लिए चाहता हूँ, अर्थात तुम्हारी भलाई और सफलता। मैं तुम्हें उस रास्ते की ओर बुलाता हूँ जिसमें तुम्हारी दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है। और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते – अर्थात मुझे वह्य के माध्यम से उस ज्ञान का कुछ हिस्सा दिया गया है जो तुम्हारी समझ और अनुभव से परे है। मैं जानता हूँ कि अल्लाह का अज़ाब (दंड) उन लोगों से नहीं टलता जो अपराधी और ज़ालिम हैं, और यही वह बात है जिसके बारे में तुम्हें कोई जानकारी नहीं है।

यह आयत हमें सिखाती है कि दावत (आमंत्रण) का तरीक़ा यही है – स्पष्टता, ईमानदारी, नसीहत (सदुपदेश) और ज्ञान। दावत देने वाले को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। यह हमें यह भी सिखाता है कि नसीहत और हितैषिता का अर्थ है दूसरों के लिए वही भलाई चाहना जो अपने लिए चाहते हैं। और सबसे बड़ी बात यह कि अल्लाह के नबी और उसके सच्चे बंदे वही जानते हैं जो अल्लाह उन्हें सिखाता है, और यह ज्ञान उन्हें दूसरों की भलाई के लिए उपयोग करते हैं।

इस आयत में हमारे लिए एक महान शिक्षा है कि हमें अपने जीवन में सत्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए, चाहे लोग हमें झुठलाएँ या हमारा मज़ाक उड़ाएँ। नूह अलैहिस्सलाम ने 950 वर्षों तक अपनी क़ौम को बुलाया और धैर्य नहीं खोया। यह हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहना और अल्लाह पर भरोसा रखना ही सफलता की कुंजी है। अल्लाह हमें सच्चे मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 60-64 — अल-आराफ

60قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ إِنَّا لَنَرَاكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो
61قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي ضَلَالَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में गुमराही (वग़ैरह) तो कुछ नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगारे आलम की तरफ से रसूल हूँ
62أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنصَحُ لَكُمْ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
तुम तक अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुचाएं देता हूँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी ख़ैर ख्वाही करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते
63أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُوا وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
क्या तुम्हें उस बात पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे पास तुम्ही में से एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से तुम्हारे परवरदिगार का ज़िक्र (हुक्म) आया है ताकि वह तुम्हें (अज़ाब से) डराए और ताकि तुम परहेज़गार बनों और ताकि तुम पर रहम किया जाए
64فَكَذَّبُوهُ فَأَنجَيْنَاهُ وَالَّذِينَ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ وَأَغْرَقْنَا الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا عَمِينَ
इस पर भी लोगों ने उनकों झुठला दिया तब हमने उनको और जो लोग उनके साथ कश्ती में थे बचा लिया और बाक़ी जितने लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था सबको डुबो मारा ये सब के सब यक़ीनन अन्धे लोग थे
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
62आयत

अनुवाद — अल-आराफ 62

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Tuesday, August 18, 2026

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