Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُبَلِّغُكُمْ – मैं तुम्हें पहुँचाता हूँ।
- رِسَالَاتِ رَبِّي – मेरे पालनहार के संदेश (जो उसने मुझ पर प्रकट किए हैं)।
- وَأَنصَحُ لَكُمْ – और मैं तुम्हारा हितैषी हूँ, तुम्हारी भलाई चाहता हूँ।
- وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ – और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत नूह अलैहिस्सलाम के उस कथन का हिस्सा है जो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा था जब उन्होंने उन्हें झुठलाया और उन पर आरोप लगाए। नूह अलैहिस्सलाम अपनी क़ौम को स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि मेरा काम केवल यह है कि मैं अल्लाह की ओर से भेजे गए संदेशों को तुम तक पूरी ईमानदारी और अमानत के साथ पहुँचाऊँ। मैं कोई ऐसी चीज़ नहीं लेकर आया जो मेरी अपनी ओर से हो; बल्कि यह मेरे रब का पैग़ाम है, जो मुझ पर वह्य (प्रकाशना) के माध्यम से उतरा है। मैं तुम्हें सचेत करता हूँ कि अल्लाह की अवज्ञा का परिणाम भयानक है, और मैं तुम्हें शुभ सूचना देता हूँ कि उसकी आज्ञा का पालन करने पर उसकी ओर से बड़ा प्रतिफल और क्षमा मिलेगी।
मैं तुम्हारा सच्चा हितैषी हूँ – मैं तुम्हारे लिए वही चाहता हूँ जो अपने लिए चाहता हूँ, अर्थात तुम्हारी भलाई और सफलता। मैं तुम्हें उस रास्ते की ओर बुलाता हूँ जिसमें तुम्हारी दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई है। और मैं अल्लाह की ओर से वह कुछ जानता हूँ जो तुम नहीं जानते – अर्थात मुझे वह्य के माध्यम से उस ज्ञान का कुछ हिस्सा दिया गया है जो तुम्हारी समझ और अनुभव से परे है। मैं जानता हूँ कि अल्लाह का अज़ाब (दंड) उन लोगों से नहीं टलता जो अपराधी और ज़ालिम हैं, और यही वह बात है जिसके बारे में तुम्हें कोई जानकारी नहीं है।
यह आयत हमें सिखाती है कि दावत (आमंत्रण) का तरीक़ा यही है – स्पष्टता, ईमानदारी, नसीहत (सदुपदेश) और ज्ञान। दावत देने वाले को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए और परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। यह हमें यह भी सिखाता है कि नसीहत और हितैषिता का अर्थ है दूसरों के लिए वही भलाई चाहना जो अपने लिए चाहते हैं। और सबसे बड़ी बात यह कि अल्लाह के नबी और उसके सच्चे बंदे वही जानते हैं जो अल्लाह उन्हें सिखाता है, और यह ज्ञान उन्हें दूसरों की भलाई के लिए उपयोग करते हैं।
इस आयत में हमारे लिए एक महान शिक्षा है कि हमें अपने जीवन में सत्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए, चाहे लोग हमें झुठलाएँ या हमारा मज़ाक उड़ाएँ। नूह अलैहिस्सलाम ने 950 वर्षों तक अपनी क़ौम को बुलाया और धैर्य नहीं खोया। यह हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर दृढ़ रहना और अल्लाह पर भरोसा रखना ही सफलता की कुंजी है। अल्लाह हमें सच्चे मार्ग पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 60-64 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 62
सूरा अल-आराफ आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम तक अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुचाएं देता हूँ और…सूरा आयत 62/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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