Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضَلَالَةٌ: गुमराही, पथभ्रष्टता, सत्य से भटक जाना।
- رَسُولٌ: संदेशवाहक, पैग़म्बर, जिसे अल्लाह ने अपनी ओर से भेजा हो।
- رَبِّ الْعَالَمِينَ: सारे संसारों का पालनहार, सृष्टि के सभी प्राणियों का रब।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के सरदारों और बड़े लोगों ने उन्हें झूठा और गुमराह कहा, तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने बड़े ही नम्र और स्पष्ट अंदाज़ में उन्हें जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझमें कोई गुमराही नहीं है, न मैं किसी प्रकार की पथभ्रष्टता पर हूँ और न ही मेरी बातों में कोई कमी या भटकाव है। मैं पूर्ण रूप से सत्य और हिदायत पर हूँ। बल्कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ, जो सारे जहानों के पालनहार की ओर से तुम्हारे पास आया हूँ। मैं अपनी तरफ़ से कुछ नहीं कहता, बल्कि जो आदेश मुझे मेरे रब ने दिया है, वही मैं तुम्हें सुना रहा हूँ।"
नूह (अलैहिस्सलाम) का यह उत्तर बताता है कि उन्होंने अपनी बेगुनाही का ऐलान किया और साथ ही अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) का दावा भी किया। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका मक़सद सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना है, न कि कोई दुनियावी मतलब या झूठी बात। उन्होंने अपनी बात को इस तरह पेश किया कि उनकी दावत अल्लाह की तरफ़ से है, इसलिए इसे क़बूल करना ही उनकी भलाई है।
फ़ायदे (सबक़):
- सच्चे दावत देने वाले को अपने विरोधियों के आरोपों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्पष्टता और नम्रता से अपनी बात रखनी चाहिए।
- नूह (अलैहिस्सलाम) की यह आदत हमें सिखाती है कि जब हम पर कोई झूठा इल्ज़ाम लगे, तो हमें अपनी सफ़ाई पेश करनी चाहिए और अपने काम को अल्लाह की रज़ा से जोड़ना चाहिए।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रसूल हमेशा सच्चाई और हिदायत पर होते हैं, और उनकी दावत सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से होती है, इसलिए उनकी बात मानना ही सफलता की कुंजी है।
- इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई को अपनाना चाहिए और किसी भी हालत में गुमराही से बचना चाहिए, क्योंकि गुमराही इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है।
📜 आयत 59-63 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 61
सूरा अल-आराफ आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में…सूरा आयत 61/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 59–63. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


