अल-आराफ · 61/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي ضَلَالَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ ۝٦١
Qaala yaa qawmi laisa bee dalaalatunw wa laakinnee Rasoolum mir Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में गुमराही (वग़ैरह) तो कुछ नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगारे आलम की तरफ से रसूल हूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلَالَةٌ: गुमराही, पथभ्रष्टता, सत्य से भटक जाना।
  • رَسُولٌ: संदेशवाहक, पैग़म्बर, जिसे अल्लाह ने अपनी ओर से भेजा हो।
  • رَبِّ الْعَالَمِينَ: सारे संसारों का पालनहार, सृष्टि के सभी प्राणियों का रब।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के सरदारों और बड़े लोगों ने उन्हें झूठा और गुमराह कहा, तो नूह (अलैहिस्सलाम) ने बड़े ही नम्र और स्पष्ट अंदाज़ में उन्हें जवाब दिया। उन्होंने कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मुझमें कोई गुमराही नहीं है, न मैं किसी प्रकार की पथभ्रष्टता पर हूँ और न ही मेरी बातों में कोई कमी या भटकाव है। मैं पूर्ण रूप से सत्य और हिदायत पर हूँ। बल्कि मैं अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ, जो सारे जहानों के पालनहार की ओर से तुम्हारे पास आया हूँ। मैं अपनी तरफ़ से कुछ नहीं कहता, बल्कि जो आदेश मुझे मेरे रब ने दिया है, वही मैं तुम्हें सुना रहा हूँ।"

नूह (अलैहिस्सलाम) का यह उत्तर बताता है कि उन्होंने अपनी बेगुनाही का ऐलान किया और साथ ही अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) का दावा भी किया। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका मक़सद सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना है, न कि कोई दुनियावी मतलब या झूठी बात। उन्होंने अपनी बात को इस तरह पेश किया कि उनकी दावत अल्लाह की तरफ़ से है, इसलिए इसे क़बूल करना ही उनकी भलाई है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. सच्चे दावत देने वाले को अपने विरोधियों के आरोपों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्पष्टता और नम्रता से अपनी बात रखनी चाहिए।
  2. नूह (अलैहिस्सलाम) की यह आदत हमें सिखाती है कि जब हम पर कोई झूठा इल्ज़ाम लगे, तो हमें अपनी सफ़ाई पेश करनी चाहिए और अपने काम को अल्लाह की रज़ा से जोड़ना चाहिए।
  3. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रसूल हमेशा सच्चाई और हिदायत पर होते हैं, और उनकी दावत सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से होती है, इसलिए उनकी बात मानना ही सफलता की कुंजी है।
  4. इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई को अपनाना चाहिए और किसी भी हालत में गुमराही से बचना चाहिए, क्योंकि गुमराही इंसान को अल्लाह से दूर कर देती है।
🎧 सुनें

📜 आयत 59-63 — अल-आराफ

59لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
60قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ إِنَّا لَنَرَاكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो
61قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي ضَلَالَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में गुमराही (वग़ैरह) तो कुछ नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगारे आलम की तरफ से रसूल हूँ
62أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنصَحُ لَكُمْ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
तुम तक अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुचाएं देता हूँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी ख़ैर ख्वाही करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते
63أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ وَلِتَتَّقُوا وَلَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
क्या तुम्हें उस बात पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे पास तुम्ही में से एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से तुम्हारे परवरदिगार का ज़िक्र (हुक्म) आया है ताकि वह तुम्हें (अज़ाब से) डराए और ताकि तुम परहेज़गार बनों और ताकि तुम पर रहम किया जाए
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अनुवाद — अल-आराफ 61

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Tuesday, August 18, 2026

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