अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذِكْرٌ: नसीहत, वह वचन जो याद दिलाए।
- عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ: तुम्हारे ही एक आदमी (नबी) के ज़रिए।
- لِيُنذِرَكُمْ: ताकि वह तुम्हें (अल्लाह के अज़ाब से) डराए।
- وَلِتَتَّقُوا: और ताकि तुम (अल्लाह से) डरो (तक़्वा अपनाओ)।
- تُرْحَمُونَ: तुम पर रहम किया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या तुम्हें इस बात पर अचरज हुआ कि तुम्हारे रब की तरफ से तुम्हारे पास नसीहत और याद दिलाने वाली चीज़ (क़ुरआन) तुम्हारे ही एक आदमी के ज़रिए आई, जिसकी नस्ल, सच्चाई और अमानतदारी को तुम ख़ुद जानते हो? वह कोई अजनबी या दूसरी क़ौम का नहीं, बल्कि तुम्हीं में से उठा है। उसका मक़सद यह है कि वह तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराए, अगर तुम कुफ़्र और नाफ़रमानी पर डटे रहे। साथ ही वह तुम्हें तक़्वा (परहेज़गारी) की तरफ बुलाए—यानी अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करो और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचो—ताकि तुम पर रहम किया जाए। यह रहम दुनिया में हिदायत की शक्ल में और आख़िरत में जन्नत की शक्ल में मिलेगा। यह कोई अजीब बात नहीं कि अल्लाह किसी इंसान को अपना पैग़ाम देने के लिए चुने, बल्कि यह अल्लाह की रहमत है कि उसने तुम्हारे बीच से ही एक सच्चा और भरोसेमंद रसूल भेजा, ताकि तुम्हारे लिए समझना आसान हो और हुज्जत क़ायम हो जाए।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा है कि वह हर क़ौम में उन्हीं की ज़बान और उन्हीं के माहौल से रसूल भेजे, ताकि लोग आसानी से समझ सकें। यह अल्लाह का इंसाफ़ और मेहरबानी है।
- नबी का इंसान होना कोई ऐब नहीं, बल्कि रहमत है—क्योंकि लोग उनसे सीधे सीख सकते हैं, उनकी ज़िंदगी को देख सकते हैं और उन पर ईमान ला सकते हैं।
- नसीहत और डराने (तरहीब) का मक़सद लोगों को अल्लाह की तरफ लाना है, न कि उन्हें निराश करना। डर के साथ उम्मीद भी है—"ताकि तुम पर रहम किया जाए"।
- तक़्वा (अल्लाह से डरना) ही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की रहमत तक पहुँचाता है। जो जितना परहेज़गार, उतना ही अल्लाह के करीब।
- अचरज और हैरत में पड़ने के बजाय, इंसान को चाहिए कि जब सच्चाई उसके सामने आए तो उसे क़बूल करे। नबी की सच्चाई और अमानत उनकी सबसे बड़ी दलील है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दूसरों को भलाई की तरफ बुलाते वक़्त नरमी, हिकमत और उनकी समझ के अनुसार बात करनी चाहिए, और साथ ही उन्हें अल्लाह की रहमत की उम्मीद भी दिलानी चाहिए।
📜 आयत 61-65 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 63
सूरा अल-आराफ आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तुम्हें उस बात पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे पास…सूरा आयत 63/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 61–65. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, August 19, 2026
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