अल-आराफ · 69/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ ۚ وَاذْكُرُوا إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَاءَ مِن بَعْدِ قَوْمِ نُوحٍ وَزَادَكُمْ فِي الْخَلْقِ بَسْطَةً ۖ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۝٦٩
awa `ajibtum an jaaa`akum zikrum mir Rabbikum `alaa rajulim minkum liyunzirakum; wazkurooo iz ja`alakum khulafaaa`a mim ba`di qawmi noohinw wa zaadakum filkhalqi bastatan fazkurooo aalaaa`al laahi la`allakum tuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذِكْرٌ – नसीहत, याद दिलाने वाली वाणी, कुरआन।
  • خُلَفَاءَ – उत्तराधिकारी, पृथ्वी में पिछले लोगों की जगह बसाने वाले।
  • بَسْطَةً – अधिकता, कुशाग्रता, शारीरिक शक्ति और विशालता।
  • آلَاءَ – नेमतें, उपकार, अनगिनत अहसान।

तफसीर (व्याख्या):

क्या तुम्हें इस बात पर अचरज हुआ कि तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक ऐसे इंसान के ज़रिए नसीहत आई जो तुम्हीं में से है, जिसकी सच्चाई और वंश को तुम जानते हो? वह तुम्हें अल्लाह के अज़ाब से डराने और उसकी राह दिखाने के लिए आया है। यह कोई अजीब बात नहीं कि अल्लाह किसी इंसान को अपना पैग़ाम देकर भेजे।

फिर अल्लाह ने उन्हें अपनी नेमतें याद दिलाईं: "याद करो जब अल्लाह ने तुम्हें नूह की क़ौम के बाद पृथ्वी का उत्तराधिकारी बनाया, और तुम्हारे शरीरों को क़ुव्वत, लंबाई और ताक़त में बढ़ोतरी दी।" यानी उसने तुम्हें पिछली उम्मतों के मुक़ाबले ज़्यादा ताक़तवर और विशाल कद वाला बनाया।

इसलिए अल्लाह की इन नेमतों को याद करो, उसका शुक्र अदा करो और उसकी इबादत में लगे रहो, ताकि तुम दुनिया और आख़िरत में कामयाबी हासिल कर सको। यह नेमतें सिर्फ़ शारीरिक नहीं, बल्कि दीनी और दुनियावी भी हैं — जैसे रिसालत का सम्मान, अक़्ल, समझ और सच्चे दीन की तरफ़ दिशा-निर्देश।

फ़ायदे (सबक़):

  1. नबी का इंसानों में से होना अल्लाह की बड़ी रहमत है, क्योंकि इससे लोग आसानी से उनसे सीख सकते हैं और उनकी ज़िंदगी को अपने लिए नमूना बना सकते हैं।
  2. अल्लाह की नेमतों को याद करना और उन पर शुक्र करना ईमान की निशानी है और यह इंसान को अल्लाह के और करीब लाता है।
  3. जब अल्लाह किसी क़ौम को ताक़त और सामर्थ्य देता है, तो यह उसकी परीक्षा होती है — कि वे उसका शुक्र करते हैं या सरकशी।
  4. कामयाबी (फ़लाह) का रास्ता अल्लाह की नेमतों की क़द्र करने और उसके हुक्मों पर चलने में है, न कि सिर्फ़ दुनियावी ताक़त में।
  5. अल्लाह की पिछली उम्मतों की तबाही से सबक़ लेना चाहिए, ताकि हम वही ग़लतियाँ न दोहराएँ जिनके कारण वे हलाक हुए।


📜 आयत 67-71 — अल-आराफ

67قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي سَفَاهَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
हूद ने कहा ऐ मेरी क़ौम मुझमें में तो हिमाक़त की कोई बात नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगार आलम का रसूल हूँ
68أُبَلِّغُكُمْ رِسَالَاتِ رَبِّي وَأَنَا لَكُمْ نَاصِحٌ أَمِينٌ
मैं तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार के पैग़ामात पहँचाए देता हूँ और मैं तुम्हारा सच्चा ख़ैरख्वाह हूँ
69أَوَعَجِبْتُمْ أَن جَاءَكُمْ ذِكْرٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَلَىٰ رَجُلٍ مِّنكُمْ لِيُنذِرَكُمْ ۚ وَاذْكُرُوا إِذْ جَعَلَكُمْ خُلَفَاءَ مِن بَعْدِ قَوْمِ نُوحٍ وَزَادَكُمْ فِي الْخَلْقِ بَسْطَةً ۖ فَاذْكُرُوا آلَاءَ اللَّهِ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
क्या तुम्हें इस पर ताअज्जुब है कि तुम्हारे परवरदिगार का हुक्म तुम्हारे पास तुम्ही में एक मर्द (आदमी) के ज़रिए से (आया) कि तुम्हें (अजाब से) डराए और (वह वक्त) याद करो जब उसने तुमको क़ौम नूह के बाद ख़लीफा (व जानशीन) बनाया और तुम्हारी ख़िलाफ़त में भी बहुत ज्यादती कर दी तो ख़ुदा की नेअमतों को याद करो ताकि तुम दिली मुरादे पाओ
70قَالُوا أَجِئْتَنَا لِنَعْبُدَ اللَّهَ وَحْدَهُ وَنَذَرَ مَا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُنَا ۖ فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَا إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमारे पास इसलिए आए हो कि सिर्फ ख़ुदा की तो इबादत करें और जिनको हमारे बाप दादा पूजते चले आए छोड़ बैठें पस अगर तुम सच्चे हो तो जिससे तुम हमको डराते हो हमारे पास लाओ
71قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجَادِلُونَنِي فِي أَسْمَاءٍ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا نَزَّلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ فَانتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُنتَظِرِينَ
हूद ने जवाब दिया (कि बस समझ लो) कि तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर अज़ाब और ग़ज़ब नाज़िल हो चुका क्या तुम मुझसे चन्द (बुतो के फर्ज़ी) नामों के बारे में झगड़ते हो जिनको तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने (ख्वाहमख्वाह) गढ़ लिए हैं हालाकि ख़ुदा ने उनके लिए कोई सनद नहीं नाज़िल की पस तुम ( अज़ाबे ख़ुदा का) इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ मुन्तिज़र हूँ
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अनुवाद — अल-आराफ 69

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Tuesday, August 18, 2026

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