अल-मआरिज · 3/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
مِّنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ ۝٣
Minal laahi zil ma`aarij
📖 हिंदी अर्थ
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذِي الْمَعَارِجِ: "मआरिज" का अर्थ है सीढ़ियाँ, ऊँचाइयाँ, या चढ़ने के मार्ग। यहाँ अल्लाह की बुलंदी, ऊँचाई और उसके दरजात (स्तरों) की ओर इशारा है, जहाँ फ़रिश्ते चढ़ते हैं। यह अल्लाह की अज़मत और उसकी बरकतों (नियामतों) को दर्शाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस अज़ाब (यातना) के बारे में बताती है जो मुनकिरों (इनकार करने वालों) पर नाज़िल होगा। यह अज़ाब अल्लाह की तरफ़ से है, जो ذِي الْمَعَارِجِ है—यानी वह अल्लाह जो सबसे ऊँचा, सबसे बुलंद और सबसे महान है। उसके दरजात बेहद ऊँचे हैं, और उसकी कुदरत (शक्ति) हर चीज़ पर हावी है। यह अज़ाब उस अल्लाह की तरफ़ से आएगा जिसके पास फ़रिश्ते और जिब्रील (अलैहिस्सलाम) चढ़ते हैं—यानी वह अपनी मख़लूक़ात (सृष्टि) से बिल्कुल अलग और उनकी समझ से परे है। यहाँ "मआरिज" का ज़िक्र इसलिए किया गया ताकि लोगों को अल्लाह की अज़मत का एहसास हो कि वह कितना बड़ा और ऊँचा है, और उसका अज़ाब कितना भयानक होगा जिसे कोई टाल नहीं सकता। साथ ही, यह अल्लाह की रहमत और फ़ज़ल (कृपा) की ओर भी इशारा है, क्योंकि वह अपने बंदों पर नेमतें (अनुग्रह) उतारता है और उन्हें ऊँचे दरजात देता है।

दावती पहलू (प्रचारात्मक दृष्टिकोण):

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह ذِي الْمَعَارِجِ है—यानी वह सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा है—तो हमें उसके सामने झुकना चाहिए, उसकी इबादत (पूजा) करनी चाहिए और उसके हुक्मों (आदेशों) को मानना चाहिए। यह हमें डराता भी है कि उसका अज़ाब कितना सख्त है, और उम्मीद भी देता है कि उसकी रहमत कितनी वसी (व्यापक) है। अगर हम उसकी तरफ़ रुजू (रुख) करें, तो वह हमें बुलंद दरजात देगा—दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत। यही असली कामयाबी है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-मआरिज

1سَأَلَ سَائِلٌ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ
एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा
2لِّلْكَافِرِينَ لَيْسَ لَهُ دَافِعٌ
जिसको कोई टाल नहीं सकता
3مِّنَ اللَّهِ ذِي الْمَعَارِجِ
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था
4تَعْرُجُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ
जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये) एक दिन में इतनी मुसाफ़त तय करते हैं जिसका अन्दाज़ा पचास हज़ार बरस का होगा
5فَاصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا
तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 3

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Wednesday, September 30, 2026

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