अल-क़ियामा · 12/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمُسْتَقَرُّ ۝١٢
Ilaa rabbika yawma `izinil mustaqarr
📖 हिंदी अर्थ
उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • المُسْتَقَرّ: अर्थात अंतिम ठिकाना, लौटने की जगह, ठहरने का स्थान।

व्याख्या:

हे नबी! उस दिन (क़ियामत के दिन) सारे प्राणियों का अंतिम ठिकाना और लौटने की जगह केवल तुम्हारे रब की तरफ ही होगी। उस दिन कोई भी इंसान कहीं भागकर या छिपकर अपने आपको बचा नहीं सकता। न कोई पहाड़ की ओट ले सकता है, न कोई दूसरी जगह शरण ले सकता है। जैसा कि इंसान अपनी ग़लतफ़हमी में सोचता है कि वह भाग जाएगा या उसे छोड़ दिया जाएगा, ऐसा हरगिज़ नहीं होगा।

उस दिन सारे इंसान, चाहे वे पहले आए हों या बाद में, सभी को अपने-अपने रब के सामने हाज़िर होना है। यही उनका अंतिम पड़ाव है। वहाँ हर एक से उसके अमलों का हिसाब लिया जाएगा। जिसने अच्छे कर्म किए होंगे, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुरे कर्म किए होंगे, उसे बुरा बदला मिलेगा। यह ठहरने की जगह कोई माया या धोखा नहीं है, बल्कि यह सच्चाई है जो उस दिन सामने आ जाएगी।

याद रखिए! यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है और यहाँ का ठिकाना अस्थायी है। असली और हमेशा रहने वाला ठिकाना आख़िरत का जीवन है। जो इंसान इस दुनिया में अपने रब की इबादत करता है और उसके हुक्मों पर चलता है, उसके लिए उस दिन बड़ी खुशखबरी है। वह अपने रब की रहमत और जन्नत में हमेशा के लिए ठहरेगा। और जो इंसान अपने रब से ग़ाफ़िल रहा और उसके हुक्मों की परवाह नहीं की, उसके लिए उस दिन बड़ा अफ़सोस और पछतावा होगा।

तो आओ, हम सब इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि हमें एक दिन अपने रब के सामने जाना है। यह जीवन एक इम्तिहान है। जो इसमें अच्छे अमल करेगा, वह कामयाब होगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है। उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, अपने गुनाहों से तौबा कर लें और उसकी राह पर चलें। उस दिन किसी को मौका नहीं मिलेगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ लौट आएं, क्योंकि उसी की तरफ हमें लौटकर जाना है।



📜 आयत 10-14 — सूरा अल-क़ियामा

10يَقُولُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ أَيْنَ الْمَفَرُّ
तो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ
11كَلَّا لَا وَزَرَ
यक़ीन जानों कहीं पनाह नहीं
12إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ الْمُسْتَقَرُّ
उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है
13يُنَبَّأُ الْإِنسَانُ يَوْمَئِذٍ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ
उस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा
14بَلِ الْإِنسَانُ عَلَىٰ نَفْسِهِ بَصِيرَةٌ
बल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है
अल-क़ियामाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 12

सूरा अल-क़ियामा आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है

सूरा आयत 12/40 — सूरा अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़ियामा सुनें, सूरा अल-क़ियामा अनुवाद, सूरा अल-क़ियामा mp3, सूरा अल-क़ियामा pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए