अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- المُسْتَقَرّ: अर्थात अंतिम ठिकाना, लौटने की जगह, ठहरने का स्थान।
व्याख्या:
हे नबी! उस दिन (क़ियामत के दिन) सारे प्राणियों का अंतिम ठिकाना और लौटने की जगह केवल तुम्हारे रब की तरफ ही होगी। उस दिन कोई भी इंसान कहीं भागकर या छिपकर अपने आपको बचा नहीं सकता। न कोई पहाड़ की ओट ले सकता है, न कोई दूसरी जगह शरण ले सकता है। जैसा कि इंसान अपनी ग़लतफ़हमी में सोचता है कि वह भाग जाएगा या उसे छोड़ दिया जाएगा, ऐसा हरगिज़ नहीं होगा।
उस दिन सारे इंसान, चाहे वे पहले आए हों या बाद में, सभी को अपने-अपने रब के सामने हाज़िर होना है। यही उनका अंतिम पड़ाव है। वहाँ हर एक से उसके अमलों का हिसाब लिया जाएगा। जिसने अच्छे कर्म किए होंगे, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुरे कर्म किए होंगे, उसे बुरा बदला मिलेगा। यह ठहरने की जगह कोई माया या धोखा नहीं है, बल्कि यह सच्चाई है जो उस दिन सामने आ जाएगी।
याद रखिए! यह दुनिया का जीवन बहुत छोटा है और यहाँ का ठिकाना अस्थायी है। असली और हमेशा रहने वाला ठिकाना आख़िरत का जीवन है। जो इंसान इस दुनिया में अपने रब की इबादत करता है और उसके हुक्मों पर चलता है, उसके लिए उस दिन बड़ी खुशखबरी है। वह अपने रब की रहमत और जन्नत में हमेशा के लिए ठहरेगा। और जो इंसान अपने रब से ग़ाफ़िल रहा और उसके हुक्मों की परवाह नहीं की, उसके लिए उस दिन बड़ा अफ़सोस और पछतावा होगा।
तो आओ, हम सब इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि हमें एक दिन अपने रब के सामने जाना है। यह जीवन एक इम्तिहान है। जो इसमें अच्छे अमल करेगा, वह कामयाब होगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है। उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, अपने गुनाहों से तौबा कर लें और उसकी राह पर चलें। उस दिन किसी को मौका नहीं मिलेगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ लौट आएं, क्योंकि उसी की तरफ हमें लौटकर जाना है।
📜 आयत 10-14 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 12
सूरा अल-क़ियामा आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना हैसूरा आयत 12/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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