अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- कल्ला (كَلَّا): हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है — यह डाँट और रोकने के लिए आया है।
- वज़र (وَزَر): पहाड़ की चोटी, शरण स्थल, बचाव का ठिकाना, वह जगह जहाँ इंसान छिपकर सुरक्षित हो सके।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उस इंसान की उस उम्मीद और ख़्वाहिश का जवाब दे रहा है जो क़ियामत के दिन भागने की सोचेगा। वह दिन ऐसा होगा कि हर इंसान अपने भाई से, अपनी माँ-बाप से, अपनी औलाद से भागना चाहेगा — लेकिन अल्लाह फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं! उस दिन कोई पनाहगाह नहीं, कोई बचाव का ठिकाना नहीं, कोई पहाड़ की चोटी नहीं जिस पर चढ़कर इंसान अपने आपको बचा सके।"
यानी उस दिन हर तरफ़ से इंसान घिर जाएगा। न कोई दीवार उसे बचाएगी, न कोई पहाड़ उसे छिपाएगा, न कोई रिश्तेदार उसके काम आएगा। दौलत, औलाद, ताक़त — सब कुछ बेकार हो जाएगा। यह एक सख़्त चेतावनी है कि आज जो इंसान गुनाहों में मग़रूर है और समझता है कि उसे कोई पकड़ नहीं सकता, उस दिन वह समझ जाएगा कि वह कितना बेबस और लाचार है।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बताती है कि इस दुनिया में हमारे पास जो भी सहारे हैं — धन, दौलत, रुतबा, रिश्ते — ये सब उस दिन किसी काम नहीं आएँगे। असल में सिर्फ़ अल्लाह ही पनाह देने वाला है। जो इंसान आज अल्लाह की राह पर चलता है, उसके लिए अल्लाह ख़ुद पनाह बनता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी। लेकिन जो अल्लाह से मुँह मोड़ता है, उसके लिए उस दिन कोई पनाह नहीं होगी।
तो आओ, हम आज ही अपने जीवन को सँवार लें, अल्लाह की इबादत को अपनी ढाल बना लें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए अभी से तैयारी कर लें। क्योंकि जिस दिन कोई पनाह नहीं होगी, उस दिन सिर्फ़ अल्लाह की रहमत ही हमारी पनाह बनेगी।
📜 आयत 9-13 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 11
सूरा अल-क़ियामा आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यक़ीन जानों कहीं पनाह नहींसूरा आयत 11/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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