अल-क़ियामा · 17/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ ۝١٧
Inna `alainaa jam`ahoo wa qur aanah
📖 हिंदी अर्थ
उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَمْعَهُ: इसका अर्थ है उसे (कुरआन) आपके सीने में एकत्रित करना।
  • وَقُرْآنَهُ: इसका अर्थ है उसे आपकी ज़बान पर पढ़ाना और जारी करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि ऐ नबी! जब जिब्रील अमीन वह़ी लेकर आते हैं, तो आप जल्दबाज़ी में उसे याद करने के लिए अपनी ज़बान को हिलाने की कोशिश न करें। यह आपका काम नहीं है, बल्कि अल्लाह ने खुद इसकी ज़िम्मेदारी ली है। अल्लाह फ़रमाता है: "निस्संदेह उसे (आपके सीने में) एकत्रित करना और उसे (आपकी ज़बान पर) पढ़ाना हमारा ज़िम्मा है।"

यानी अल्लाह तआला ने दो वादे किए हैं: पहला, कुरआन को आपके सीने में महफ़ूज़ करना, ताकि आप उसे कभी न भूलें। दूसरा, उसे आपकी ज़बान पर जारी करना, ताकि आप जब चाहें उसे पढ़ सकें। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने नबी पर यह बोझ नहीं डाला कि वह खुद कुरआन को याद करने की कोशिश करें, बल्कि अल्लाह ने खुद इसे अपने ज़िम्मे ले लिया।

जब जिब्रील अमीन वह़ी लेकर आएं, तो आप चुपचाप उनकी क़िराअत सुनें और ध्यान से सुनें। फिर अल्लाह आपको उसे पढ़ाने की तौफ़ीक़ देगा। और इसके बाद अल्लाह ने यह भी वादा किया कि वह आपको कुरआन के मायने और अहकाम (आदेशों) की वज़ाहत करेगा, ताकि आप लोगों तक उसका पैग़ाम पहुंचा सकें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह पर भरोसा करना सिखाती है। जिस तरह अल्लाह ने अपने नबी के लिए कुरआन की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी ली, उसी तरह वह हर उस बंदे की मदद करता है जो उसके दीन की खिदमत के लिए कोशिश करता है। हमें भी चाहिए कि कुरआन को सीखने, याद करने और समझने में कोई कसर न छोड़ें, लेकिन साथ ही अल्लाह पर भरोसा रखें कि वह हमारी मदद करेगा। कुरआन अल्लाह की तरफ से एक अज़ीम नेमत है, और इसकी हिफ़ाज़त का वादा खुद अल्लाह ने किया है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा दीन और हमारी किताब महफ़ूज़ है, और हमें इस पर नाज़ है। आइए, हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें कुरआन की बरकतें अता फ़रमाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अल-क़ियामा

15وَلَوْ أَلْقَىٰ مَعَاذِيرَهُ
अगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे
16لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ
(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो
17إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ
उसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है
18فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ
तो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो
19ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ
फिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)
अल-क़ियामाकुरान सूची
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मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 17

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Tuesday, August 18, 2026

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