अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سُدًى: बेकार, व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के छोड़ दिया जाना, जिसे न कोई आदेश दिया जाए और न ही रोका जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
क्या यह इंसान, जो पुनरुत्थान (आख़िरत) को नहीं मानता, यह समझता है कि उसे यूँ ही बेकार और आज़ाद छोड़ दिया जाएगा? कि न उसे कोई आदेश दिया जाएगा, न किसी काम से रोका जाएगा, और न ही उससे कोई हिसाब लिया जाएगा? यह सोचना कितनी बड़ी भूल है!
ज़रा सोचो — क्या यह इंसान पहले एक कमज़ोर बूँद नहीं था, जो गिराए गए पानी (वीर्य) की तरह थी? फिर वह जमा हुआ खून (क्लॉट) बना, और फिर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उसे बनाया और उसका रूप सुंदर बनाया। उसी अल्लाह ने इसी इंसान से नर और मादा दोनों प्रकार बनाए। क्या वह अल्लाह, जिसने ये सब कुछ बनाया, मरने के बाद इंसानों को दोबारा जीवित करने पर क़ादिर नहीं है? हाँ, वह निश्चित रूप से इस पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।
यह आयत हमें बताती है कि यह जीवन कोई खेल या मज़ाक नहीं है। इंसान को इस दुनिया में एक उद्देश्य के साथ भेजा गया है — अल्लाह की इबादत करने और उसके आदेशों का पालन करने के लिए। जो कोई यह समझता है कि उसे बेफिक्र छोड़ दिया गया है, वह बड़ी भूल में है। अल्लाह हर इंसान से उसके अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब लेगा, और उसे उसके किए का पूरा बदला देगा।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी को गंभीरता से लेना चाहिए। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम आज़ाद हैं और हमसे कोई पूछताछ नहीं होगी। बल्कि हमें हर पल यह याद रखना चाहिए कि अल्लाह हमें देख रहा है और हमारे हर अच्छे काम का इनाम और हर बुरे काम की सज़ा मिलेगी। यही विश्वास हमें अच्छे कर्म करने और बुराइयों से बचने की ताक़त देता है। अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ पर भरोसा रखते हुए, हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालना चाहिए, ताकि आख़िरत में हम कामयाब हों।
📜 आयत 34-38 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 36
सूरा अल-क़ियामा आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़…सूरा आयत 36/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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