अल-क़ियामा · 36/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़ियामा
أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَن يُتْرَكَ سُدًى ۝٣٦
Ayahsabul insaanu anyytraka sudaa
📖 हिंदी अर्थ
क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُدًى: बेकार, व्यर्थ, बिना किसी उद्देश्य के छोड़ दिया जाना, जिसे न कोई आदेश दिया जाए और न ही रोका जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

क्या यह इंसान, जो पुनरुत्थान (आख़िरत) को नहीं मानता, यह समझता है कि उसे यूँ ही बेकार और आज़ाद छोड़ दिया जाएगा? कि न उसे कोई आदेश दिया जाएगा, न किसी काम से रोका जाएगा, और न ही उससे कोई हिसाब लिया जाएगा? यह सोचना कितनी बड़ी भूल है!

ज़रा सोचो — क्या यह इंसान पहले एक कमज़ोर बूँद नहीं था, जो गिराए गए पानी (वीर्य) की तरह थी? फिर वह जमा हुआ खून (क्लॉट) बना, और फिर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उसे बनाया और उसका रूप सुंदर बनाया। उसी अल्लाह ने इसी इंसान से नर और मादा दोनों प्रकार बनाए। क्या वह अल्लाह, जिसने ये सब कुछ बनाया, मरने के बाद इंसानों को दोबारा जीवित करने पर क़ादिर नहीं है? हाँ, वह निश्चित रूप से इस पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है।

यह आयत हमें बताती है कि यह जीवन कोई खेल या मज़ाक नहीं है। इंसान को इस दुनिया में एक उद्देश्य के साथ भेजा गया है — अल्लाह की इबादत करने और उसके आदेशों का पालन करने के लिए। जो कोई यह समझता है कि उसे बेफिक्र छोड़ दिया गया है, वह बड़ी भूल में है। अल्लाह हर इंसान से उसके अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब लेगा, और उसे उसके किए का पूरा बदला देगा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी को गंभीरता से लेना चाहिए। हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम आज़ाद हैं और हमसे कोई पूछताछ नहीं होगी। बल्कि हमें हर पल यह याद रखना चाहिए कि अल्लाह हमें देख रहा है और हमारे हर अच्छे काम का इनाम और हर बुरे काम की सज़ा मिलेगी। यही विश्वास हमें अच्छे कर्म करने और बुराइयों से बचने की ताक़त देता है। अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ पर भरोसा रखते हुए, हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालना चाहिए, ताकि आख़िरत में हम कामयाब हों।



📜 आयत 34-38 — सूरा अल-क़ियामा

34أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
अफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है
35ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
तुझ पर फिर तुफ़ है
36أَيَحْسَبُ الْإِنسَانُ أَن يُتْرَكَ سُدًى
क्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा
37أَلَمْ يَكُ نُطْفَةً مِّن مَّنِيٍّ يُمْنَىٰ
क्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है
38ثُمَّ كَانَ عَلَقَةً فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ
फिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया
अल-क़ियामाकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
36आयत

अनुवाद — अल-क़ियामा 36

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Wednesday, September 30, 2026

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