अन-नबा · 18/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नबा
يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا ۝١٨
Yauma yun fakhu fis-soori fataa toona afwaaja
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّور (सूर): यह वह नरसिंगा (सींग) है जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँकेंगे। यह क़यामत की घड़ी का ऐलान करने वाला पवित्र साधन है।
  • أَفْوَاجًا (अफ़वाजन): यह 'फ़ौज' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है समूह, गिरोह या जत्थे। यानी लोग अलग-अलग समूहों में आएँगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान दिन का वर्णन कर रही है जिसे 'यौमुल-फ़स्ल' (फ़ैसले का दिन) कहा गया है। यह वह दिन है जो अल्लाह तआला ने पहले और बाद के सभी लोगों के लिए एक निश्चित समय पर मुक़र्रर किया है।

जब इसराफील (अलैहिस्सलाम) 'सूर' (नरसिंगा) में दूसरी बार फूँकेंगे, तो सभी क़ब्रों से लोग उठ खड़े होंगे। यह फूँकना क़यामत के आरंभ का ऐलान होगा, जिसके बाद सभी इंसान अपनी-अपनी क़ब्रों से निकलकर मैदान-ए-हश्र की ओर बढ़ेंगे।

वे अफ़वाज (समूहों) में आएँगे - यानी अलग-अलग जत्थों में। हर उम्मत अपने नबी के साथ होगी, हर गिरोह अपने रहनुमा के पीछे चलेगा। कुछ समूह खुश और चेहरे पर नूर लिए होंगे, तो कुछ समूह उदास और सहमे हुए होंगे। यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने अकेलेपन में अल्लाह के सामने पेश होगा, लेकिन फिर भी सब अपने-अपने समूहों के साथ होंगे।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि यह ज़िंदगी आख़िरी नहीं है। एक दिन हम सब उठकर अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। यह आयत हमें बताती है कि क़यामत का दिन कोई दूर की बात नहीं, बल्कि हर पल उसके करीब होते जा रहे हैं।

इसलिए ऐ इंसान! इस दिन की तैयारी कर ले। अपने अमलों को संवार ले। नेकियों का जत्था बना ले, ताकि उस दिन तू उन लोगों के साथ हो जो रहमत के साए में होंगे। यह दिन उनके लिए खुशी का दिन होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की इबादत की और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैरवी की।

अल्लाह तआला हम सबको उस दिन की शर्मिंदगी से बचाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो अपने रब की रहमत के साथ हश्र के मैदान में आएँगे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — सूरा अन-नबा

16وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا
और घने घने बाग़ पैदा करें
17إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا
बेशक फैसले का दिन मुक़र्रर है
18يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
19وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا
और आसमान खोल दिए जाएँगे
20وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे
अन-नबाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अन-नबा 18

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Saturday, October 3, 2026

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