अन-नबा · 7/40
अनुवाद उच्चारण — अन-नबा
وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا ۝٧
Wal jibaala au taada
📖 हिंदी अर्थ
और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अवताद (ओताद): खूँटे, मेख़ें — यानी ऐसी चीज़ें जो किसी चीज़ को जमाए रखें और उसे हिलने से रोकें।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत के उस अज़ीम नज़ारे की तरफ़ इशारा किया है जो हर इंसान की आँखों के सामने है — यानी पहाड़। अल्लाह ने फ़रमाया: "और हमने पहाड़ों को खूँटे बनाया।" यानी जिस तरह खेमे को ज़मीन पर गाड़े गए खूँटों से मज़बूत किया जाता है ताकि वह हिले नहीं और गिरे नहीं, उसी तरह अल्लाह ने इस ज़मीन को पहाड़ों के ज़रिए मज़बूत किया हुआ है। पहाड़ ज़मीन की गहराई में जड़ों की तरह फैले हुए हैं और उन्हें ऐसा जमाए रखते हैं कि ज़मीन अपने रहने वालों को लेकर डगमगाए नहीं, हिले नहीं और न ही उन पर बसे लोगों के लिए मुश्किल पैदा करे।

ये पहाड़ सिर्फ़ ज़मीन को जमाने का ज़रिया ही नहीं हैं, बल्कि अल्लाह की रहमत के ख़ज़ाने भी हैं — इनमें पानी के चश्मे, कीमती खनिज, जड़ी-बूटियाँ और कई तरह के फ़ायदे रखे गए हैं। यह अल्लाह की हिकमत और उसकी तदबीर का नमूना है कि उसने अपनी मख़लूक़ात के लिए ज़मीन को इस तरह सजाया और मज़बूत किया।

दावती पहलू:

इस आयत पर ग़ौर करने से इंसान के दिल में अल्लाह की अज़मत और उसकी क़ुदरत का एहसास पैदा होता है। जिस ज़मीन पर हम चलते हैं, जिस पर हम अपने घर बनाते हैं और जिस पर हम आराम से ज़िंदगी गुज़ारते हैं — अल्लाह ने उसे पहाड़ों के ज़रिए ऐसा मज़बूत किया है कि वह हमारे लिए सुकून की जगह बन गई। क्या यह उस रब की मेहरबानी और उसकी तदबीर की दलील नहीं? जिस रब ने ज़मीन को हमारे लिए स्थिर और आरामदेह बनाया, क्या वह हमें क़यामत के दिन दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने की ताक़त नहीं रखता? बेशक रखता है। यही वह पैग़ाम है जो इस आयत के बाद आने वाली आयतों में अल्लाह ने दिया है — कि जिसने ये निशानियाँ बनाईं, वही मरने के बाद ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है।

तो ऐ इंसान! इन पहाड़ों को देख, इनकी बुलंदी को देख, इनकी मज़बूती को देख — और यक़ीन कर कि तेरा रब हर चीज़ पर क़ादिर है। उसकी नेमतों का शुक्र अदा कर, उसकी इबादत कर और उस दिन के लिए तैयारी कर जब ये पहाड़ रूई की तरह उड़ाए जाएँगे और सब कुछ उसके सामने पेश होगा। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अन-नबा

5ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ
फिर इन्हें अनक़रीब ही ज़रूर मालूम हो जाएगा
6أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا
क्या हमने ज़मीन को बिछौना
7وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا
और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया
8وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا
और हमने तुम लोगों को जोड़ा जोड़ा पैदा किया
9وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا
और तुम्हारी नींद को आराम (का बाइस) क़रार दिया
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अनुवाद — अन-नबा 7

सूरा अन-नबा आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया

सूरा आयत 7/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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