अबस · 16/42
अनुवाद उच्चारण — सूरा अबस
كِرَامٍ بَرَرَةٍ ۝١٦
Kiraamim bararah
📖 हिंदी अर्थ
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • किराम (كرام): बड़े सम्मानित, प्रतिष्ठित और उच्च पद वाले।
  • बररह (بررة): नेक, पवित्र, आज्ञाकारी और भलाई करने वाले (यह 'बर्र' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है नेकी और भलाई करने वाला)।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन महान फ़रिश्तों का वर्णन कर रहे हैं जो क़ुरआन को लेकर आते हैं और उसे अमानत के साथ पहुँचाते हैं। ये फ़रिश्ते अल्लाह के नज़दीक बड़े सम्मानित और उच्च दर्जे वाले हैं। वे न केवल पवित्र और पाक हैं, बल्कि उनके कर्म भी नेक और भलाई से भरे हुए हैं। वे अल्लाह की आज्ञा का पूर्ण रूप से पालन करते हैं और उनके स्वभाव में कोई कमी या बुराई नहीं है। ये फ़रिश्ते अल्लाह और उसके पैग़म्बरों के बीच संदेशवाहक हैं, और वे अपने इस कर्तव्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस क़ुरआन को हम पढ़ते हैं, वह कितनी उच्च और पवित्र श्रृंखला के माध्यम से हम तक पहुँचा है। अल्लाह तआला ने इन फ़रिश्तों को इसलिए चुना क्योंकि वे 'किराम' (सम्मानित) और 'बररह' (नेक) हैं। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम भी अपने जीवन को नेकी और पवित्रता से सजाएँ, ताकि हम अल्लाह के नज़दीक सम्मानित बन सकें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह तआला अपने पवित्र कलाम को कितनी उच्च श्रृंखला के माध्यम से हम तक पहुँचाते हैं। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि यह कोई साधारण किताब नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है जो पाक फ़रिश्तों के माध्यम से हम तक पहुँचा है। यह हमारे दिलों में क़ुरआन की अज़मत (महानता) को बढ़ाता है और हमें इसे समझने, उस पर अमल करने और उसे अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। आइए, हम भी इन नेक फ़रिश्तों की तरह नेकी और पवित्रता को अपनाएँ और अल्लाह के नज़दीक सम्मानित बनने की कोशिश करें। याद रखें, अल्लाह की रहमत और उसका क़ुरआन हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है, और इस नेमत की क़द्र करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।



📜 आयत 14-18 — सूरा अबस

14مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍ
बुलन्द मरतबा और पाक हैं
15بِأَيْدِي سَفَرَةٍ
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
16كِرَامٍ بَرَرَةٍ
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
17قُتِلَ الْإِنسَانُ مَا أَكْفَرَهُ
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
18مِنْ أَيِّ شَيْءٍ خَلَقَهُ
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
अबसकुरान सूची
42आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अबस 16

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पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

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