अबस · 22/42
अनुवाद उच्चारण — सूरा अबस
ثُمَّ إِذَا شَاءَ أَنشَرَهُ ۝٢٢
Thumma iza shaa-a ansharah
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَنشَرَهُ: उसे जीवित करके उठाना, पुनर्जीवित करना।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान की पैदाइश के मरहले बयान करने के बाद उसके दोबारा जीवित किए जाने का ज़िक्र फ़रमाया है। जिस तरह अल्लाह ने इंसान को पहली बार पैदा किया, उसी तरह वह उसे दोबारा भी ज़िंदा करेगा। जब अल्लाह का फ़ैसला होगा और वह चाहेगा, तो वह मुर्दों को क़ब्रों से उठाकर हाशिर (इकट्ठा) करेगा और हर इंसान को उसके अमल का हिसाब देने के लिए खड़ा करेगा। यह क़ुदरत अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है, क्योंकि जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आख़िरत के दिन को झुठलाते हैं और यह समझते हैं कि मरने के बाद कोई ज़िंदगी नहीं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह उसने इंसान को नुत्फ़े (बूंद) से पैदा किया, फिर उसे अलग-अलग मरहलों से गुज़ारा, उसी तरह वह उसे मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा। यह अल्लाह की क़ुदरत का कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि उसके लिए तो बस "कुन" (हो जा) कहना काफी है।

इस आयत में इंसान के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी भी है कि मौत ही सब कुछ ख़त्म नहीं है, बल्कि यह एक दरवाज़ा है जो हमें हमेशा की ज़िंदगी की तरफ ले जाता है। जो लोग नेक अमल करते हैं, उनके लिए यह दिन खुशियों का दिन होगा, और जो गुनाहों में डूबे रहे, उनके लिए यह दिन बड़ी मुसीबत का दिन होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक गुज़ारें, ताकि उस दिन हम कामयाब हो सकें।

याद रखिए, अल्लाह का वादा बिल्कुल सच्चा है। जिस तरह हमारा जन्म हमारी मर्ज़ी के बिना हुआ और हमने खुद को इस दुनिया में पाया, उसी तरह मरने के बाद दोबारा उठना भी अल्लाह के इख्तियार में है। वह जब चाहेगा, हमें ज़िंदा कर देगा। यही वह दिन है जब हर इंसान अपने अमल का फल पाएगा — अच्छा हो तो अच्छा, बुरा हो तो बुरा। इसलिए आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के हक़दार बनें, क्योंकि उस दिन कोई मौका नहीं मिलेगा।



📜 आयत 20-24 — सूरा अबस

20ثُمَّ السَّبِيلَ يَسَّرَهُ
फिर उसका रास्ता आसान कर दिया
21ثُمَّ أَمَاتَهُ فَأَقْبَرَهُ
फिर उसे मौत दी फिर उसे कब्र में दफ़न कराया
22ثُمَّ إِذَا شَاءَ أَنشَرَهُ
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
23كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَا أَمَرَهُ
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
24فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
अबसकुरान सूची
42आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अबस 22

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Wednesday, September 30, 2026

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