अबस · 24/42
अनुवाद उच्चारण — अबस
فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ ۝٢٤
Falyanzuril insanu ilaa ta-amih
📖 हिंदी अर्थ
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَلْيَنْظُرْ: चिंतन-मनन करे, ग़ौर करे
  • الْإِنْسَانُ: मनुष्य
  • إِلَىٰ طَعَامِهِ: अपने भोजन की ओर

तफ़सीर:

अल्लाह तआला मनुष्य को अपने भोजन की ओर ध्यान देने का आदेश दे रहे हैं, ताकि वह उस महान शक्ति को पहचाने जिसने उसे यह भोजन प्रदान किया। यह एक ऐसा आह्वान है जो हर इंसान की दैनिक ज़िंदगी से जुड़ा है — जब वह रोटी का एक टुकड़ा उठाता है, जब वह पानी का एक घूंट पीता है, तो उसे रुककर सोचना चाहिए कि यह भोजन कैसे पहुँचा उसके हाथ तक?

यह चिंतन मनुष्य को उस श्रृंखला की ओर ले जाता है जो उसके भोजन को पैदा करती है — आसमान से बारिश, धरती का सीना चीरकर उगने वाले अनाज, अंगूर, जैतून, खजूर, सब्ज़ियाँ और चारा। यह सब उस रहीम व करीम अल्लाह की देन है जिसने अपनी असीम कृपा से यह सारा प्रबंध किया।

यह आयत उन लोगों के लिए विशेष रूप से चेतावनी है जो अल्लाह की नेमतों को भूलकर उसके अस्तित्व से इनकार करते हैं। वे रोज़ खाते हैं, लेकिन कभी यह नहीं सोचते कि यह अन्न किसने उगाया, यह पानी किसने बरसाया, यह धरती किसने बनाई?

अल्लाह हमें सिखाता है कि भोजन की ओर देखना सिर्फ़ पेट भरने का ज़रिया नहीं, बल्कि ईमान की मज़बूती का ज़रिया है। जब इंसान अपनी रोटी के टुकड़े को ग़ौर से देखता है, तो उसे अपने रब की क़ुदरत का एक जीता-जागता सबूत मिलता है। यही चिंतन उसे शुक्रगुज़ार बनाता है और उसके दिल में अल्लाह की मुहब्बत पैदा करता है।

इस आयत का एक गहरा संदेश यह भी है कि जिस तरह भोजन अपनी शुरुआती हालत से बदलकर अंतिम हालत तक पहुँचता है — बीज से पौधा, पौधे से फल, फल से भोजन — उसी तरह इंसान की ज़िंदगी भी बदलती रहती है। यह उसे याद दिलाता है कि उसकी ज़िंदगी का अंत भी आएगा, और उसे उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए।

प्यारे भाइयो और बहनों! आज ही अपने भोजन की ओर देखिए — उस दाने को देखिए जो आपके हाथों में है। उसमें अल्लाह की कितनी बड़ी नेमत छिपी है! यही चिंतन आपको ईमान की मिठास से भर देगा और आपके दिल में अल्लाह का खौफ़ और मुहब्बत पैदा करेगा। याद रखिए, जो इंसान अपने रब की नेमतों को पहचानता है, वह कभी उसकी नाफ़रमानी नहीं कर सकता।



📜 आयत 22-26 — अबस

22ثُمَّ إِذَا شَاءَ أَنشَرَهُ
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
23كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَا أَمَرَهُ
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
24فَلْيَنظُرِ الْإِنسَانُ إِلَىٰ طَعَامِهِ
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
25أَنَّا صَبَبْنَا الْمَاءَ صَبًّا
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
26ثُمَّ شَقَقْنَا الْأَرْضَ شَقًّا
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
अबसकुरान सूची
42आयत
मक्कीRevelation
24आयत

अनुवाद — अबस 24

सूरा अबस आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए

सूरा आयत 24/42 — अबस عبس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अबस सुनें, अबस अनुवाद, अबस mp3, अबस pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए