अल-मुतफ्फिफीन · 25/36
अनुवाद उच्चारण — अल-मुतफ्फिफीन
يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍ مَّخْتُومٍ ۝٢٥
Yusqawna mir raheeqim makhtoom
📖 हिंदी अर्थ
उनको सर ब मोहर ख़ालिस शराब पिलायी जाएगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रहीक़: ख़ालिस (शुद्ध) शराब, जो सबसे उत्तम और पवित्र हो।
  • मख़्तूम: मुहरबंद, यानी जिसके बर्तन पर मुहर लगी हो, जिसे केवल अल्लाह के नेक बंदे ही खोल सकें।

तफ़सीर:

यह आयत उन नेक और सच्चे लोगों के इनाम का वर्णन कर रही है जो अल्लाह के हुक्मों पर चलते हैं और उसकी इबादत में जीवन बिताते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग जन्नत में होंगे, जहाँ उन्हें ऐसा पवित्र और ख़ालिस शराब पिलाई जाएगी जो हर प्रकार की गंदगी और नुक़्स से पाक हो। यह शराब दुनिया की शराबों की तरह नहीं होगी जो बुद्धि को भ्रष्ट करती है या नुक़्सान पहुँचाती है, बल्कि यह एक ऐसा पेय होगा जो सुख और आनंद का स्रोत होगा।

इस शराब के बर्तन पर मुहर लगी होगी, जो इसकी पवित्रता और विशिष्टता की निशानी है। यह मुहर इस बात का प्रतीक है कि यह पेय केवल उन्हीं के लिए है जो अल्लाह के करीब हैं और जिन्होंने अपने जीवन में नेकियाँ कीं। इसका अंत ख़ुशबूदार मुश्क (कस्तूरी) जैसा होगा, जो इसकी उत्तमता को और बढ़ा देगा। यह वही पेय है जिसमें "तस्नीम" नामक जन्नत के चश्मे का पानी मिलाया जाएगा, जो अल्लाह के ख़ास बंदों (मुक़र्रबीन) के लिए तैयार किया गया है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए ऐसी नेमतें तैयार की हैं जिनका अंदाज़ा हम नहीं कर सकते। जो लोग दुनिया में अल्लाह के हुक्मों की पालना करते हैं और उसकी राह में सब्र करते हैं, उनके लिए यह इनाम है। यह हमें प्रोत्साहित करती है कि हम दुनिया के अस्थायी सुखों के पीछे न भागें, बल्कि उस स्थायी सुख की ओर बढ़ें जो अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों के लिए रखा है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत और उसके इनाम असीम हैं। वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें ऐसी जगहों पर पहुँचाना चाहता है जहाँ कोई दुख, दर्द या चिंता नहीं होगी। आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की राह में लगाएँ, उसकी इबादत करें और उसके दिए हुए हुक्मों पर चलें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें यह पवित्र और मुहरबंद पेय पिलाया जाएगा। यही सच्ची कामयाबी है, और इसी के लिए हमें एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-मुतफ्फिफीन

23عَلَى الْأَرَائِكِ يَنظُرُونَ
तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे
24تَعْرِفُ فِي وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ النَّعِيمِ
तुम उनके चेहरों ही से राहत की ताज़गी मालूम कर लोगे
25يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍ مَّخْتُومٍ
उनको सर ब मोहर ख़ालिस शराब पिलायी जाएगी
26خِتَامُهُ مِسْكٌ ۚ وَفِي ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ الْمُتَنَافِسُونَ
जिसकी मोहर मिश्क की होगी और उसकी तरफ अलबत्ता शायक़ीन को रग़बत करनी चाहिए
27وَمِزَاجُهُ مِن تَسْنِيمٍ
और उस (शराब) में तसनीम के पानी की आमेज़िश होगी
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25आयत

अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 25

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Tuesday, August 18, 2026

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