अल-आला · 15/19
अनुवाद उच्चारण — अल-आला
وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ فَصَلَّىٰ ۝١٥
Wa zakaras ma Rabbihee fasallaa
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ: अपने रब का नाम लिया, उसे याद किया, उसकी तौहीद की और उसी की इबादत का इरादा किया।
  • فَصَلَّىٰ: और नमाज़ अदा की — फ़र्ज़ और नफ़्ल दोनों।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की कामयाबी का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अपने आपको गुनाहों और बुरे अख़लाक़ से पाक किया। वह पाकी सिर्फ़ ज़ाहिरी नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई और नेक अमल का नतीजा है। फिर उन्होंने अपने रब का नाम लिया — यानी उसे याद किया, उसकी तौहीद की, उसी से माँगा और उसी की राह में चले। और फिर उन्होंने नमाज़ क़ायम की — वह नमाज़ जो अल्लाह और बंदे के दरमियान सबसे प्यारा रिश्ता है। यह नमाज़ सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि दिल की हाज़िरी, ख़ुशू और ख़ुज़ू के साथ अदा की जाने वाली इबादत है, जो इंसान को बुराई से रोकती है और उसे अल्लाह के क़रीब ले जाती है।

यह वही रास्ता है जो हर उस शख्स को कामयाबी की मंज़िल तक पहुँचाता है जो अपने दिल को साफ़ रखता है, अपने रब को याद करता है और उसकी नमाज़ को हक़ अदा करता है। याद रखिए, नमाज़ सिर्फ़ पाँच वक़्त की रस्म नहीं, बल्कि दिल की तस्कीन, रूह की ग़िज़ा और ज़िंदगी की रौशनी है। जो शख्स इसे प्यार से, समझकर और पाबंदी से पढ़ता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि असली कामयाबी दौलत या शोहरत में नहीं, बल्कि दिल की पाकी, अल्लाह की याद और नमाज़ की पाबंदी में है। यही वह ज़रिया है जो इंसान को जन्नत के क़रीब ले जाता है और उसे अल्लाह का प्यारा बंदा बनाता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को इसी राह पर चलाएँ — दिल को साफ़ रखें, अल्लाह का नाम ज़ुबान पर और उसकी नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ। यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची ख़ुशी और हमेशा की कामयाबी तक पहुँचाएगा।



📜 आयत 13-17 — अल-आला

13ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ
फिर न वहाँ मरेगा ही न जीयेगा
14قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ
वह यक़ीनन मुराद दिली को पहुँचा जो (शिर्क से) पाक हो
15وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ فَصَلَّىٰ
और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा
16بَلْ تُؤْثِرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
मगर तुम लोग दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो
17وَالْآخِرَةُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
हालॉकि आख़ोरत कहीं बेहतर और देर पा है
अल-आलाकुरान सूची
19आयत
मक्कीRevelation
15आयत

अनुवाद — अल-आला 15

सूरा अल-आला आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा

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Tuesday, August 18, 2026

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