अल-आला · 16/19
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आला
بَلْ تُؤْثِرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا ۝١٦
Bal tu`siroonal hayaatad dunyaa
📖 हिंदी अर्थ
मगर तुम लोग दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُؤْثِرُونَ: तुम प्राथमिकता देते हो, चुनते हो, पसंद करते हो।
  • الْحَيَاةَ الدُّنْيَا: यह संसारिक जीवन, जो नश्वर और क्षणभंगुर है।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फरमाता है कि बल्कि तुम लोग (ऐ इंसानों!) इस दुनिया की ज़िंदगी को आख़िरत की ज़िंदगी पर तरजीह देते हो। तुम उस चीज़ को पसंद करते हो जो फ़ानी (नाशवान) है, और उसे उस चीज़ पर आगे बढ़ाते हो जो बाक़ी रहने वाली और हमेशा क़ायम रहने वाली है। तुम दुनिया के उन मामूली और अदना (बहुत छोटे) सुखों को, जो कुछ दिनों के लिए हैं, उस आख़िरी और हमेशा की नेमतों के मुक़ाबले में पसंद करते हो, जिनका कोई अंत नहीं।

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो दुनिया को आख़िरत पर मुक़द्दम (प्राथमिकता) रखते हैं। वे दुनिया की चमक-दमक, माल-दौलत, शोहरत और आराम को ही सब कुछ समझ लेते हैं, और आख़िरत के उस हमेशा रहने वाले सुख और अज़ाब से ग़ाफ़िल (बेखबर) रहते हैं। जबकि हक़ीक़त यह है कि दुनिया की ज़िंदगी आख़िरत के मुक़ाबले में बिल्कुल हीच (तुच्छ) और थोड़ी है।

दावती पहलू:

ऐ प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस चीज़ को अहमियत दे रहे हैं। क्या हम उस दुनिया के पीछे भाग रहे हैं जो एक दिन ख़त्म हो जाएगी, या हम उस आख़िरत की तैयारी कर रहे हैं जो हमेशा रहेगी? अल्लाह तआला हमें बताना चाहता है कि दुनिया की मुहब्बत और उसकी तरजीह इंसान को आख़िरत की भलाई से दूर कर देती है।

अगर हम सच में अक़्लमंद हैं, तो हमें उस ज़िंदगी को तरजीह देनी चाहिए जो कभी ख़त्म नहीं होगी। जन्नत की उन नेमतों के आगे दुनिया की सारी नेमतें कुछ भी नहीं। यह मौक़ा हमें मिला है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा (खुशी) के मुताबिक़ बनाएं, नेक अमल करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हमें अपने अमलों का हिसाब देना होगा। याद रखिए, दुनिया एक खेल और मज़ाक है, और आख़िरत का घर ही असल ज़िंदगी है। अल्लाह हमें दुनिया को आख़िरत पर तरजीह देने से बचाए और हमें सीधी राह पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 14-18 — सूरा अल-आला

14قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ
वह यक़ीनन मुराद दिली को पहुँचा जो (शिर्क से) पाक हो
15وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ فَصَلَّىٰ
और अपने परवरदिगार का ज़िक्र करता और नमाज़ पढ़ता रहा
16بَلْ تُؤْثِرُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
मगर तुम लोग दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीह देते हो
17وَالْآخِرَةُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ
हालॉकि आख़ोरत कहीं बेहतर और देर पा है
18إِنَّ هَٰذَا لَفِي الصُّحُفِ الْأُولَىٰ
बेशक यही बात अगले सहीफ़ों
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16आयत

अनुवाद — अल-आला 16

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Thursday, October 1, 2026

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