अल-बलद · 8/20
अनुवाद उच्चारण — अल-बलद
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُ عَيْنَيْنِ ۝٨
Alam naj`al lahoo `aynayn
📖 हिंदी अर्थ
क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلَمْ نَجْعَلْ: क्या हमने नहीं बनाया?
  • لَهُ: उसके लिए (इंसान के लिए)
  • عَيْنَيْنِ: दो आँखें

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में इंसान पर अपनी बेपनाह रहमतों और एहसानात को याद दिला रहा है। वह फ़रमाता है: क्या हमने उसे दो आँखें नहीं दीं, जिनसे वह देखता है? यह एक ऐसी नेमत है जिसकी अहमियत का अंदाज़ा तब होता है जब कोई इंसान इनसे महरूम हो जाए।

ये आँखें सिर्फ़ देखने का ज़रिया ही नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत का एक अज़ीम शाहकार हैं। इन दो छोटी-सी आँखों के ज़रिए इंसान इस पूरी कायनात को देखता है — आसमान, ज़मीन, पहाड़, दरिया, चाँद-सितारे, और अपने रब की निशानियों को मुलाहज़ा करता है।

अगर इंसान ज़रा सोचे तो यही आँखें उसे अपने रब की पहचान की तरफ़ ले जाती हैं। जब वह इन आँखों से अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ात को देखता है, तो उसे समझना चाहिए कि इन सबका बनाने वाला कोई और ही है — वही अल्लाह, जो सबसे बड़ा कारीगर और सबसे महान रचनाकार है।

यह आयत इंसान को शुक्रगुज़ार बनने की तरफ़ बुलाती है। जिस रब ने हमें ये आँखें दीं, क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए? क्या हमें उसके दिए हुए इन नेमतों का सही इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

इस आयत में एक सवालिया अंदाज़ है — "क्या हमने नहीं दीं?" — यह अंदाज़ इसलिए है ताकि इंसान खुद अपने ज़मीर से जवाब दे और अपने रब की नेमतों को कबूल करे। जब इंसान यह कबूल कर लेता है कि अल्लाह ने उसे ये आँखें दी हैं, तो उस पर फ़र्ज़ है कि वह इन आँखों को उन कामों में इस्तेमाल करे जो अल्लाह को पसंद हैं — हक़ देखना, सच्चाई को पहचानना, अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करना, और उन चीज़ों से नज़र बचाना जो अल्लाह ने हराम की हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी हर नेमत अल्लाह की तरफ़ से है, और हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए। शुक्र सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि इन नेमतों को अल्लाह की राह में इस्तेमाल करके अदा किया जाता है।

आओ, हम अपनी इन आँखों को देखकर अपने रब का शुक्र अदा करें और उसकी बताई हुई राह पर चलने का अज़्म करें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। अल्लाह हमें अपनी नेमतों का सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 6-10 — अल-बलद

6يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
7أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُ أَحَدٌ
क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं
8أَلَمْ نَجْعَل لَّهُ عَيْنَيْنِ
क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान
9وَلِسَانًا وَشَفَتَيْنِ
और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)
10وَهَدَيْنَاهُ النَّجْدَيْنِ
और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं
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अनुवाद — अल-बलद 8

सूरा अल-बलद आयत 8 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान

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Tuesday, August 18, 2026

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