अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- कनूद का अर्थ है अत्यधिक कृतघ्न, नाशुक्रा, जो भलाई को न पहचाने और नेमतों का इनकार करे।
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में इंसान की एक बड़ी कमज़ोरी और खामी को बयान कर रहे हैं। इंसान अपने रब की नेमतों के प्रति बहुत नाशुक्रा है। वह अल्लाह की अनगिनत देनों को भूल जाता है और उन्हें ज़ाहिर नहीं करता। जब उस पर मुसीबत आती है तो वह घबरा जाता है और जब खैर व राहत मिलती है तो वह रोक लेता है, यानी अल्लाह की राह में खर्च नहीं करता। यह कृतघ्नता इंसान की फितरत में शामिल है, जब तक कि अल्लाह उसे हिदायत न दे और उसके दिल को नूर से न भर दे।
इंसान अपने रब की नेमतों का इनकार करता है, और यह इनकार उसके अंदर इतना गहरा होता है कि वह खुद भी इस बात का गवाह होता है। वह माल की मुहब्बत में इतना डूबा होता है कि उसे अल्लाह की नेमतें याद नहीं रहतीं। यही वजह है कि वह अल्लाह के हुक्मों को भूलकर अपनी ख्वाहिशों के पीछे भागता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें आत्म-निरीक्षण की दावत देती है। क्या हम सचमुच अल्लाह के शुक्रगुज़ार हैं? क्या हम अपनी ज़ुबान से, अपने दिल से और अपने आमाल से अल्लाह की नेमतों का एतराफ़ करते हैं? यह आयत हमें सिखाती है कि शुक्र अदा करना सिर्फ़ ज़ुबान से "अल्हम्दुलिल्लाह" कहना नहीं है, बल्कि अल्लाह की नेमतों को उसकी राह में खर्च करना, उसके हुक्मों पर अमल करना और उसकी मख़लूक़ के साथ भलाई करना भी शुक्र का हिस्सा है।
अल्लाह तआला हमें इस कृतघ्नता से बचाए और हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए। हमें चाहिए कि हर पल अल्लाह की नेमतों को याद करें और उसका शुक्र अदा करें, क्योंकि शुक्र अदा करने से अल्लाह नेमतों में और इज़ाफ़ा करता है। जो शुक्रगुज़ार होता है, अल्लाह उसे और देता है, और जो नाशुक्रा होता है, वह अल्लाह के अज़ाब का हक़दार बनता है।
📜 आयत 4-8 — अल-आदियात
अनुवाद — अल-आदियात 6
सूरा अल-आदियात आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा…सूरा आयत 6/11 — अल-आदियात العاديات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आदियात सुनें, अल-आदियात अनुवाद, अल-आदियात mp3, अल-आदियात pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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