यूसुफ · 28/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
فَلَمَّا رَأَىٰ قَمِيصَهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ قَالَ إِنَّهُ مِن كَيْدِكُنَّ ۖ إِنَّ كَيْدَكُنَّ عَظِيمٌ ۝٢٨
Falammaa ra-aa qamee sahoo qudda min duburin qaala innahoo min kaidikunna inna kaidakunna `azeem
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब अज़ीजे मिस्र ने उनका कुर्ता पीछे से फटा हुआ देखा तो (अपनी औरत से) कहने लगा ये तुम ही लोगों के चलत्तर है उसमें शक़ नहीं कि तुम लोगों के चलत्तर बड़े (ग़ज़ब के) होते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَمِيصَهُ (क़मीस): कुर्ता या कमीज़।
  • قُدَّ مِن دُبُرٍ (क़ुद्दा मिन दुबुर): पीछे की तरफ से फटा हुआ।
  • كَيْدِكُنَّ (कैदिकुन्न): तुम (औरतों) का चालाकी भरा उपाय, धोखा या साज़िश।
  • عَظِيمٌ (अज़ीम): बहुत बड़ा, अत्यंत गंभीर।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अज़ीज़ (मिस्र के शासक) ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) का कुर्ता देखा कि वह पीछे की तरफ से फटा हुआ है, तो उसे तुरंत सच्चाई का पता चल गया। यह स्पष्ट संकेत था कि यूसुफ़ ने उसकी पत्नी की ओर से किसी बुरे इरादे से हमला नहीं किया था, बल्कि वह खुद उससे बचकर भाग रहा था। यदि यूसुफ़ उसके पीछे भागता, तो कुर्ता आगे से फटता, लेकिन कुर्ते का पीछे से फटना इस बात का प्रमाण था कि वह उसके पीछे-पीछे भागी और उसने उसे रोकने की कोशिश की, और यूसुफ़ आगे बढ़ रहा था। इसलिए अज़ीज़ ने अपनी पत्नी से कहा: "यह (तुम्हारा आरोप) तुम औरतों की चालाकी और धोखे का ही एक हिस्सा है। तुम्हारी साज़िशें और मक्कारी वाकई बहुत बड़ी होती हैं।" यह कहकर उसने यूसुफ़ की बेगुनाही को स्वीकार किया और अपनी पत्नी को उसके झूठे इल्ज़ाम पर फटकार लगाई।

फ़ायदे और सबक:

  1. सच्चाई का सबूत: यह घटना सिखाती है कि अल्लाह सच्चे लोगों की मदद करता है और उनकी बेगुनाही को साबित करने का कोई न कोई रास्ता निकाल देता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) जैसे पाकदामन इंसान को अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से बचा लिया।
  2. झूठ और फरेब का अंजाम: यह आयत बताती है कि झूठ और बदनीयती से भरी साज़िशें देर-सबेर बेनकाब हो जाती हैं। अज़ीज़ की पत्नी की चालाकी के बावजूद सच्चाई सामने आ गई।
  3. औरतों की चालाकी से बचाव: इस आयत में औरतों की मक्कारी का ज़िक्र करके मर्दों को सावधान किया गया है कि वे अपनी इज़्ज़त और ईमान की हिफ़ाज़त करें और ऐसी स्थितियों में अल्लाह से मदद माँगें। साथ ही, यह भी सबक है कि इंसान को अपने जज़्बात पर क़ाबू रखना चाहिए।
  4. अल्लाह की निगरानी: यह क़िस्सा हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह हर हाल में अपने नेक बंदों के साथ होता है और उन्हें मुश्किलों से निकालता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित होना इसी का नतीजा था।
  5. इस्लाम की तालीम: इस्लाम हमें सिखाता है कि इंसाफ़ और सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे मामला कितना भी पेचीदा क्यों न हो। अज़ीज़ ने सबूत देखते ही सच्चाई मान ली, यह एक अच्छी मिसाल है कि इंसाफ़ को तरजीह देनी चाहिए।


📜 आयत 26-30 — यूसुफ

26قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِي عَن نَّفْسِي ۚ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ أَهْلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
या दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला कर दिया जाए यूसुफ ने कहा उसने ख़ुद (मुझसे मेरी आरज़ू की थी और ज़ुलेख़ा) के कुन्बे वालों में से एक गवाही देने वाले (दूध पीते बच्चे) ने गवाही दी कि अगर उनका कुर्ता आगे से फटा हुआ हो तो ये सच्ची और वह झूठे
27وَإِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ فَكَذَبَتْ وَهُوَ مِنَ الصَّادِقِينَ
और अगर उनका कुर्ता पींछे से फटा हुआ हो तो ये झूठी और वह सच्चे
28فَلَمَّا رَأَىٰ قَمِيصَهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ قَالَ إِنَّهُ مِن كَيْدِكُنَّ ۖ إِنَّ كَيْدَكُنَّ عَظِيمٌ
फिर जब अज़ीजे मिस्र ने उनका कुर्ता पीछे से फटा हुआ देखा तो (अपनी औरत से) कहने लगा ये तुम ही लोगों के चलत्तर है उसमें शक़ नहीं कि तुम लोगों के चलत्तर बड़े (ग़ज़ब के) होते हैं
29يُوسُفُ أَعْرِضْ عَنْ هَٰذَا ۚ وَاسْتَغْفِرِي لِذَنبِكِ ۖ إِنَّكِ كُنتِ مِنَ الْخَاطِئِينَ
(और यूसुफ से कहा) ऐ यूसुफ इसको जाने दो और (औरत से कहा) कि तू अपने गुनाह की माफी माँग क्योंकि बेशक तू ही सरतापा ख़तावार है
30۞ وَقَالَ نِسْوَةٌ فِي الْمَدِينَةِ امْرَأَتُ الْعَزِيزِ تُرَاوِدُ فَتَاهَا عَن نَّفْسِهِ ۖ قَدْ شَغَفَهَا حُبًّا ۖ إِنَّا لَنَرَاهَا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और शहर (मिस्र) में औरतें चर्चा करने लगी कि अज़ीज़ (मिस्र) की बीबी अपने ग़ुलाम से (नाजायज़) मतलब हासिल करने की आरज़ू मन्द है बेशक गुलाम ने उसे उलफत में लुभाया है हम लोग तो यक़ीनन उसे सरीही ग़लती में मुब्तिला देखते हैं
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अनुवाद — यूसुफ 28

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Tuesday, August 18, 2026

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