इब्राहीम · 20/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ ۝٢٠
Wa maa zaalika `alal laahi bi `azeez
📖 हिंदी अर्थ
औ ये ख़ुदा पर कुछ भी दुशवार नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَلِكَ (ज़ालिक): यह (अर्थात तुम्हें हलाक करना और दूसरों को लाना)
  • عَلَى اللهِ (अलल्लाह): अल्लाह के लिए
  • بِعَزِيزٍ (बिअज़ीज़): कठिन, दुश्वार, असंभव या मुम्तनिअ

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम्हें हलाक करना और तुम्हारी जगह दूसरी मख़लूक़ को लाना अल्लाह के लिए कोई कठिन या मुश्किल काम नहीं है। यह उसके लिए बिल्कुल आसान और सहल है। अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है, उसकी क़ुदरत के आगे कोई चीज़ अजीज़ (मुश्किल) नहीं। वह जब चाहता है किसी क़ौम को हलाक कर देता है और दूसरी क़ौम को पैदा कर देता है। यह बात उस संदर्भ में कही गई है जब अल्लाह तआला ने धमकी दी थी कि अगर तुम कुफ़्र करोगे तो वह तुम्हें हलाक करके दूसरी क़ौम लाएगा। यहाँ अल्लाह तआला यह स्पष्ट कर रहा है कि यह कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि उसके लिए निहायत आसान है। उसकी क़ुदरत की कोई हद नहीं, और न ही कोई चीज़ उसे अजीज़ कर सकती है।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह तआला की क़ुदरत लामहदूद (असीमित) है — उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। यह ईमान की बुनियाद है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।
  2. यह आयत मुसलमानों को अल्लाह का ख़ौफ़ दिलाती है कि अगर वे अल्लाह की नाफ़रमानी करें और कुफ़्र या शिर्क में पड़ जाएँ, तो अल्लाह उन्हें हलाक करके दूसरी उम्मत ला सकता है जो उसकी इबादत करे। यह एक बड़ी चेतावनी है।
  3. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके इख़्तियार में हैं। वह जिसे चाहे बख़्शे और जिसे चाहे पकड़े। इसलिए इंसान को हमेशा अल्लाह के सामने अज्ज़त (विनम्रता) और इस्तिग़फ़ार की हालत में रहना चाहिए।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह उम्मीद भी देती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती। चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह चाहे तो उन्हें हलाक कर सकता है। इसलिए मुसलमान को सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।


📜 आयत 18-22 — इब्राहीम

18مَّثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ أَعْمَالُهُمْ كَرَمَادٍ اشْتَدَّتْ بِهِ الرِّيحُ فِي يَوْمٍ عَاصِفٍ ۖ لَّا يَقْدِرُونَ مِمَّا كَسَبُوا عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ
जो लोग अपने परवरदिगार से काफिर हो बैठे हैं उनकी मसल ऐसी है कि उनकी कारस्तानियाँ गोया (राख का एक ढेर) है जिसे (अन्धड़ के रोज़ हवा का बड़े ज़ोरों का झोंका उड़ा लेगा जो कुछ उन लोगों ने (दुनिया में) किया कराया उसमें से कुछ भी उनके क़ाबू में न होगा यही तो पल्ले दर्जे की गुमराही है
19أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ
क्या तूने नहीं देखा कि ख़ुदा ही ने सारे आसमान व ज़मीन ज़रुर मसलहत से पैदा किए अगर वह चाहे तो सबको मिटाकर एक नई खिलक़त (बस्ती) ला बसाए
20وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ
औ ये ख़ुदा पर कुछ भी दुशवार नहीं
21وَبَرَزُوا لِلَّهِ جَمِيعًا فَقَالَ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ قَالُوا لَوْ هَدَانَا اللَّهُ لَهَدَيْنَاكُمْ ۖ سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَجَزِعْنَا أَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٍ
और (क़यामत के दिन) लोग सबके सब ख़ुदा के सामने निकल खड़े होगें जो लोग (दुनिया में कमज़ोर थे बड़ी इज्ज़त रखने वालो से (उस वक्त) क़हेंगें कि हम तो बस तुम्हारे क़दम ब क़दम चलने वाले थे तो क्या (आज) तुम ख़ुदा के अज़ाब से कुछ भी हमारे आड़े आ सकते हो वह जवाब देगें काश ख़ुदा हमारी हिदायत करता तो हम भी तुम्हारी हिदायत करते हम ख्वाह बेक़रारी करें ख्वाह सब्र करे (दोनो) हमारे लिए बराबर है (क्योंकि अज़ाब से) हमें तो अब छुटकारा नहीं
22وَقَالَ الشَّيْطَانُ لَمَّا قُضِيَ الْأَمْرُ إِنَّ اللَّهَ وَعَدَكُمْ وَعْدَ الْحَقِّ وَوَعَدتُّكُمْ فَأَخْلَفْتُكُمْ ۖ وَمَا كَانَ لِيَ عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ إِلَّا أَن دَعَوْتُكُمْ فَاسْتَجَبْتُمْ لِي ۖ فَلَا تَلُومُونِي وَلُومُوا أَنفُسَكُم ۖ مَّا أَنَا بِمُصْرِخِكُمْ وَمَا أَنتُم بِمُصْرِخِيَّ ۖ إِنِّي كَفَرْتُ بِمَا أَشْرَكْتُمُونِ مِن قَبْلُ ۗ إِنَّ الظَّالِمِينَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और जब (लोगों का) ख़ैर फैसला हो चुकेगा (और लोग शैतान को इल्ज़ाम देगें) तो शैतान कहेगा कि ख़ुदा ने तुम से सच्चा वायदा किया था (तो वह पूरा हो गया) और मैने भी वायदा तो किया था फिर मैने वायदा ख़िलाफ़ी की और मुझे कुछ तुम पर हुकूमत तो थी नहीं मगर इतनी बात थी कि मैने तुम को (बुरे कामों की तरफ) बुलाया और तुमने मेरा कहा मान लिया तो अब तुम मुझे बुंरा (भला) न कहो बल्कि (अगर कहना है तो) अपने नफ्स को बुरा कहो (आज) न तो मैं तुम्हारी फरियाद को पहुँचा सकता हूँ और न तुम मेरी फरियाद कर सकते हो मै तो उससे पहले ही बेज़ार हूँ कि तुमने मुझे (ख़ुदा का) शरीक बनाया बेशक जो लोग नाफरमान हैं उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
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Tuesday, August 18, 2026

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