अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذَلِكَ (ज़ालिक): यह (अर्थात तुम्हें हलाक करना और दूसरों को लाना)
- عَلَى اللهِ (अलल्लाह): अल्लाह के लिए
- بِعَزِيزٍ (बिअज़ीज़): कठिन, दुश्वार, असंभव या मुम्तनिअ
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम्हें हलाक करना और तुम्हारी जगह दूसरी मख़लूक़ को लाना अल्लाह के लिए कोई कठिन या मुश्किल काम नहीं है। यह उसके लिए बिल्कुल आसान और सहल है। अल्लाह तआला हर चीज़ पर क़ादिर है, उसकी क़ुदरत के आगे कोई चीज़ अजीज़ (मुश्किल) नहीं। वह जब चाहता है किसी क़ौम को हलाक कर देता है और दूसरी क़ौम को पैदा कर देता है। यह बात उस संदर्भ में कही गई है जब अल्लाह तआला ने धमकी दी थी कि अगर तुम कुफ़्र करोगे तो वह तुम्हें हलाक करके दूसरी क़ौम लाएगा। यहाँ अल्लाह तआला यह स्पष्ट कर रहा है कि यह कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि उसके लिए निहायत आसान है। उसकी क़ुदरत की कोई हद नहीं, और न ही कोई चीज़ उसे अजीज़ कर सकती है।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह तआला की क़ुदरत लामहदूद (असीमित) है — उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं। यह ईमान की बुनियाद है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।
- यह आयत मुसलमानों को अल्लाह का ख़ौफ़ दिलाती है कि अगर वे अल्लाह की नाफ़रमानी करें और कुफ़्र या शिर्क में पड़ जाएँ, तो अल्लाह उन्हें हलाक करके दूसरी उम्मत ला सकता है जो उसकी इबादत करे। यह एक बड़ी चेतावनी है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसके इख़्तियार में हैं। वह जिसे चाहे बख़्शे और जिसे चाहे पकड़े। इसलिए इंसान को हमेशा अल्लाह के सामने अज्ज़त (विनम्रता) और इस्तिग़फ़ार की हालत में रहना चाहिए।
- यह आयत मुसलमानों को यह उम्मीद भी देती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कोई ताक़त नहीं टिक सकती। चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों, अल्लाह चाहे तो उन्हें हलाक कर सकता है। इसलिए मुसलमान को सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए।
📜 आयत 18-22 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 20
सूरा इब्राहीम आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : औ ये ख़ुदा पर कुछ भी दुशवार नहींसूरा आयत 20/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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