इब्राहीम · 19/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ ۝١٩
Alam tara annal laaha khalaqas samaawaati wal arda bilhaqq; iny yashaa yuzhibkum wa yaati bikhalqin jadeed
📖 हिंदी अर्थ
क्या तूने नहीं देखा कि ख़ुदा ही ने सारे आसमान व ज़मीन ज़रुर मसलहत से पैदा किए अगर वह चाहे तो सबको मिटाकर एक नई खिलक़त (बस्ती) ला बसाए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَلَمْ تَرَ: क्या तुमने नहीं देखा / क्या तुम्हें ज्ञात नहीं (यहाँ "देखना" का अर्थ जानना और समझना है)
  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, उचित और सही उद्देश्य के साथ
  • يُذْهِبْكُمْ: तुम्हें ले जाए, तुम्हें मिटा दे, तुम्हें समाप्त कर दे
  • خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई सृष्टि, नए लोग

विस्तृत व्याख्या:

क्या तुमने इस सत्य पर ध्यान नहीं दिया और इसे नहीं जाना कि अल्लाह ने आकाशों (सारे आसमानों) और धरती को सत्य के साथ पैदा किया है? अर्थात् उसने इन्हें बेकार और अकारण नहीं बनाया, बल्कि इन्हें एक गंभीर और सही उद्देश्य के साथ बनाया है। यह सृष्टि अपने आप में अल्लाह की एकता, उसकी असीम शक्ति और उसकी पूर्ण बुद्धिमत्ता की स्पष्ट निशानी है। यह सब कुछ इसलिए है ताकि मनुष्य इन निशानियों को देखकर अपने रब को पहचाने, केवल उसी की इबादत करे और उसके साथ किसी को साझी न बनाए।

फिर अल्लाह तआला अपनी पूर्ण शक्ति और अधिकार की याद दिलाते हुए कहता है कि यदि वह चाहे तो तुम सबको समाप्त कर दे और तुम्हारे स्थान पर एक नई सृष्टि ले आए — ऐसे लोग जो उसकी आज्ञा का पालन करें, उसकी इबादत करें और उसके प्रति आज्ञाकारी हों। यह उसके लिए बिल्कुल आसान है, क्योंकि जिसने पहली बार आकाशों और धरती को पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना और भी आसान है। यह बात उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते हैं और उसकी इबादत से इनकार करते हैं, कि वे अपने रब की शक्ति को भूल न जाएँ।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि इस पूरी सृष्टि को देखकर हमें अपने रब की बड़ाई और उसकी शक्ति को पहचानना चाहिए। आकाश और धरती की रचना कोई खेल नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की महानता का जीवंत प्रमाण है।
  2. अल्लाह तआला की शक्ति असीम है। जिसने इस विशाल ब्रह्मांड को बनाया, उसके लिए मनुष्यों को मिटाकर नई सृष्टि लाना कोई कठिन काम नहीं है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह के सामने विनम्र रहना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की इबादत और आज्ञाकारिता ही हमारे अस्तित्व का असली उद्देश्य है। यदि हम इस उद्देश्य को भूल जाएँ, तो हमारा जीवन बेकार है, और अल्लाह हमारे स्थान पर ऐसे लोगों को ला सकता है जो उसकी इबादत को सही तरीके से निभाएँ।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए एक नर्म चेतावनी है जो अल्लाह की याद से गाफिल हैं कि वे अपनी ज़िंदगी को संभाल लें और अपने रब की ओर लौट आएँ, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और उसकी शक्ति के आगे किसी की कोई चारा-जोई नहीं चल सकती।
🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — इब्राहीम

17يَتَجَرَّعُهُ وَلَا يَكَادُ يُسِيغُهُ وَيَأْتِيهِ الْمَوْتُ مِن كُلِّ مَكَانٍ وَمَا هُوَ بِمَيِّتٍ ۖ وَمِن وَرَائِهِ عَذَابٌ غَلِيظٌ
(ज़बरदस्ती) उसे घूँट घँट करके पीना पड़ेगा और उसे हलक़ से आसानी से न उतार सकेगा और (वह मुसीबत है कि) उसे हर तरफ से मौत ही मौत आती दिखाई देती है हालॉकि वह मारे न मर सकेगा-और फिर उसके पीछे अज़ाब सख्त होगा
18مَّثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِرَبِّهِمْ ۖ أَعْمَالُهُمْ كَرَمَادٍ اشْتَدَّتْ بِهِ الرِّيحُ فِي يَوْمٍ عَاصِفٍ ۖ لَّا يَقْدِرُونَ مِمَّا كَسَبُوا عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ
जो लोग अपने परवरदिगार से काफिर हो बैठे हैं उनकी मसल ऐसी है कि उनकी कारस्तानियाँ गोया (राख का एक ढेर) है जिसे (अन्धड़ के रोज़ हवा का बड़े ज़ोरों का झोंका उड़ा लेगा जो कुछ उन लोगों ने (दुनिया में) किया कराया उसमें से कुछ भी उनके क़ाबू में न होगा यही तो पल्ले दर्जे की गुमराही है
19أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ إِن يَشَأْ يُذْهِبْكُمْ وَيَأْتِ بِخَلْقٍ جَدِيدٍ
क्या तूने नहीं देखा कि ख़ुदा ही ने सारे आसमान व ज़मीन ज़रुर मसलहत से पैदा किए अगर वह चाहे तो सबको मिटाकर एक नई खिलक़त (बस्ती) ला बसाए
20وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ بِعَزِيزٍ
औ ये ख़ुदा पर कुछ भी दुशवार नहीं
21وَبَرَزُوا لِلَّهِ جَمِيعًا فَقَالَ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا مِنْ عَذَابِ اللَّهِ مِن شَيْءٍ ۚ قَالُوا لَوْ هَدَانَا اللَّهُ لَهَدَيْنَاكُمْ ۖ سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَجَزِعْنَا أَمْ صَبَرْنَا مَا لَنَا مِن مَّحِيصٍ
और (क़यामत के दिन) लोग सबके सब ख़ुदा के सामने निकल खड़े होगें जो लोग (दुनिया में कमज़ोर थे बड़ी इज्ज़त रखने वालो से (उस वक्त) क़हेंगें कि हम तो बस तुम्हारे क़दम ब क़दम चलने वाले थे तो क्या (आज) तुम ख़ुदा के अज़ाब से कुछ भी हमारे आड़े आ सकते हो वह जवाब देगें काश ख़ुदा हमारी हिदायत करता तो हम भी तुम्हारी हिदायत करते हम ख्वाह बेक़रारी करें ख्वाह सब्र करे (दोनो) हमारे लिए बराबर है (क्योंकि अज़ाब से) हमें तो अब छुटकारा नहीं
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Tuesday, August 18, 2026

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