अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلَمْ تَرَ: क्या तुमने नहीं देखा / क्या तुम्हें ज्ञात नहीं (यहाँ "देखना" का अर्थ जानना और समझना है)
- بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, उचित और सही उद्देश्य के साथ
- يُذْهِبْكُمْ: तुम्हें ले जाए, तुम्हें मिटा दे, तुम्हें समाप्त कर दे
- خَلْقٍ جَدِيدٍ: नई सृष्टि, नए लोग
विस्तृत व्याख्या:
क्या तुमने इस सत्य पर ध्यान नहीं दिया और इसे नहीं जाना कि अल्लाह ने आकाशों (सारे आसमानों) और धरती को सत्य के साथ पैदा किया है? अर्थात् उसने इन्हें बेकार और अकारण नहीं बनाया, बल्कि इन्हें एक गंभीर और सही उद्देश्य के साथ बनाया है। यह सृष्टि अपने आप में अल्लाह की एकता, उसकी असीम शक्ति और उसकी पूर्ण बुद्धिमत्ता की स्पष्ट निशानी है। यह सब कुछ इसलिए है ताकि मनुष्य इन निशानियों को देखकर अपने रब को पहचाने, केवल उसी की इबादत करे और उसके साथ किसी को साझी न बनाए।
फिर अल्लाह तआला अपनी पूर्ण शक्ति और अधिकार की याद दिलाते हुए कहता है कि यदि वह चाहे तो तुम सबको समाप्त कर दे और तुम्हारे स्थान पर एक नई सृष्टि ले आए — ऐसे लोग जो उसकी आज्ञा का पालन करें, उसकी इबादत करें और उसके प्रति आज्ञाकारी हों। यह उसके लिए बिल्कुल आसान है, क्योंकि जिसने पहली बार आकाशों और धरती को पैदा किया, उसके लिए दोबारा पैदा करना और भी आसान है। यह बात उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ते हैं और उसकी इबादत से इनकार करते हैं, कि वे अपने रब की शक्ति को भूल न जाएँ।
शिक्षाएँ और लाभ:
- यह आयत हमें सिखाती है कि इस पूरी सृष्टि को देखकर हमें अपने रब की बड़ाई और उसकी शक्ति को पहचानना चाहिए। आकाश और धरती की रचना कोई खेल नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की महानता का जीवंत प्रमाण है।
- अल्लाह तआला की शक्ति असीम है। जिसने इस विशाल ब्रह्मांड को बनाया, उसके लिए मनुष्यों को मिटाकर नई सृष्टि लाना कोई कठिन काम नहीं है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह के सामने विनम्र रहना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की इबादत और आज्ञाकारिता ही हमारे अस्तित्व का असली उद्देश्य है। यदि हम इस उद्देश्य को भूल जाएँ, तो हमारा जीवन बेकार है, और अल्लाह हमारे स्थान पर ऐसे लोगों को ला सकता है जो उसकी इबादत को सही तरीके से निभाएँ।
- इस आयत में उन लोगों के लिए एक नर्म चेतावनी है जो अल्लाह की याद से गाफिल हैं कि वे अपनी ज़िंदगी को संभाल लें और अपने रब की ओर लौट आएँ, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और उसकी शक्ति के आगे किसी की कोई चारा-जोई नहीं चल सकती।
📜 आयत 17-21 — इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 19
सूरा इब्राहीम आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तूने नहीं देखा कि ख़ुदा ही ने सारे आसमान…सूरा आयत 19/52 — इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: इब्राहीम सुनें, इब्राहीम अनुवाद, इब्राहीम mp3, इब्राहीम pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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