इब्राहीम · 50/52
अनुवाद उच्चारण — इब्राहीम
سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ ۝٥٠
Saraabeeluhum min qatiraaninw wa taghshaa wujoohahumun Naar
📖 हिंदी अर्थ
उनके (बदन के) कपड़े क़तरान (तारकोल) के होगे और उनके चेहरों को आग (हर तरफ से) ढाके होगी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَرَابِيلُهُم (सराबीलुहुम): उनके कुर्ते या पहनावे।
  • قَطِرَانٍ (क़तिरान): एक अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ (तारकोल), जिसे खुजली वाले ऊँटों पर लेप किया जाता था। यह आग को बहुत तेज़ी से पकड़ता है और जलने पर त्वचा को झुलसा देता है।
  • تَغْشَى (तग़शा): ढक लेना, छा जाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़ियामत के दिन काफ़िरों और मुशरिकों की भयानक स्थिति का वर्णन कर रही है। उस दिन उनके शरीर पर जो कुर्ते (पहनावे) होंगे, वे क़तिरान (तारकोल) के होंगे। यह पदार्थ अत्यंत ज्वलनशील होता है, जिसे आग के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेती है और त्वचा को बुरी तरह झुलसा देती है। यही उनका पहनावा होगा, जो उनकी यातना को और अधिक बढ़ा देगा।

इसके अलावा, आग उनके चेहरों को भी ढक लेगी और उन्हें जला देगी। चेहरा इंसान का सबसे प्रतिष्ठित अंग है, और उस दिन उनके चेहरे ही सबसे पहले आग की लपटों से झुलसेंगे, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अपने चेहरों को सजदे के लिए नहीं झुकाया और न ही अल्लाह की इबादत के लिए इस्तेमाल किया। यह उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और दर्दनाक सज़ा होगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की अस्थायी सुख-सुविधाओं और ठाठ-बाठ पर भरोसा नहीं करना चाहिए। क़ियामत का दिन वास्तविक और निश्चित है, जहाँ हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल मिलेगा।
  2. अल्लाह की इबादत और उसके आगे सजदा करना ही इंसान को उस दिन की यातना से बचा सकता है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे अपना चेहरा नहीं झुकाते, उन्हें उस दिन आग के सामने झुकना पड़ेगा।
  3. यह आयत हमें दिखाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल सटीक है। जिस तरह काफ़िरों ने दुनिया में अपने शरीर और चेहरे को अल्लाह की इबादत से दूर रखा, उसी तरह उन्हें आख़िरत में उन्हीं अंगों से यातना दी जाएगी।
  4. इस आयत से हमें अपने जीवन को सुधारने की प्रेरणा मिलती है कि हम अपने हर अंग को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार इस्तेमाल करें, ताकि उस दिन हमारा चेहरा नूरानी हो और हम जन्नत की नेमतों से सराबोर हों।
🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — इब्राहीम

48يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
(मगर कब) जिस दिन ये ज़मीन बदलकर दूसरी ज़मीन कर दी जाएगी और (इसी तरह) आसमान (भी बदल दिए जाएँगें) और सब लोग यकता क़हार (ज़बरदस्त) ख़ुदा के रुबरु (अपनी अपनी जगह से) निकल खड़े होगें
49وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें
50سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ
उनके (बदन के) कपड़े क़तरान (तारकोल) के होगे और उनके चेहरों को आग (हर तरफ से) ढाके होगी
51لِيَجْزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
ताकि ख़ुदा हर शख़्श को उसके किए का बदला दे (अच्छा तो अच्छा बुरा तो बुरा) बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
52هَٰذَا بَلَاغٌ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُوا بِهِ وَلِيَعْلَمُوا أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَلِيَذَّكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ
ये (क़ुरान) लोगों के लिए एक क़िस्म की इत्तेला (जानकारी) है ताकि लोग उसके ज़रिये से (अज़ाबे ख़ुदा से) डराए जाए और ताकि ये भी ये यक़ीन जान लें कि बस वही (ख़ुदा) एक माबूद है और ताकि जो लोग अक्ल वाले हैं नसीहत व इबरत हासिल करें
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अनुवाद — इब्राहीम 50

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Tuesday, August 18, 2026

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