इब्राहीम · 51/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा इब्राहीम
لِيَجْزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ ۝٥١
Liyajziyal laahu kulla nafsim maa kasabat; innal laaha saree`ul hisaab
📖 हिंदी अर्थ
ताकि ख़ुदा हर शख़्श को उसके किए का बदला दे (अच्छा तो अच्छा बुरा तो बुरा) बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيَجْزِيَ: बदला देने के लिए, प्रतिफल देने के लिए।
  • مَا كَسَبَتْ: जो कुछ उसने कमाया (अर्थात् अच्छे या बुरे कर्म)।
  • سَرِيعُ الْحِسَابِ: हिसाब लेने में बहुत तेज़, जो एक क्षण में सबका हिसाब कर दे।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने यह बताया कि क़ियामत के दिन सभी लोग अपने-अपने कर्मों का पूरा-पूरा बदला पाएँगे। यह बदला इसलिए होगा ताकि अल्लाह हर व्यक्ति को उसके किए हुए कर्मों के अनुसार प्रतिफल दे—चाहे वह नेकी हो या गुनाह। जिसने दुनिया में अच्छे कर्म किए, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जिसने बुरे कर्म किए, उसे उसका परिणाम भुगतना होगा। अल्लाह का हिसाब लेने का तरीका अत्यंत तेज़ है; वह एक ही क्षण में सारे प्राणियों का हिसाब कर सकता है, क्योंकि उसकी शक्ति और ज्ञान की कोई सीमा नहीं। यह हिसाब इतनी जल्दी होगा कि मनुष्य कल्पना भी नहीं कर सकता। यह आयत उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अत्याचार करते हैं और यह सोचते हैं कि उनके कर्मों का कोई हिसाब नहीं होगा, और यह नेक लोगों के लिए खुशखबरी है कि उनकी मेहनत और अच्छे कर्म व्यर्थ नहीं जाएँगे।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का न्याय अत्यंत सटीक है—हर अच्छे और बुरे कर्म का हिसाब होगा, कोई कर्म छोटा या बड़ा नहीं भूला जाएगा।
  2. यह हमें ज़िम्मेदारी का एहसास कराती है कि हम अपने हर काम के बारे में सोच-समझकर चलें, क्योंकि हमारा हर कर्म दर्ज किया जा रहा है।
  3. अल्लाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह न्याय करने में किसी की मदद का मोहताज नहीं, और उसका हिसाब इतना तेज़ है कि उसमें किसी प्रकार की देरी या ग़लती की गुंजाइश नहीं।
  4. यह आयत मुसलमान को आश्वस्त करती है कि यदि दुनिया में किसी को उसका हक़ नहीं मिला, तो अल्लाह के यहाँ उसे पूरा-पूरा बदला मिलेगा, इसलिए निराश नहीं होना चाहिए।
  5. यह हमें अल्लाह से डरने और उसकी इबादत में सच्चे रहने की प्रेरणा देती है, क्योंकि जो व्यक्ति यह जानता है कि उसका हर कर्म देखा जा रहा है और उसका हिसाब होना है, वह कभी बुराई की ओर नहीं बढ़ सकता।


📜 आयत 49-52 — सूरा इब्राहीम

49وَتَرَى الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ مُّقَرَّنِينَ فِي الْأَصْفَادِ
और तुम उस दिन गुनेहगारों को देखोगे कि ज़ज़ीरों मे जकड़े हुए होगें
50سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٍ وَتَغْشَىٰ وُجُوهَهُمُ النَّارُ
उनके (बदन के) कपड़े क़तरान (तारकोल) के होगे और उनके चेहरों को आग (हर तरफ से) ढाके होगी
51لِيَجْزِيَ اللَّهُ كُلَّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
ताकि ख़ुदा हर शख़्श को उसके किए का बदला दे (अच्छा तो अच्छा बुरा तो बुरा) बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
52هَٰذَا بَلَاغٌ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُوا بِهِ وَلِيَعْلَمُوا أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٌ وَاحِدٌ وَلِيَذَّكَّرَ أُولُو الْأَلْبَابِ
ये (क़ुरान) लोगों के लिए एक क़िस्म की इत्तेला (जानकारी) है ताकि लोग उसके ज़रिये से (अज़ाबे ख़ुदा से) डराए जाए और ताकि ये भी ये यक़ीन जान लें कि बस वही (ख़ुदा) एक माबूद है और ताकि जो लोग अक्ल वाले हैं नसीहत व इबरत हासिल करें
इब्राहीमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
51आयत

अनुवाद — इब्राहीम 51

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Saturday, October 3, 2026

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