अल-हिज्र · 18/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
إِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُّبِينٌ ۝١٨
Illaa manis taraqas sam`a fa atba`ahoo shihaabum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो शैतान चोरी छिपे (वहाँ की किसी बात पर) कान लगाए तो यहाब का दहकता हुआ योला उसके (खदेड़ने को) पीछे पड़ जाता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اسْتَرَقَ السَّمْعَ: चोरी-छिपे आकाश की बातें सुनना, यानी फ़रिश्तों की बातचीत को गुप्त रूप से सुनने की कोशिश करना।
  • شِهَابٌ: आग का लपकता हुआ तारा/उल्का, जो आकाश से गिरता है।
  • مُبِينٌ: स्पष्ट और प्रत्यक्ष, जो दिखाई दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला बताते हैं कि शैतानों को आकाश की ऊपरी दुनिया की बातें सुनने से रोक दिया गया है। हाँ, उनमें से कोई शैतान कभी-कभी चोरी-छिपे फ़रिश्तों की बातचीत सुनने की कोशिश करता है, लेकिन जैसे ही वह ऐसा करता है, एक चमकता हुआ और स्पष्ट उल्का (आग का तारा) उसका पीछा करके उसे जला देता है या नष्ट कर देता है। यह उल्का उसे उसकी कोशिश में कामयाब नहीं होने देता।

हालाँकि, कुछ मामलों में अल्लाह की मशीयत (इच्छा) से शैतान उस सुनी हुई बात का कुछ हिस्सा अपने साथी (ज्योतिषी या काहिन) तक पहुँचा देता है, इससे पहले कि उल्का उसे जला दे। लेकिन यह बात अधूरी और मिली-जुली होती है, जिसमें सच्चाई के साथ बहुत सा झूठ भी मिला दिया जाता है। इसलिए काहिनों और ज्योतिषियों की बातें पूरी तरह झूठी और भ्रामक होती हैं।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ग़ैब (छिपी हुई बातों) का ज्ञान केवल अल्लाह के पास है, और शैतानों को भी इस पर पूरी तरह पहुँच नहीं है। अतः हमें केवल अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर भरोसा करना चाहिए, न कि ज्योतिषियों और काहिनों की बातों पर।
  2. यह अल्लाह की क़ुदरत का प्रमाण है कि वह आकाशों की हिफ़ाज़त करता है और अपने फ़रिश्तों की बातचीत को शैतानों से महफ़ूज़ रखता है। यह हमें अल्लाह की अज़मत और उसके नियंत्रण पर ईमान लाने की तऱग़ीब देता है।
  3. इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम में भविष्यवाणी, कुंडली, टोना-टोटका और ज्योतिष जैसी चीज़ें नाजायज़ हैं, क्योंकि ये शैतानी वसवसों पर आधारित हैं और इनमें सच्चाई का कोई ठोस आधार नहीं होता।
  4. यह हमें यह भी सिखाता है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त और रहमत उसके बंदों पर हमेशा छाई रहती है, और वह अपने दीन को हर बुराई से बचाता है। यह एक मोमिन के दिल को सुकून देता है कि सच्चाई हमेशा बुलंद रहेगी और झूठ का अंजाम तबाही है।


📜 आयत 16-20 — सूरा अल-हिज्र

16وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِرِينَ
और हम ही ने आसमान में बुर्ज बनाए और देखने वालों के वास्ते उनके (सितारों से) आरास्ता (सजाया) किया
17وَحَفِظْنَاهَا مِن كُلِّ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और हर शैतान मरदूद की आमद रफत (आने जाने) से उन्हें महफूज़ रखा
18إِلَّا مَنِ اسْتَرَقَ السَّمْعَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ مُّبِينٌ
मगर जो शैतान चोरी छिपे (वहाँ की किसी बात पर) कान लगाए तो यहाब का दहकता हुआ योला उसके (खदेड़ने को) पीछे पड़ जाता है
19وَالْأَرْضَ مَدَدْنَاهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ وَأَنبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَيْءٍ مَّوْزُونٍ
और ज़मीन को (भी अपने मख़लूक़ात के रहने सहने को) हम ही ने फैलाया और इसमें (कील की तरह) पहाड़ो के लंगर डाल दिए और हमने उसमें हर किस्म की मुनासिब चीज़े उगाई
20وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَايِشَ وَمَن لَّسْتُمْ لَهُ بِرَازِقِينَ
और हम ही ने उन्हें तुम्हारे वास्ते ज़िन्दगी के साज़ों सामान बना दिए और उन जानवरों के लिए भी जिन्हें तुम रोज़ी नहीं देते
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 18

सूरा अल-हिज्र आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो शैतान चोरी छिपे (वहाँ की किसी बात पर)…

सूरा आयत 18/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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